भोपाल। मध्यप्रदेश में चल रही संविदा शिक्षकों एवं अध्यापकों की समान वेतन व संविलियन की मांग के सदंर्भ में यूं तो स्वयं शिवराज भी कई बार समर्थन दोहरा चुके हैं परंतु अभी तक आदेश जारी नहीं किए गए हैं। अध्यापक मोर्चा के मनोज मराठे ने मुख्यमंत्री के नाम खुलेखत में आग्रह किया है कि अब देरी ना करें, आचार संहिता से पहले अध्यापकों के समान वेतन व संविलियन के आदेश जारी करें।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम यह खत में यथावत प्रकाशित कर रहे हैं। आप भी पढ़िए क्या कुछ लिखा है मनोज मराठे ने अपने खत में:—
प्रति,
मुख्यमंत्री महोदय
मध्यप्रदेश शासन
महोदय,
अखण्डीत मध्यप्रदेश में जिन शिक्षाकर्मी बंधुओं की नियुक्ति हुई थी, राज्य विभाजन के बाद इनमें से अनेक शिक्षाकर्मी छतीसगढ में संविलियन हो गयें किंतु आज उन्हे वहां कि सरकार ने समान कार्य के लिए समान वेतन का लाभ देने के साथ अध्यापक वर्ग 2 को प्रधानपाठक एवं अध्यापक वर्ग एक को प्राचार्य के पद पर प्रमोशन देने की घोषणा कर शिक्षाकर्मी व उनके परिवार व बच्चों को बहुत बड़ा तोहफा दे दिया है।
जब एक साथ भर्ती हुए कर्मीयों को छतीसगढ़ में लाभ दे दिया गया है तो उसी दर्ज पर उसी समय नियुक्त किये गये यहा के शिक्षाकर्मियों को उसी तरह समान कार्य समान वेतन के साथ प्रमोशन का लाभ दिया जाना न्यायोचित है और उनका हक भी।
म.प्र. सरकार ही पिछले 4 महिनों से अध्यापकों को छटा वेतनमान और अन्य लाभ देने का प्रयास कर रही है किन्तु आचार संहिता लग गई तो प्रयास धरे रह जायेंगें।
माननीय मुख्यमंत्री महोदय छतीसगढ में भाजपा की रमन सरकार ने निर्णय लिया तो आपको भी शीघ्र उचित निर्णय ले लेना चाहिए फिर चाहे आप पाच साल, आठ साल या बारह साल के हिसाब से या आप चाहे तो आज से ही सभी अध्यापक संवर्ग को समान कार्य समान वेतन के साथ प्रमोषन का आदेश जारी कर सकते है।
इसके लिए आपको संयुक्त अध्यापक मोर्चा संघ या किसी गुट से चर्चा करने की कोई और कतई आवश्यकता नही है, अब समय आ गया है कि शीघ्र यथा शीघ्र प्रदेष अध्यापक व संविदा शिक्षकों के संबंध में संविलियन सहित सभी मांगो के आदेश सीधे प्रसारीत करें।
महोदय जब अध्यापक संवर्ग को अध्यापक संविदा व गुरूजी द्वारा आंदोलन किया जा रहा था कुछ संगठन पदाधीकारीयों को छोड लगभग सभी हड़ताल पर थे तब आपकी ओर से हडताल समाप्त करने पर ही वार्ता व मांगो पर चर्चा करने की बात की जा रही थी पर लंबा समय हडताल समाप्ती के बाद गुजर चुका है और सरकार मौन क्यों ?
तो अब किसी भी स्तर से प्रत्येक अध्यापक और संविदा साथी व छतीसगढ सरकार द्वारा आदेष जारी होने के बाद उसी तरह आपकी ओर निहार रहे है जिस तरह की बारिश की देरी के कारण सूखे खेत से किसान लगातार आकाश की ओर निहारता है आपके नेतृत्व में प्रदेश की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है यह प्रदेश की तात्कालिन कांग्रेस सरकार ने अपना अंतिम बजट पेश किया था वह मात्र 24 हजार का पेज किया था और सरकार औवरडाफ्ट थी और अब आपके नेतृत्व में प्रदेश का बजट एक लाख हजार करोड़ का प्रस्तुत किया है अर्थात् मध्यप्रदेश की आर्थिक विकास दर मजबुत हुई है।
बजट की परेशानी नही है केवल आपकी इच्छाशक्ति पर निर्भर है और आपकी इच्छा है क्योकि आपने छिदवाडा से लेकर रतलाम व दमोह तक अपनी सभाओं में कहा कि अध्यापक मेरे छोटे भाई है मैं जल्दी ही इनके लिए कुछ अच्छा करूगां। ऐसा नही हो कि आप अच्छा करने की सोचते रहे और करने के पहले चुनाव आचार संहिता लग जाये क्योकि वह कार्य केन्द्रीय निर्वाचन के हाथ में हो आपके हाथ में अध्यापक बंधुओ के लिए शीघ्र समान कार्य समान वेतन संविलियन व प्रमोषन के आदेष जारी करना मामुली बात है फिर प्रदेष न तो अध्यापको के गुट होंगे न हड़ताले।
साथ ही प्रदेश में जब शिक्षाकर्मियों की नियुक्ति मेरीट के आधार पर हुई उस समय बीएड, डी0एड0 डिग्री धारी शिक्षाकर्मियों का आठ नंबर बोनस दिये और अब जिनका बी0एड0 नही उन्हे उस समय आठ नंबर बोनस नही दिये किंतु आज उनकी अगली वार्षिक वेतनवृद्धी रोकी जा रही है। जबकि बी0एड0 वालों को पहले बोनस अंक और अब वार्षिक वेतनवृद्धि इस तरह दोहरा लाभ सेवा में कभी नही दिया जाता है इसलिये उस समय से बी0एड0 न होने पहले अध्यापको की रोकी गई पहले वार्षिक वेतनवृद्धि लागु की जाये और जिस तरह से पुराने शिक्षक बंधुओ को बी0एड0 की अतिरिक्त एक वार्षिक वेतनवृद्धि दी जाती है।
वैसी ही अतिरिक्त वार्षिक वेतनवृद्धि अध्यापको को दि जावे क्योकि वार्षिक वेतनवृद्धि अतिरिक्त योग्यता का परिणाम न होकर वर्षभर किये गये कार्य का परिणाम होती है।
मनोज मराठे
अध्यापक मोर्चा म0प्र0
मो. 9826699484
श्री मराठे सहित मोर्चे के जिलाध्यक्ष कसरसिंह सोलंकी अध्यापके मोर्चे के सेंधवा ब्लाक अध्यक्ष विटठल चैधरी वरिष्ठ सदस्य रविन्द्र बडगुजर जितेन्द्र बाविस्कर मुश्ताक खान , अनिस शेख, सुनील वाडिले, जगदीश वाघरे, युनुस शेख, जाकिर बाबा, आदि ने प्रदेश मुख्मयंत्री पत्र लिखकर आचार संहिता के पहले अध्यापको समस्त आदेश जारी करने की मांग की ।