भोपाल, 29 सितंबर 2026: मध्य प्रदेश की ज्यादातर जिलों में कलेक्टर, जनसुनवाई के नाम पर कुछ नहीं करते लेकिन एक जिला ऐसा है जहां पर जनसुनवाई में प्राप्त भ्रष्टाचार की शिकायत के आधार पर तत्काल कार्रवाई करते हुए कलेक्टर ने पार्षद के पद पर निर्वाचित हुए नेता को, पार्षद के पद से बर्खास्त कर दिया। आज 29 सितंबर 2026 को भ्रष्टाचार के खिलाफ यह मध्य प्रदेश का सबसे ऐतिहासिक फैसला है।
भ्रष्ट पार्षद लोकेन्द्र सिंह सिसोदिया पद से पृथक किया गया
रतलाम के कलेक्टर श्री अजय कटेसरिया द्वारा जनसुनवाई में प्राप्त शिकायत के माध्यम से नगर परिषद धामनोद के उपाध्यक्ष लोकेन्द्र सिंह सिसोदिया द्वारा पद के दुरुपयोग संबंधी शिकायत पर सुनवाई की गई। कार्रवाई माननीय उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर के आदेश के अनुपालन में की गई। प्रकरण में सुनवाई के दौरान सामने आए तथ्यों में लोकेन्द्र सिंह सिसोदिया पिता चतरसिंह द्वारा अपने परिवार के नाम से संचालित सिसोदिया टेंट हाउस एवं लाईट डेकोरेशन बस स्टेशन धामनोद फर्म के बिलों की राशि का भुगतान प्राप्त करने तथा नगर परिषद के टेंडर में संलिप्तता संबंधी शिकायत में दोषसिद्ध पाए जाने पर कलेक्टर द्वारा मध्यप्रदेश नगरपालिक अधिनियम 1961 की धारा 41 (1) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लोकेन्द्र सिंह सिसोदिया पिता चतरसिंह को नगर परिषद धामनोद के निर्वाचित पार्षद पद से पृथक किए जाने के आदेश 28 सितंबर 2026 को जारी किए गए हैं।
क्या कलेक्टर किसी चुने हुए जनप्रतिनिधि को पद से हटा सकता है?
मध्यप्रदेश नगरपालिक अधिनियम 1961 की धारा 41 (1) के अनुसार (1) कलेक्टर किसी भी समय किसी निर्वाचित पार्षद को हटा सकेगा:
(क) यदि पार्षद के रूप में उसका बने रहना, कलेक्टर की राय में, जनता या परिषद के हित में वांछनीय नहीं है; या
[(क-1) यदि यह पाया जाता है कि वह उस आरक्षित प्रवर्ग का नहीं है जिसके लिए स्थान आरक्षित था; या]
(ख) यदि परिषद ने, कुल पार्षदों की संख्या के कम से कम दो-तिहाई द्वारा समर्थित संकल्प द्वारा, यह सिफारिश की है कि वह पार्षद अपने कर्तव्यों के निर्वहन में कदाचार या लज्जाजनक आचरण के कारण पार्षद के रूप में बने रहने के योग्य नहीं है।
कलेक्टर हटाने के साथ अगले कार्यकाल के लिए भी अयोग्य घोषित कर सकता है।
इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार के पास अपील की जा सकती है।

