भोपाल। पांच दिन पहले मंडीदीप में नाले के किनारे तीन युवकों की दरिंदगी का शिकार हुई आदिवासी मासूम की हालत में हल्का सुधार आया है, लेकिन वह अभी भी गहरे सदमे में है। आदिवासी मासूम बार-बार अपनी याददाश्त खो रही है।
वह कभी-कभी तो अपना नाम और निवास स्थान बता देती है, लेकिन कुछ क्षण बाद ही वह यह सब कुछ भूल जाती है। गहरे सदमे के कारण वह कई बार अपने मां-बाप को भी नहीं पहचानती। उसे नींद नहीं आ रही, जिससे उसकी दिमागी हालत ज्यादा खराब होने की आशंका बनी हुई है। मासूम इतनी ज्यादा सहमी हुई है कि आवाज देने पर घबरा जाती है तथा कुछ भी कहने लगती है, चिल्लाने लगती है।
इधर गैंगरेप के तीनों आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है। पूछताछ में पुलिस के हाथ अभी तक कोई खास उपलब्धि नहीं लगी है। इधर तीनों आरोपियों के फोरेंसिक जांच में पॉजिटिव नमूने आने से पुलिस को आरोपियों के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य उपलब्ध हो गया है।
दिमाग पर है गहरा आघात
मासूम का इलाज कर रहे डॉ. आरएन साहू ने बताया कि उसकी हालत में हल्का सुधार है, दरिंदगी के बाद से मासूम इतने सदमे में है कि वह बार-बार घटना के मंजर को याद कर चिल्लाने लगती है। डॉ. साहू ने बताया कि घटना का उसके दिमाग पर गहरा आघात लगा है। उसे नींद नहीं आ रही, वह कई बार अपने माता-पिता को भी पहचानने से इनकार कर देती है। इतना ही नहीं उसे ज्यादा आदमी देखने पर भय लगने लगता है। उन्होंने बताया कि इलाज चल रहा है। घाव रिकवर हो रहे हैं। वहीं बच्चा सर्जरी विभाग के प्रभारी डॉ. केएस बुधवानी ने बताया कि उसकी हालत में धीरे-धीरे सुधार आ रहा है। शनिवार सुबह उसने दलिया और पतली खिचड़ी भी खाना शुरू कर दिया है।