ऐसी क्या मजबूरी है, जो “भाजपा” जरूरी है

shailendra gupta
राकेश दुबे/ प्रतिदिन/ लगभग सारी दुनिया जो भारत की राजनीति पर नजर रखती है,यह तथ्य जानती है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का राजनीतिक उपकरण भारतीय जनता पार्टी है | इस पार्टी का आगाज जनसंघ से हुआ| रामराज्य परिषद और हिन्दू महासभा जैसे प्रयोगों की असफलता के बाद राष्ट्रवादी सोच की पार्टी की आवश्यकता, ने इसे जन्म दिया |

तत्समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक जी से किसी ने यह पूछा था की यह क्यों? उत्तर आया था “गाजर की पुंगी बनाई है बजी तो ठीक, नहीं तो तोड़कर खा लेंगे |” आज फिर स्वयंसेवकों के मन में सवाल उठ रहा है और सरसंघचालक जी से उत्तर चाहते हैं यही क्यों ?

भारतीय जनता पार्टी ने अपने से दूर दिल्ली को, अपने पास करने के लिए बहुत से प्रयोग किया जिनमें राम जन्मभूमि पर राम मन्दिर की स्थापना का वादा, फिर वादा खिलाफी| फिर संतों के सहारे चुनावी वैतरणी, कुछ राज्यों में फतह| अब हकीकत इंदौर में आचार्य धर्मेन्द्र ने रो-रो कर बयान कर दी | २२ जनवरी को हिन्दू मान्यता के अनुसार एकादशी थी, और इंदौर में आचार्य धर्मेन्द्र उस चुनाव में उनके द्वारा किये गये प्रचार को अपकर्म मानकर बिलख रहे थे | जिससे इंदौर का एक अदना बालक “कैलाश” हो गया| वे दुखी थे कि उनके प्रचार और आशीर्वाद के उपयोग से बना “कैलाश” शीतलता न देकर कुछ और दे रहा है |

यह कहानी मात्र मध्य प्रदेश की नहीं है,अन्य स्थानों पर भी ऐसी-ऐसी कलाकृतियाँ पैदा हुई हैं, जिन्हें बनाकर कलाकार शर्मिंदा हैं | भ्रष्टाचार तो अपनी जगह है, आम शिष्टाचार के पैमाने तोड़ने में इन्होने कोई गुरेज नहीं किया है | दिल्ली की कुर्सी पर तो संघ की मर्ज़ी फिर से “पूर्ति” की थी |भला हो आडवानी जी का जो अड़ गये | सही मायने में यह उपकरण वह सारी मर्यादाएं लाँघ चुका है, जो इसके निर्माण के समय तय हुई थीं |पुंगी सड़ चुकी है, उसमे से भ्रष्टाचार की कीड़े निकल कर गिर रहे हैं | फिर भी संघ उसे मुंह से निकालने को तैयार नहीं है | सवाल यह है कि “ऐसी क्या मजबूरी है, जो भाजपा जरूरी है|”

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