भोपाल। अब मऊ के दर्जी वीरेन्द्र राजपूत का बेटा भी कलेक्टर बनेगा। उसने संघ लोकसेवा आयोग की परीक्षा में 370वीं रैंक कर ली है। निरीष ने जो कुछ किया है शायद इसी को कहते हैं 'बाप का नाम रौशन करना।'
मध्यप्रदेश में भिंड जिले के गोहद विकासखंड के मउ कस्बे के दर्जी वीरेंद्र राजपूत के बेटे निरीष राजपूत ने इस साल की संघ लोकसेवा आयोग की परीक्षा में 370वीं रैक हासिल की है।
बिना कोचिंग के संघ लोकसेवा आयोग की परीक्षा में 370वीं रैक
खास बात यह है कि देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा के लिये निरीष ने किसी भी कोचिंग संस्थान की मदद न लेकर इस मिथक को भी तोड़ दिया है कि देश की इस सबसे बड़ी चुनौतीपूर्ण परीक्षा में पेशेवर लोगों के मार्गदर्शन और महंगे कोचिंग संस्थानों की मदद के बगैर सफलता अर्जित नहीं की जा सकती।
दो साल पढ़ाई छोड़ी, दो साल फेल भी हुए
निरीष ने बताया कि पढ़ाई के दौरान उसके परिवार की हालत आर्थिक रूप से अधिक बिगड़ गई थी। इसकी वजह से उसे दो साल तक पढ़ाई छोड़नी पड़ी लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। दो बार असफलता मिलने के बाद भी उसने हिम्मत के साथ इस परीक्षा में देश में 370वीं रैंक हासिल करने में सफलता प्राप्त कर ली।
अपने जैसे स्टूडेंट्स की मदद करूंगा
निरीष ने बताया कि वह अब ऐसे छात्रों की दिल से मदद करेगा जो पढ़कर एक मुकाम हासिल करना चाहते हैं। लेकिन आर्थिक रुप से कमजोर होने के कारण मंजिल तक पहुंचने में उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उसने बताया कि अगर कोई मन में ठान ले तो सफलता उसके कदम चूमती है। शर्त है कि वह कभी धैर्य नहीं खोए।
संविदा शिक्षक हैं दोनों बड़े भाई
उसने बताया कि इस परीक्षा की सभी तैयारी लगातार 18 घंटों तक निजी स्तर पर पढ़ाई कर सफल उम्मीदवारों की सूची में स्थान बनाया। निरीष के परिवार में दो बड़े भाई हैं जो संविदा शिक्षक हैं। निरीष की एक विवाहित छोटी बहन और 72 साल के वृद्ध पिता हैं।