भोपाल। भाजपा में सिंधिया राजघराने की प्रतिनिधि यशोधरा राजे सिंधिया ने प्रदेश कार्यसमिति में मुंह क्या खोला, कयासों का दौर शुरू हो गया। लोग बजाए यशोधरा राजे सिंधिया की बातों पर ध्यान देने के, केवल इस बात पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं कि आखिर यशोधरा मीटिंग में बोलीं ही क्यों।
बीते रोज भोपाल में हुई प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में यशोधरा राजे सिंधिया ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि भाजपा शहरी इलाकों में बहुत मजबूत है परंतु ग्रामीण इलाकों में भाजपा की पकड़ उतनी ही कमजोर है।
सिंधिया ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में लोगों को शिवराज सरकार की जनहितैषी योजनाओं का लाभ तो मिल रहा है परंतु ग्रामीणों को यह मालूम नहीं है कि यह योजनाएं भाजपा सरकार ने शुरू की हैं। उन्होंने बड़ी ही साफगोई से कहा कि कई ग्रामीण इलाकों में लोग मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को बहुत अच्छे से पहचानते हैं, परंतु यह नहीं जानते कि शिवराज सिंह भाजपा के नेता हैं और उनका चुनाव चिन्ह कमल है। ऐसी स्थिति में शिवराज फैक्टर का लाभ कम होने की संभावना है।
यशोधरा राजे सिंधिया ने यह बात भले ही संगठनहित में कही हो परंतु सिंधिया विरोधी इसे लेकर तेजी से सक्रिय हो गए और सवाल उठाने लगे कि यशोधरा राजे सिंधिया को इस बात का खुलासा करने की क्या जरूरत थी। अपनी साफगोई के लिए प्रख्यात यशोधरा राजे सिंधिया को भाजपा में उपाध्यक्ष तो बना दिया गया परंतु अब भाजपाई हाईकमान संकट में हैं कि पता नहीं कब कौन सा सच यशोधरा बयां कर दें और उनका बना बनाया इम्प्रेशन सरकार के सामने खराब हो जाए।
हालांकि यशोधरा राजे सिंधिया ने कुछ भी नया नहीं कहा है। शिवराज सिंह के पास मौजूद एक जमीनी रिपोर्ट में भी यही सब खुलासा हो चुका है। इसी रिपोर्ट के बाद शिवराज सरकार गांव की ओर कूच कर गई और पिछले चार छ महीने से किसानों और ग्रामीणों की चिंता में घुली जा रही है।
अब देखना रोचक होगा कि यशोधरा राजे सिंधिया जैसी स्टार प्रचारक का भाजपा मध्यप्रदेश के ग्रामीण इलाकों में उपयोग करने की योजना बना पाती है या नहीं। सनद रहे कि शिवराज सिंह के खिलाफ कांग्रेस ने ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस को मजबूत करने की जिम्मेदारी ज्योतिरादित्य सिंधिया को सौंप दी है और उनके खिलाफ