BHOPAL NEWS: रिटायर्ड आईएएस अग्रवाल मर्डर केस में SIT गठित

Updesh Awasthee
भोपाल समाचार, 21 अक्टूबर 2026:
पुलिस कमिश्नर ऑफ़ भोपाल द्वारा रिटायर्ड आईएएस राकेश अग्रवाल मर्डर केस में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम गठित कर दी गई है। अब यह टीम मामले की इन्वेस्टीगेशन करेगी और हत्यारे को गिरफ्तार करेगी। IAS एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात कर SIT जांच, कॉन्ट्रैक्ट किलिंग और बड़े आर्थिक लेन-देन सहित सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की मांग की है। सीएम ने दोषियों को न छोड़ने का आश्वासन दिया।⁠

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद पुलिस कमिश्नर के आदेश

भोपाल के पुलिस कमिश्नर ने अपने आदेश में लिखा है कि, मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए, फरार हत्यारे की गिरफ्तारी और मामले की इन्वेस्टीगेशन के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का गठन किया जा रहा है। श्री उमेश तिवारी, समनि, पुलिस मुख्यालय, भोपाल SIT को हेड करेंगे। इसके अलावा टीम में निम्न सदस्य होंगे:-
  • श्री चन्द्रभान सिंह चढार, सपुआ, अपराध शाखा, भोपाल
  • श्री पारस सोनी, उप निरीक्षक, अपराध शाखा, भोपाल
  • श्री ओ.पी. रघुवंशी, उप निरीक्षक, थाना रातीबड़, भोपाल
  • आरक्षक निलेश वर्मा, टेक्निकल सेल, अपराध शाखा, भोपाल 

रिटायर्ड आईएएस राकेश अग्रवाल मर्डर केस की कहानी 

भोपाल के रिटायर्ड IAS राकेश अग्रवाल मर्डर केस 30 सितंबर 2026 की सुबह सामने आया था। 1982 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के अधिकारी राकेश अग्रवाल (उम्र करीब 70-72 वर्ष) की उनके सूरज नगर (रातीबड़ थाना क्षेत्र), भोपाल स्थित घर ‘सिद्धाशिला’ में गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। 

राकेश अग्रवाल स्लिप डिस्क/दर्द की समस्या से उबर रहे थे। उनकी पत्नी निशी अलग कमरे में सो रही थीं। रात करीब 12:30 से 2 बजे के बीच सोते समय धारदार हथियार (सर्जिकल ब्लेड जैसा) से उनका गला रेता गया। शरीर पर संघर्ष के निशान नहीं थे। पत्नी का दरवाजा बाहर से कुंडी लगाकर बंद कर दिया गया। सुबह करीब 4-5:30 बजे वे उठीं, दरवाजा नहीं खुल सका। उन्होंने दूसरे केयरटेकर (अमर/राजन) को बुलाया, जिसके बाद शव मिला। हत्या के बाद आरोपी ने रसोई में LPG सिलेंडर का पाइप निकालकर गैस छोड़ दी और पास में इलेक्ट्रिक प्रेस ऑन छोड़ दिया, ताकि आग/विस्फोट से सबूत मिटें। 

मुख्य आरोपी और जांच
मुख्य आरोपी वरुण कुमार (करीब 27-33 वर्ष, नाभा/पटियाला, पंजाब का रहने वाला) है। उसे घटना से सिर्फ 3-4 दिन पहले (26-27 सितंबर) वर्मा होम हेल्थ केयर एजेंसी के जरिए 24×7 केयरटेकर-कम-मेल नर्स के रूप में रखा गया था। उसकी पुलिस वेरिफिकेशन नहीं हुई थी।⁠ 

हत्या के बाद वह मोबाइल, नकदी, सोने के जेवर (चेन, अंगूठी आदि) और अन्य सामान लेकर फरार हो गया। CCTV में उसे बैग लेकर भागते देखा गया। वह करीब 2 किमी पैदल चला, ऑटो लिया और भोपाल जंक्शन से ट्रेन पकड़कर दिल्ली/आगरा की ओर भागा। उसका मोबाइल आगरा में मिला। कई राज्यों (MP, UP, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली) में टीमें लगीं, 50,000 रुपये का इनाम घोषित हुआ, लेकिन अक्टूबर 2026 के मध्य तक वह फरार था और डिजिटल फुटप्रिंट मिटाकर बच रहा था। एजेंसी संचालक अखिलेश वर्मा पर बिना वेरिफिकेशन के नियुक्ति का केस दर्ज हुआ।⁠

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