भोपाल। आपका कोई परिजन सीमा पार चला जाए, पंजाब पुलिस उसे गिरफ्तार कर जेल में डाल दे, दो साल बाद वो रिहा होकर वापस आए तो आप क्या करेंगे? बॉर्डर पर उसे लेने के लिए पूरे परिवार सहित पहुंच जाएंगे ना? लेकिन सीताराम इतना खुश किस्मत नहीं है।
वो पूरे दो साल बाद रिहा होकर भारत लौटा परंतु उसे लेने उसके परिवार से कोई नहीं आया। वो पाकिस्तान जेल में मिली पाश्विक प्रताड़ना से विक्षिप्त हो गया था, उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन फिर भी परिवार से कोई देखने नहीं आया। उल्टे उसे स्वीकार करने से ही इंकार कर दिया। अब वो ठीक हो गया है तो पंजाब पुलिस खुद उसे लेकर मध्यप्रदेश आ रही है। ताकि उसे उसके परिवार को सौंपा जा सके।
पाकिस्तान की कोट लखपत जेल में दो वर्ष तक सजा काटने के बाद जून 2010 में भारत लौटे सीता राम निवासी गांव बसनेर जिला खरगौन मध्य प्रदेश को घर भेजने के लिए मंगलवार को पुलिस की एक टुकड़ी रवाना हुई। अमृतसर पंजाब के सरकारी विद्यासागर मनोरोग अस्पताल में इलाज के बाद ठीक हो चुके सीता राम को उनके परिजन स्वीकार करने से इनकार कर रहे थे, लेकिन अब अस्पताल के डायरेक्टर बीएल गोयल द्वारा किए पत्राचार के बाद डीसी ने पुलिस कमिश्नर को पत्र लिख, सीता राम को पुलिस के साथ उसके गांव भेजने के लिए निर्देश दिए हैं। पुलिस टुकड़ी सीता राम को लेकर मंगलवार सुबह सच्चखंड एक्सप्रेस से रवाना हुई।
डा. बीएल गोयल ने बताया कि 23 जून 2010 को पाकिस्तान द्वारा 17 भारतीयों को रिहा किया गया था। मानसिक हालत ठीक न होने के कारण सीता राम को इलाज के लिए अमृतसर के सरकारी विद्यासागर मनोरोग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अब वह बिल्कुल ठीक है।
सोमवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए सीताराम ने कहा कि वह पाकिस्तान कैसे चला गया। इसकी कोई जानकारी नहीं है। कोट लखपत जेल में वह दो वर्ष कैद रहा। वहां जेल में कैद भारतीयों पर हो रहे अत्याचार को देख वह मानसिक रूप में बीमार हो गया था। घर जा रहे सीता राम ने कहा कि यदि उसके परिजन अस्पताल से उसे लेकर जाते तो उसकी खुशी बढ़ जाती। जब उससे पूछा गया कि यदि उसके परिवार ने उसे स्वीकार न किया तो क्या करेगा? इस पर वह खामोश हो गया।