अनूपपुर। लगभग 10 माह पूर्व पवित्र नगरी अमरकंटक के तत्कालीन टीआई अरूण कुमार सिंह पर उनकी नाबालिग रिश्तेदार के साथ बलात्कार का आरोप सिद्ध पाये जाने पर अनूपपुर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश पी.के.वर्मा ने 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाते हुए 25 हजार रूपए का अर्थदण्ड आरोपित किया है।
मामले से जुडे सूत्रों के अनुसार जिला एवं सत्र न्यायाधीश माननीय पी.के.वर्मा ने प्रकरण की परिस्थितियों एवं तर्कों को मद्दे नजर रखकर आरोपी अरूण सिंह पिता शिवपाल सिंह उम्र 56 वर्ष निवासी गोपालपुर थाना रामपुर नैकिन जिला सीधी म.प्र. को भा.दं.सं. की धारा ३७६(२)(क)(१) के अंतर्गत दण्डनीय अपराध के आरोप में 10 वर्ष के सश्रम कारावास एवं २५ हजार रूपए अर्थदण्ड की सजा सुनाई। अर्थदण्ड की राशि न अदा करने पर एक वर्ष अतिरिक्त सश्रम कारावास भोगना होगा।
नाबालिग से किया था बलात्कार- ज्ञातव्य है कि जिला अंतर्गत अमरकंटक के तत्कालीन नगर निरीक्षक अरूण कुमार सिंह ने 20—21 अगस्त 12 की रात जवाहर नवोदय विद्यालय में कक्षा 11वीं की अपनी एक रिश्तेदार छात्र, जिसके वे स्थानीय अभिवावक थे, के साथ बलात्कार किया। घटना की सूचना मिलने पर लडकी की मां की शिकायत पर पुलिस महानिरीक्षक शहडोल के निर्देशानुसार अनूपपुर पुलिस अधीक्षक आर.एस.डेहरिया एवं एडीशनल एसपी सुश्री आभा टोप्पो की उपस्थिति में पीडिता छात्र का बयान पंजीबद्ध कर अमरकंटक थाने में मामला दर्ज किया गया। मौके से भाग रहे अरूण सिंह को डिण्डौरी पुलिस द्वारा घेराबंदी कर पकडा गया और छात्र का जिला चिकित्सालय अनूपपुर में चिकित्सकीय परीक्षण कराया कर रिपोर्ट पाजिटिव पाए जाने पर आरोपी नगर निरीक्षक को 10 अगस्त की देर शाम न्यायालय में प्रस्तुत किया परंतु समय अधिक हो जाने के कारण पूरी सुनवाई नहीं हो सकी और सुनवाई आज 21 अगस्त को न्यायालय में पेश किया गया जहां से न्यायाधीश ने उसे जेल भेज दिया।
वर्दी व रिश्ता हुआ तार-तार
घटना ने म.प्र. पुलिस की छवि पर बडा धब्बा लगाया एक ओर जहां प्रदेश की सरकार व पुलिस विभाग के मुखिया पुलिस को साफ व स्वच्छ बनाने में लगे हैं वहीं दूसरी ओर पुलिस के ही आला अधिकारी इस तरह के घटनाओं को अंजाम देकर देशभक्ति, जन सेवा का नारा देने वाले अपने ही रिश्ते को दागदार कर दिया।
यह थे सजा के बिंदु
मामले से जुडे सूत्रों के अनुसार न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के तर्क एवं सभी बिंदु सुनने के बाद सजा सुनाते हुए कहा कि आरोपी अरूण कुमार सिंह अपने निकट रिश्तेदार की अवयस्क पुत्री, जिसके स्थानीय अभिभावक भी वे थे, के साथ एक योजनाबद्ध के तहत उसे अपने घर ले जाकर 16 वर्षीय छात्रा के साथ आरोपी ने बलात्संग किया। आरोपी के उक्त कृत्य से पीडिता ने शरीरिक और मानसिक कष्ट झेला है। घटना की विवेचना साक्ष्य के आधार पर की गई।
आरोपी द्वारा किए गए बलात्संग से पीडिता को यह दंश उसके मस्तिष्क में हमेशा रहेगा और जिसकी पीडा वह जीवनभर झेलेगी। आरोपी ने न केवल रिश्तों के साथ विश्वासघात किया है, अपितु पुलिस अधिकारी होने के कारण उसका कर्तव्य था कि इस तरह के अपराध को वह रोके। इसके विपरीत कृत्य की परिस्थिति को देखते हुए आरोपी को उक्त सजा सुनाई गई।
पलट गए थे शिकायतकर्ता
विभागीय एवं सुविज्ञ सूत्रों के अनुसार मामले का सर्वाधिक दुखद और शर्मनाक पक्ष यह था कि अज्ञात कारणों से शिकायतकर्ता महिला एवं पीडित लडकी अपने पूर्व के बयान से पलट गए और घटना से ही इंकार करने लगे। शासकीय अधिवक्ता दुर्गेन्द्र सिंह भदौरिया के समस्त तर्कों को सुनने एवं स्थानीय पुलिस द्वारा की गई ईमानदार पहल के कारण माननीय न्यायाधीश महोदय ने तर्क संगत एवं साक्ष्य आधारित निर्णय देते हुए बलात्कारियों को कडा संदेश देने की कोशिश की है, जिसकी सर्वत्र चर्चा हो रही है।
