फिर से खुलेंगे पिछले 10 साल में पुलिस जांच के दौरान रफादफा कर दिए गए मामले

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ग्वालियर। दुष्कर्म एवं दुष्कर्म के बाद हत्या के प्रकरणों में साठगांठ कर फाइनल रिपोर्ट लगाने वाले पुलिस अफसर व आरोपी अब बच नहीं सकेंगे। प्रदेश में पिछले दस वर्ष में दुष्कर्म तथा  दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में फाइनल रिपोर्ट लगाने के मामले की समीक्षा शुरू कर दी गई है।

समीक्षा में यह देखा जाएगा कि आखिर ऐसी जरूरत क्यों पड़ी? साठगांठ कर या गलत तथ्यों के आधार पर फाइनल रिपोर्ट वाले मामले री-ओपन किए जाएंगे और इनके लिए जिम्मेदार पुलिस अफसरों के खिलाफ कार्रवाई होगी। ग्वालियर में एक साल में 21 ऐसे मामलों में फाइनल रिपोर्ट लगाई गई लेकिन अदालत से सिर्फ एक में स्वीकृति ली गई।

फाइनल रिपोर्ट वाले प्रकरणों की पहले थाना स्तर पर तलाश की जाएगी, उसके बाद इन प्रकरणों की डीएसपी, एएसपी व एसपी समीक्षा कर रिपोर्ट बनाएंगे।  दरअसल, ऐसे मामलों में अदालत की स्वीकृति भी नहीं ली जाती। दस वर्ष के दौरान दुष्कर्म एवं दुष्कर्म के बाद हत्या के उन गंभीर प्रकरणों को थानों से एकत्र किया जाएगा जिनमें फाइनल रिपोर्ट लगाई गई है लेकिन अदालत से इसकी स्वीकृति नहीं ली गई है।

आखिर क्यों पड़ी जरूरत ?

साक्ष्य न मिलने के आधार पर फाइनल रिपोर्ट लगाई गई है तो पुलिस ने साक्ष्य एकत्र करने के लिए क्या प्रयास किए?  प्रकरणों में फरियादी यदि पड़ताल के दौरान नहीं पहुंचा तो उसके लिए किस तरह के प्रयास किए गए?  प्रकरण में गवाह पक्षद्रोही (होस्टाइल) हुए तो उसका क्या कारण रहा?  फाइनल रिपोर्ट लगाने के दौरान उसकी स्वीकृत के प्रयास क्यों नहीं हुए?

भोपाल में होगी समीक्षा

प्रदेश के सभी जिलों से एकत्र होने वाले प्रकरणों की भोपाल में तीन एडीपीओ की कमेटी समीक्षा करेगी। समीक्षा के बाद सभी जिलों में गलत तथ्यों के आधार पर खत्म किए गए प्रकरणों को री-ओपन किया जाएगा। इसके साथ ही फाइनल रिपोर्ट लगाने व पड़ताल करने वाले अधिकारियों के खिलाफ जांचकर  कार्रवाई की जाएगी।

दस साल के दौरान निकल सकते हैं एक सैकड़ा मामले

प्रारंभिक समीक्षा में ग्वालियर जिले में वर्ष 2012-13 में दुष्कर्म के 21 गंभीर प्रकरणों में फाइनल रिपोर्ट लगाई गई। दस वर्ष के प्रकरणों की समीक्षा में एक सैकड़ा से अधिक मामले निकलने का अनुमान है जिनकी फाइनल रिपोर्ट स्वीकृति नहीं कराई गई है।

प्रदेश के अधिकांश एसपी ने किया था विरोध

शासन ने पूर्व में रेप के सभी प्रकरणों की खात्मा रिपोर्ट भोपाल में एडीपीओ की कमेटी से स्वीकृत कराए जाने की प्रक्रिया शुरू करने की योजना बनाई थी। शासन की इस योजना का प्रदेश के अधिकांश एसपी ने विरोध किया। इस विरोध के कारण रेप प्रकरण के खात्मा को नियमित रूप से भोपाल में कराए जाने के बजाय दस साल के प्रकरणों की समीक्षा कर गलत तथ्यों के आधार पर खत्म किए जाने वाले मामलों को री ओपन किए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई।

री ओपन किया जाएगा
॥दस वर्ष में रेप के गंभीर प्रकरणों में खात्मा लगाए जाने की स्वीकृत न मिलने के मामलों की समीक्षा की जाएगी। गलत आधार पर खात्मा रिपोर्ट वाले मामलों को री ओपन किया जाएगा।
आदर्श कटियार, आईजी,(ग्वालियर रेंज)
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