इसे कहते हैं कर्मचारियों की दादागिरी

shailendra gupta
भोपाल। कर्मचारियों की दादागिरी क्या होती है, इसका जीता जागत उदाहरण एमआईटीएस में गुरूवार को तब देखने को मिला जब निदेशक की कॉलर पकड़कर धमकाने वाला कर्मचारी, अपने साथियों सहित वापस आया और फिर से हंगामा किया। 

मामले की शुरूआत बुधवार को हुई जब एमआईटीएस में मशीन असिस्टेंट मुकेश मौर्य शराब पीकर आया और निदेशक प्रो. संजीव जैन से भिड़ गया। मुकेश ने निदेशक की कॉलर पकड़ी और धमकियां भी दीं। इस पर निदेशक ने मुकेश के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई। इसी तारतम्य में मुकेश को सस्पेंड कर दिया गया। 

गुरूवार को जैसे ही मुकेश को अपने निलंबन का पता चला, वो 15—20 साथियों को लेकर फिर से एमआईटीएस आ धमका और हंगामा करने लगा। जिस समय मुकेश ने हंगामा बरपाया, उसी समय एमआईटीएस में वर्ल्ड बैंक की टीम आई हुई थी। शोरशराबा शांत कराने के लिए निदेशक को एक बार फिर बाहर आना पड़ा। 

प्रो. संजीव जैसे ही बाहर आए मुकेश ने फिर से हंगामा शुरू कर दिया। शोरशराबा करने वाले स्वयं को मप्र अनुसूचित जनजाति एवं अधिकारी कर्मचारी संघ के प्रतिनिधि मंडल बता रहे थे और तत्काल मुकेश का सस्पेंशन वापस लेने की मांग कर रहे थे, परंतु प्रो. संजीव ने उनकी मांग अस्वीकार करते हुए प्रबंधन से मिलने को कहा। उन्होंने कहा कि निलंबन प्रबंधन ने किया है और बहाली का फैसला भी वही करेंगे। 

कुल मिलाकर एमआईटीएस लगातार दो दिनों तक मुकेश मौर्य का अखाड़ा बना रहा। 

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