मध्य प्रदेश के ज्यादातर इलाकों में करवा चौथ पर चांद नहीं दिखेगा, जानिए क्या कर सकते हैं

Updesh Awasthee
भोपाल, 26 अक्टूबर 2026:
मौसम विभाग द्वारा अलर्ट जारी किया जा चुका है। करवा चौथ के दिन मध्य प्रदेश के आसमान पर बादल छाए रहेंगे। कई इलाकों में भारी और कई इलाकों में मध्यम बारिश होगी, जबकि ज्यादातर मध्य प्रदेश में आंधी और हल्की बारिश की संभावना है। ऐसी स्थिति में आसमान में चांद दिखाई नहीं देगा। इसलिए हम बता रहे हैं कि शास्त्रों में, मौसम की ऐसी स्थिति में जब चांद दिखाई नहीं देगा, तो क्या उपाय एवं मार्गदर्शन है:-

भगवान शिव के मस्तक के चंद्रदेव का पूजन 

पौराणिक ग्रंथों एवं स्कंद पुराण के अनुसार, भगवान शिव ने चंद्रदेव को अपने मस्तक पर 'चंद्रशेखर' रूप में धारण किया हुआ है। शास्त्रों में मान्यता है कि यदि प्रत्यक्ष चंद्र दर्शन न हो सके, तो शिव जी के मस्तक पर विराजमान चंद्र रूप ही साक्षी माना जाता है। घर के मंदिर में भगवान शिव की प्रतिमा या चित्र में उनके मस्तक पर स्थित चंद्रमा का ध्यान करें, अथवा पास के शिव मंदिर जाकर शिवलिंग/शिव प्रतिमा का पूजन करें और अर्घ्य समर्पित करके व्रत खोलें।   

पंचांग के अनुसार 'चंद्रोदय समय' और दिशा का ध्यान 

नारद पुराण एवं धर्मशास्त्रों में व्रत नियमों के अंतर्गत बताया गया है कि व्रत का मुख्य आधार तिथि और मुहूर्त (चंद्रोदय काल) का संकल्प होता है। यदि बादल के कारण दृश्यता शून्य हो, तब भी चंद्रदेव की उपस्थिति (अस्तित्व) उस दिशा में बनी रहती है। अपने शहर के स्थानीय पंचांग में दिए गए चंद्रोदय के सही समय (Moonrise Time) पर पूर्व/उत्तर-पूर्व दिशा (चांद के निकलने की दिशा) की ओर मुख करें। चंद्रदेव का ध्यान करते हुए उसी दिशा में अर्घ्य दें और 'ॐ सोमाय नमः' या 'ॐ चंद्रमसे नमः' मंत्र का जाप करें।   

अक्षत या चांदी के सिक्के का सांकेतिक चंद्रमा 

ज्योतिष शास्त्र एवं कर्मकांड की मान्यताओं के अनुसार, चांदी (Silver) धातु और अक्षत (बिना टूटे चावल) सीधे चंद्र ग्रह के कारक व प्रतीक माने जाते हैं। प्रत्यक्ष वस्तु अनुपस्थित होने पर सांकेतिक (मानस) पूजन शास्त्रों में पूर्णतः मान्य है। एक साफ चौकी या लाल/पीले कपड़े पर अक्षत (चावल) से चंद्रमा की आकृति बनाएं। अथवा एक साफ थाली में चांदी का सिक्का या चांदी का पात्र रखें। इसे चंद्रदेव का प्रतीक मानकर धूप, दीप, रोली से पूजन करें, अर्घ्य अर्पित करें और फिर छन्नी से सिक्के/सांकेतिक चांद को देखकर पति का चेहरा देखें।   

पानी/दूध में चंद्रदेव का प्रतिबिंब या मानस पूजन 

वृहत् संहिता एवं पारंपरिक कर्मकांड पद्धतियों के अनुसार, दृश्यता न होने पर जलीय माध्यम या 'मानस पूजा' (भाव पूजा) के माध्यम से देवताओं का आह्वान किया जा सकता है। एक कांसे या चांदी की थाली/पात्र में पानी या दूध लें। आसमान की दिशा में देखते हुए चंद्रदेव का ध्यान करें और मन ही मन उनका प्रतिबिंब उस पात्र में मानकर पूजन व अर्घ्य अर्पित करें। 

दूसरे शहर से लाइव दर्शन 

यदि आपके क्षेत्र में घने बादल हों, तो जिस शहर में चंद्रमा दिखाई दे रहा हो, वहां के सगे-संबंधियों से वीडियो कॉल के जरिए या टीवी/लाइव प्रसारण के माध्यम से चंद्र दर्शन करके अर्घ्य अर्पित करने का विकल्प भी विद्वानों द्वारा स्वीकार किया गया है। 

निष्कर्ष: श्रीमद्भगवद्गीता (अध्याय 17) एवं पद्म पुराण के अनुसार, किसी भी व्रत का फल बाह्य परिस्थितियों से अधिक आपकी आंतरिक श्रद्धा, भाव और संकल्प पर निर्भर करता है। यदि मौसम के कारण चांद नहीं दिखता, तो मन में संशय या भय न रखें; पंचांग समय के अनुसार चंद्रदेव का स्मरण कर अर्घ्य दें और पति के हाथों जल ग्रहण करके व्रत पूरा करें। प्रस्तुति: श्यामला ज्योतिष पीठ, भोपाल।

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