Amazon से खरीदी करने से पहले यह न्यूज़ जरूर पढ़िए, ग्राहक को 3 साल तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी

Updesh Awasthee
भोपाल, 24 अक्टूबर 2026:
भारत में ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों की अपनी दुकान Amazon अपने ग्राहकों के साथ कैसा व्यवहार करता है, इसका प्रमाण Rounak Burrows v. Amazon Seller Services Private Limited and Another [CC/496/2023] मामले में मिला है। ग्राहक ने 2023 में लैपटॉप आर्डर किया था। उसकी जगह कचरा भेज दिया। शिकायत की सुनवाई नहीं की और जब मामला कंज्यूमर कोर्ट में पहुंचा तो कहने लगे हमारे पास ओटीपी है, ग्राहक को लैपटॉप डिलीवरी हो चुका है। ग्राहक को न्याय के लिए 3 साल लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। 

मामले की पृष्ठभूमि और मुख्य तथ्य

ग्राहक का नाम रौनक बरोज़ (Rounak Burrows) निवासी भोला है। रौनक ने 29 मई 2023 को अमेज़न ऐप के माध्यम से ₹1,29,990 की कीमत वाला 'Samsung Galaxy Book 2 Pro 360' लैपटॉप ऑर्डर किया था। 2 जून 2023 को OTP वेरिफिकेशन के बाद पार्सल डिलीवर हुआ। लेकिन सीलबंद डिब्बा खोलने पर उसमें से लैपटॉप के बजाय इलेक्ट्रॉनिक कचरा (e-waste/trash) निकला। 

Amazon ने OTP को सही माल की डिलीवरी का सबूत बताया

ग्राहक द्वारा शिकायत की गई, जब शिकायत पर कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो 12 जून 2023 को अमेज़न कानूनी नोटिस भेजा लेकिन कंपनी ने न तो लैपटॉप दिया और न ही पैसे वापस किए। इसके बाद मामला District Consumer Disputes Redressal Commission-I, Bhopal के समक्ष प्रस्तुत हुआ। अमेज़न ने आयोग के समक्ष तर्क दिया कि वह केवल एक 'ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस/मध्यस्थ' है और उसने सामान खुद नहीं बेचा, बल्कि इसे 'अप्पारियो रिटेल प्राइवेट लिमिटेड' (Appario Retail Pvt. Ltd.) नामक थर्ड-पार्टी सेलर द्वारा बेचा गया था। अमेज़न ने यह दावा भी किया कि OTP सत्यापन के बाद ही डिलीवरी हुई थी। इस प्रकार कंपनी ने दावा किया कि हमारे पास ओटीपी है और यह इस बात का प्रमाण है कि हमने लैपटॉप की डिलीवरी कर दी है।

संबद्ध नियम, कानून एवं कानूनी धाराएं

इस फैसले में उपभोक्ता आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की विभिन्न महत्वपूर्ण धाराओं की व्याख्या की है:
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 धारा 35: उपभोक्ता आयोग के समक्ष सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार के खिलाफ परिवाद प्रस्तुत करने का प्रावधान।
धारा 2(7) - 'उपभोक्ता' की परिभाषा: आयोग ने स्पष्ट किया कि चूंकि परिवादी ने अमेज़न प्लेटफॉर्म के माध्यम से व्यक्तिगत उपयोग हेतु प्रतिफल देकर खरीदारी की, इसलिए वह प्रत्यक्ष रूप से अमेज़न का 'उपभोक्ता' है। 
धारा 34(2) - क्षेत्रीय क्षेत्राधिकार: आयोग ने माना कि परिवादी भोपाल का निवासी है और वाद-कारण भोपाल में उत्पन्न हुआ, इसलिए भोपाल उपभोक्ता आयोग को इस मामले की सुनवाई का पूर्ण अधिकार है।
सेवा में कमी एवं अनुचित व्यापार व्यवहार: गलत सामान डिलीवर करना और शिकायत के बाद भी राशि वापस न करना सेवा में गंभीर कमी तथा अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है।

Amazon, ग्राहक के प्रति जिम्मेदारी से मुक्त नहीं है

अमेज़न ने आईटी एक्ट की धारा 79 का हवाला देते हुए खुद को केवल एक 'इंटरमीडिएटरी' (मध्यस्थ) बताया और कानूनी दायित्व से बचने की कोशिश की। आयोग ने अमेज़न के इस बचाव को खारिज करते हुए कहा कि महज खुद को 'मार्केटप्लेस' कह देने भर से ई-कॉमर्स कंपनियां अपनी जवाबदेही से मुक्त नहीं हो सकतीं, खासकर तब जब भुगतान उनके प्लेटफॉर्म के जरिए लिया गया हो और वे विक्रेता की सही जानकारी देने या शिकायत निवारण करने में विफल रही हों। 

अदालत द्वारा स्थापित लैंडमार्क सिद्धांत: 

आयोग के अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ल और सदस्य डॉ. संजीव सिंह की पीठ ने फैसले में महत्वपूर्ण सिद्धांत रेखांकित किए हैं:
अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल OTP आधारित सत्यापन या सीलबंद पैकेज का दावा यह साबित नहीं करता कि पैकेज के अंदर सही उत्पाद ही रखा गया था।
परिवादी द्वारा अप्पारियो रिटेल को भेजा गया लीगल नोटिस "Unknown" टिप्पणी के साथ वापस आ गया। आयोग ने पाया कि अमेज़न विक्रेता की स्पष्ट और सत्यापित जानकारी प्रदान करने में विफल रहा, इसलिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को सीधे जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
द्वितीय विपक्षी 'सैमसंग इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स प्रा. लि.' के खिलाफ शिकायत खारिज कर दी गई, क्योंकि विवाद उत्पाद निर्माण दोष का नहीं बल्कि ऑनलाइन डिलीवरी और लेन-देन में धोखाधड़ी का था। 

न्यायिक दृष्टांत : 

इससे पहले ईस्ट दिल्ली उपभोक्ता आयोग ने भी अमेज़न और अप्पारियो रिटेल को गलत लैपटॉप डिलीवर करने व रिफंड न देने पर ₹61,990 वापस करने का आदेश दिया था। भोपाल आयोग का यह फैसला उसी कानूनी सोच को आगे बढ़ाता है। 

अदालत का अंतिम आदेश व निर्देश

उपभोक्ता आयोग ने अमेज़न सेलर सर्विसेज प्रा. लि. को निम्नलिखित आदेश जारी किए हैं:
  • परिवादी को ₹1,29,990 की पूरी राशि 29 मई 2023 से भुगतान की तिथि तक 9% वार्षिक ब्याज सहित लौटाई जाए। 
  • शारीरिक एवं मानसिक कष्ट, सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए ₹25,000 का मुआवजा दिया जाए।
  • परिवाद व्यय के रूप में ₹5,000 का भुगतान किया जाए।
आदेश की प्रति प्राप्त होने के 45 दिनों के भीतर संपूर्ण राशि का भुगतान अनिवार्य है। तय समय में भुगतान न करने पर ₹5,000 अतिरिक्त निष्पादन व्यय और ब्याज देना होगा। 

(मामला शीर्षक: Rounak Burrows v. Amazon Seller Services Private Limited and Another [CC/496/2023], आदेश तिथि: 15 अक्टूबर 2026)

Case: Rounak Burrows v. Amazon Seller Services Private Limited

इस मामले की पीडीएफ फाइल भोपाल समाचार के टेलीग्राम चैनल पर अपलोड कर दी गई है। तत्काल डाउनलोड कर सकते हैं।

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