पितृपक्ष: मृत कर्मचारी को न्याय के लिए रीवा कलेक्टर को HRC का नोटिस, सर्वेश की 1 साल पुरानी शिकायत पर कार्रवाई

Updesh Awasthee
भोपाल, 2 अक्टूबर 2026:
आप इत्तेफाक मानो या दिव्य शक्ति का न्याय, लेकिन रिकॉर्ड कहते हैं कि 1 साल पहले एक्सीडेंट में मृत कर्मचारियों को न्याय के लिए की गई शिकायत पर पितृपक्ष में कार्रवाई हुई है। मानवाधिकार आयोग ने रीवा कलेक्टर को नोटिस जारी करके, चार सप्ताह के भीतर इस मामले में की गई कार्रवाई का विवरण प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। 

नगर परिषद सिरमौर के कर्मचारी गौरव पांडे की अकाल मृत्यु का मामला

भारत के संविधान के अनुच्छेद 21, प्रत्येक भारतीय नागरिक को गरिमा पूर्ण जीवन के साथ गरिमा पूर्ण मृत्यु का अधिकार देता है। पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार भी गरिमा पूर्ण मृत्यु की प्रक्रिया का हिस्सा हैं। यही कारण है कि शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने हेतु, सरकार द्वारा शव वाहन का प्रबंध किया जाता है। मध्य प्रदेश के रीवा में दिनांक 28 सितंबर 2025 को सिरमौर अनुभाग/थाना/नगर क्षेत्र में हुए एक रोड एक्सीडेंट में सिरमौर निवासी और नगर परिषद सिरमौर के कर्मचारी गौरव पांडे की मृत्यु हो गई थी। उनकी डेड बॉडी को किसी एम्बुलेंस अथवा शव वाहन इत्यादि में नहीं बल्कि कचरा गाड़ी में डालकर ले जाया गया। यहां ध्यान देना होगा कि स्वर्गीय श्री गौरव पांडे, नगर परिषद सिरमौर के कर्मचारी थे। इसके बावजूद इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। मतलब सिस्टम इतना कठोर हो गया है कि वह, सहयोग करने वाले कर्मचारियों के प्रति भी सद्भाव नहीं रखता। 

सर्वेश सोनी की शिकायत पर रीवा कलेक्टर को मानवाधिकार आयोग का नोटिस 

सिरमौर निवासी सर्वेश कुमार सोनी ने इस पूरी घटना की तस्वीरें, समाचार पत्र में प्रकाशित कतरनें और सोशल मीडिया ट्वीट्स/स्क्रीनशॉट्स एकत्र किए और मामला मानवाधिकार आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया। प्रकरण क्रमांक 510/12/36/2026 आयोग के समक्ष पेश हुआ। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली की खंडपीठ, जिसकी अध्यक्षता माननीय सदस्य श्री प्रियंक कानूनगो ने की, ने मामले को प्रथम दृष्टया मृतक के मानवाधिकारों एवं मानवीय गरिमा का गंभीर उल्लंघन माना। मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत संज्ञान लेते हुए आयोग के सहायक रजिस्ट्रार (विधि) बृजवीर सिंह द्वारा जिलाधिकारी (कलेक्टर), रीवा (मध्य प्रदेश) को नोटिस जारी किया गया। रीवा कलेक्टर को निर्देश दिया गया है कि वे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं और पत्र प्राप्ति के 4 सप्ताह के भीतर कृत कार्रवाई प्रतिवेदन अर्थात एटीआर रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें।

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