मनमाड इन्दौर रेल मार्ग मामले पर हाईकोर्ट ने रेल मंत्रालय को फटकारा

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इंदौर। मनमाड इंदौर रेल मार्ग को लेकर इंदौर हाईकोर्ट में विचाराधीन याचिका पर आज माननीय न्यायालय ने सुनवाई करते हुए रेलवे मंत्रालय को फटकार लगाते हुए कहा कि मनमाड इंदौर रेलमार्ग को कैसी और किस प्रकार की मंजूरी दी है की रिपोर्ट चार सप्ताह में पेश करे। समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों से काम नहीं चलेगा।

मंत्रालय स्वयं यह बताये कि इस मामले में रेलवे मंत्रालय ने बजट में क्या और कैसी मंजूरी दी है? आज हाईकोर्ट ने चली सुनवाई में डबल बेच के विद्वान न्यायाधीश श्री शांतनू केमकर व एस.के. शर्मा ने सुनवाई करते हुए शासन को फटकारा।

याचिकाकर्ता श्री मनोज मराठे की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अभिभाषक श्री के.एन.सिंह व सुश्री हेमलता गुप्ता ने रेलवे व प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत जवाब व रेलवे मंत्रालय महाराष्ट्र सरकार व म.प्र. सरकार को लेकर हाईपावर कमेटी द्वारा पेश की गई रिपोर्ट के संबंध में रिजाइंडर प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा ।

मान न्यायालय ने इस पर चार सप्ताह का समय दिया । रेलवे की ओर से पैरवी वरिष्ठ अभिभाषक आनंद पाठक व म.प्र. शासन की ओर से मनोज द्विवेदी ने पैरवी की। याचिकाकर्ता मनोज मराठे ने इस संबंध में कहा कि रेलवे मंत्रालय द्वारा 2004 में जब नितीश कुमार रेल राज्य मंत्री तब उन्होने सर्वे की मंजूरी दी थी। उसके पश्चात लालू यादव जब रेलवे मंत्री थे तब से अब तक चार बार मनमाड इंदौर रेलमार्ग को कभी पी.पी. के आधार पर तो कभी सैद्धांतिक मंजूरी दी है। तो पिछले बजट में रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने इसे मंजूरी दी। और रेलवे बोर्ड ने अंतिम सर्वे रिपोर्ट निर्माण कार्य की मंजूरी हेतु 3 हजार करोड की वित्तिय स्वीकृति के लिए हाल ही में सीबीआई की कार्यवाही में लपेटे में आई।

प. रेलवे जी.एम. महेश कुमार ने रिपोर्ट तैयार कर योजना आयोग व रेलवे मंत्रालय को पेश की थी। जिसके आधार पर इस मार्ग के निर्माण के टेंडर जारी हो जाने थे किन्तु रेलवे ने 1 रू से 39 रूपये घाटे के कई प्रोजेक्ट मंजूर किये व 18 प्रतिशत से अधिक फायदे के इस मार्ग को 10 प्रतिशत फायदे का बताकर राज्य सरकारों की वित्त्यि हिस्सेदारी के नाम पर लटकाया जा रहा है 2004 में इसकी लागत 1100 करोड थी जो 2010 में 1500 करोड और 2011 में 1750 करोड व पिछली बार अंतिम सर्वे के समय 3000 करोड और अब लगभग 4000 करोड की हो चुकी है। इस तरह रेलवे द्वारा लापरवाही और मनमाड इंदौर के साथ किये जा रहे भेदभाव के कारण दिन प्रतिदिन लागत बढ रही है जिसके लिए रेल जिम्मेदार है।

इस संबंध में हम रिजाइंडर में सभी तथ्य मय प्रमाण के माननीय न्यायालय में चार सप्ताह बाद पेश किये जाने वाले रिजाइंडर में प्रस्तुत करेंगे।

एडव्होकेट 
हेमलता गुप्ता
9827222641 

मनोज मराठे
याचिकाकर्ता
रेलवे मनमाड इंदौर

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