मुक्ति की तलाश में फिर पीथमपुर की ओर मुड़ा भोपाल का भूत

shailendra gupta
भोपाल। सन् 1984 हुए भोपाल गैसकांड का 346 मीट्रिक टन जहसीला कचरा जिसे भोपाल का भूत कहा जाना चाहिए, 28 साल बाद भी मुक्ति के तड़प रहा है और मध्यप्रदेश शासन ने एक बार फिर इसकी मुक्ति के लिए पीथमपुर की धरती को निर्धारित कर दिया है। सनद रहे कि भोपाल के इस भूत को अपनी जमीन पर दफन करने के लिए दुनिया का कोई शहर, कोई राज्य, कोई देश तैयार नहीं है। 

तमाम विरोधों के बावजूद यूनियन कार्बाइड के कचरे को पीथमपुर में नष्ट करने की कवायद एक बाद फिर शुरू हो गई है। इसके लिए केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा बाकायदा 11 से 15 जनवरी तक पीथमपुर के इंसीनरेटर में खतरनाक अपशिष्ट जलाकर उसकी क्षमता की जांच की। 

सूत्रों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद ही इस कचरे की टेस्टिंग की गई। इंसीनीरेटर में जलाया गया कचरा यूका कचरे के समान ही खतरनाक था। अब केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इसकी क्षमता की जांच की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगा। इस रिपोर्ट के आधार पर ही सुप्रीम कोर्ट कचरे को पीथमपुर इंसीनीरेटर में नष्ट करने पर अपना फैसला सुनाएगी। गौरतलब है कि यूनियन कार्बाइड कारखाने में इस समय करीब 346 मैट्रिक टन जहरीला कचरा रखा हुआ है। 

शासन ने कुछ साल पहले इस कचरे को प्रदेश के एक मात्र उच्च क्षमता वाले इंसीनीरेटर पीथमपुर में जलाने का प्रयास किया था, लेकिन गैस व पर्यावरणवादी संगठनों के विरोध के चलते शासन को अपने कदम वापस खींचने पड़े थे। विरोध के बाद इस कचरे को गुजरात और महाराष्ट्र में भी जलाने की कवायद की गई थी लेकिन दोनों राज्यों ने प्रदूषण का कारण बताते हुए अपने यहां कचरा जलाने से इंकार कर दिया।
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