राकेश दुबे@प्रतिदिन। वो एक अनुमान था कि घोषणा जिसने प्रदेश कांग्रेस में हलचल मचा दी है और वह भी भोपाल से दिल्ली तक। कुछ रिश्ते तक दांव पर लग गये हैं। महाकौशल की ठाकुर लाँबी साफ कह रही है कि "ठिकानेदार हमेशा ठकुरसुहाती करते है।
" झाबुआ के आदिवासी दिल्ली कूच की तैयारी में हैं। इस सारे भूचाल के पीछे दिग्विजय सिंह का बयान है, यह अलग बात है की जिसके प्रति उन्होंने शुभकामना व्यक्त की है, वह सहमत नहीं हो रहा है और कांग्रेस के अधिकृत प्रवक्ता इसे दिग्विजय सिंह की व्यक्तिगत राय बता रहे हैं।
दिग्विजय सिंह के हवाले से छपी इस खबर से यह हंगामा शुरू हुआ है। दिग्विजय सिंह ने यह घोषणा कर दी है कि " विधानसभा चुनाव के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री होंगे ।" इस घोषणा या अनुमान के बाद हंगामा हो गया सीधे कोई किसी से कुछ न कह रहा है और न सुन रहा है। सीधी बात सिर्फ ज्योतिरादित्य ने की, "अभी ऐसा कुछ नहीं है ।" महाकौशल के एक स्थापित ठाकुर नेता जो एक समय बघेलखंड ठाकुर लाँबी के नजदीक थे। बहुत खफा है।
निजी बातचीत में वे यहाँ तक कह गये। "राजनीति बड़ी खराब चीज़ है , आज दिग्विजय सिंह जी रिश्तों तक को भूल कर ठकुरसुहाती में लग गये हैं।" इस बयान के बाद झाबुआ से एक आदिवासी प्रतिनिधि मंडल भी दिल्ली जाने को तैयार हो रहा है वह दिल्ली में " भूरिया जिंदाबाद " करेगा।
विशेषकर कांग्रेसी आदिवासी नेता हाईकमान से भी खफा है उन्हें इतिहास हमेशा दुःख देता है। मध्यप्रदेश की राजनीति उस घटनाक्रम की गवाह है जब विधायक दल का चुनाव जितने के बाद एक आदिवासी नेता मुख्यमंत्री नहीं हो सकें थे, बमुश्किल उन्हें उप मुख्यमंत्री बनाया गया था। फिर ऐसा ही अनुभव पिछड़े वर्ग के एक नेता के साथ हुआ था।
यूँ तो पराजय स्वीकार कर दिग्विजय सिंह प्रदेश की राजनीति से स्वयं विदा हो गये थे। कांग्रेस ने इस दौरान कई प्रयोग किये, अब उनकी वापिसी के लिए यह एक नई रणनीति है। वैसे दिग्विजय सिंह कह चुके हैं कि वे विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे ,लेकिन हाईकमान का हर आदेश वे पूरे भक्तिभाव से मानते है, और राघोगढ़ के राजा के रूप में पूरी श्रद्धा से ग्वालियर महाराज का साथ निभाते हैं। प्रदेश कांग्रेस ने अभी तो मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की इस घोषणा से पल्ला झाड़ लिया है, आगे कुछ भी हो सकता है।
