मध्य प्रदेश में व्यावसायिक प्रशिक्षकों के वेतन पर संकट: कहीं 4 तो कहीं 6 माह से भुगतान लंबित

Updesh Awasthee
सागर/भोपाल, 19 अक्टूबर 2026
: मध्य प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी एवं व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करने वाले Vocational Trainers (व्यावसायिक प्रशिक्षकों) के सामने वेतन भुगतान का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। Medhavi Foundation के VTP के अंतर्गत कार्यरत लगभग 200 प्रशिक्षकों का चार माह का वेतन लंबित होने की शिकायत है। वहीं, PM SHRI स्कूलों में कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों का वेतन भी पिछले छह माह से लंबित होने की बात सामने आई है। लगातार वेतन नहीं मिलने से प्रभावित कर्मचारियों को आर्थिक एवं पारिवारिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

प्रशिक्षकों का कहना है कि वे नियमित रूप से विद्यालयों में विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण एवं रोजगारपरक कौशल सिखाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, लेकिन समय पर वेतन नहीं मिलने से परिवार का खर्च चलाना, बच्चों की फीस भरना और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करना मुश्किल हो रहा है। कर्मचारियों का सवाल है कि जब उनसे नियमित रूप से कार्य लिया जा रहा है, तो उनके वेतन का भुगतान समय पर क्यों नहीं किया जा रहा है?

बार-बार आश्वासन, लेकिन भुगतान का इंतजार जारी

Medhavi Foundation के अंतर्गत कार्यरत प्रभावित प्रशिक्षकों का आरोप है कि कंपनी कोऑर्डिनेटर श्री मनोज बामनकर से वेतन भुगतान के संबंध में कई बार संपर्क किया गया। उनके अनुसार, बार-बार आश्वासन और संभावित तारीखें मिलने के बावजूद भुगतान नहीं हो पाया है। प्रशिक्षकों ने कोऑर्डिनेटर की भूमिका तथा वेतन संबंधी शिकायतों पर की गई कार्रवाई की जांच कराने की मांग की है।

PM SHRI स्कूलों के प्रशिक्षकों का छह माह का वेतन लंबित होने की शिकायत

PM SHRI स्कूलों में कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों का छह माह से वेतन लंबित होने की शिकायत ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। यदि कर्मचारियों को लगातार कई महीनों तक वेतन नहीं मिलता है, तो इसका सीधा असर उनकी आर्थिक स्थिति, कार्यक्षमता और मनोबल पर पड़ सकता है।

प्रशिक्षकों ने संबंधित विभाग एवं VTP प्रबंधन से मांग की है कि PM SHRI स्कूलों में कार्यरत प्रशिक्षकों के लंबित वेतन की स्थिति स्पष्ट की जाए और भुगतान में देरी के कारणों की जांच कर जल्द से जल्द बकाया राशि जारी की जाए।

लोक शिक्षण संचालनालय की भूमिका पर भी उठे सवाल

इस पूरे मामले में लोक शिक्षण संचालनालय, मध्य प्रदेश की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। प्रशिक्षकों के बीच चल रही चर्चाओं के अनुसार, Medhavi Foundation से संबंधित VTP को पहले लगभग 200 स्कूलों के मुकाबले बढ़ाकर करीब 350 स्कूलों का कार्य सौंपे जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, इस आवंटन की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।

प्रशिक्षकों का सवाल है कि यदि संबंधित VTP में समय पर वेतन भुगतान नहीं होने की शिकायतें पहले से मौजूद थीं, तो अतिरिक्त विद्यालयों का कार्य सौंपने से पहले उसकी वित्तीय क्षमता, प्रशासनिक व्यवस्था और कर्मचारियों के वेतन भुगतान की स्थिति की समीक्षा की गई थी या नहीं?

प्रशिक्षकों ने लोक शिक्षण संचालनालय से मांग की है कि विद्यालयों के आवंटन, संबंधित VTP की कार्यप्रणाली और वेतन भुगतान की निगरानी व्यवस्था के संबंध में स्थिति स्पष्ट की जाए। साथ ही, यह भी बताया जाए कि कर्मचारियों की शिकायतों के समाधान के लिए विभागीय स्तर पर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

व्यावसायिक शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है प्रतिकूल प्रभाव

व्यावसायिक शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को रोजगार के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के योग्य बनाना है। लेकिन जब प्रशिक्षण देने वाले कर्मचारी ही महीनों तक वेतन के लिए परेशान हों, तो उनकी कार्य परिस्थितियों और मनोबल पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका रहती है।

प्रशिक्षकों का कहना है कि वे विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। ऐसे में उनके वेतन का समय पर भुगतान सुनिश्चित करना कंपनी प्रबंधन और संबंधित विभाग की प्राथमिकता होनी चाहिए।

लंबित वेतन भुगतान और जवाबदेही तय करने की मांग

प्रभावित प्रशिक्षकों ने Medhavi Foundation के प्रबंध संचालक (MD), लोक शिक्षण संचालनालय एवं संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि:
- Medhavi Foundation VTP के अंतर्गत लंबित चार माह के वेतन का भुगतान शीघ्र किया जाए।
- PM SHRI स्कूलों में कार्यरत प्रशिक्षकों के छह माह से लंबित वेतन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
- वेतन में देरी के कारणों की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।
- संबंधित VTP को आवंटित विद्यालयों की संख्या एवं आवंटन प्रक्रिया की आधिकारिक जानकारी दी जाए।
- वेतन भुगतान की निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाए और कर्मचारियों को भुगतान की निश्चित तारीख लिखित रूप में बताई जाए।

प्रशिक्षकों का कहना है कि वे किसी अतिरिक्त लाभ की मांग नहीं कर रहे, बल्कि अपने परिश्रम के बदले मिलने वाले वेतन की मांग कर रहे हैं। यदि उनकी समस्या का शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो वे संबंधित श्रम विभाग एवं सक्षम अधिकारियों के समक्ष औपचारिक शिकायत प्रस्तुत कर नियमानुसार आगे की कार्रवाई करेंगे।

अब सवाल यह है कि महीनों से वेतन भुगतान लंबित होने की शिकायतों पर संबंधित कंपनी और विभाग कब तक ठोस कार्रवाई करेंगे? कर्मचारियों को आश्वासन के बजाय अपने मेहनताने का भुगतान कब मिलेगा? प्रभावित प्रशिक्षकों को अब इन सवालों के स्पष्ट जवाब और समयबद्ध समाधान का इंतजार है।
रिपोर्ट: जितेंद्र राठौर, प्रदेश मीडिया प्रभारी, नवीन व्यावसायिक शिक्षा प्रशिक्षक महासंघ मध्य प्रदेश।

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!