भोपाल, 30 सितंबर 2026: क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि कचरे के लिए कोई किसी की हत्या कर देगा। भोपाल में ऐसा हुआ। रेलवे के सफाई कर्मचारियों के बीच में राजधानी एक्सप्रेस के कचरे के लिए खूनी संघर्ष हुआ। इसमें एक युवक की हत्या कर दी गई। भोपाल के पंचम अपर सत्र न्यायाधीश (श्रीमती नीलू संजीव श्रंगीऋषि) के न्यायालय ने तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में, मतलब पुलिस इन्वेस्टिगेशन के दौरान की गई गलतियों के कारण, तीन अन्य सह-आरोपियों को दोषमुक्त (बरी) घोषित कर दिया गया है। पुलिस इन्वेस्टिगेशन की कमियों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने वाले अधिवक्ता का नाम अर्पित सक्सेना है।
कचरा उठाने के विवाद में लाठियों से हमला
मामला 15 फरवरी 2019 की रात लगभग 9:30 बजे भोपाल रेलवे स्टेशन के वीआईपीसी (VIP) गेट के सामने का है। ट्रेन (राजधानी एक्सप्रेस) से उतरने वाले कचरे को उठाने को लेकर रेलवे के सफाई कर्मियों के बीच विवाद हुआ था। विवाद के दौरान आरोपी रामबाबू बाल्मिक, लक्ष्मीनारायण बाल्मिक और श्यामबाबू बाल्मिक ने अपने साथियों के साथ मिलकर राकेश बोहत व उनके साथियों पर लाठियों से हमला कर दिया। इस हमले में सिर पर गंभीर चोट लगने के कारण राकेश बोहत बेहोश होकर गिर पड़े, जिन्हें उपचार हेतु हमीदिया अस्पताल, भोपाल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान 19 फरवरी 2019 को राकेश बोहत की मृत्यु हो गई थी। हमले में बीच-बचाव करने आए अन्य साथी प्रदीप करोसिया और राकेश करोसिया भी घायल हुए थे। मामले में जीआरपी थाना भोपाल द्वारा प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना की गई थी।
कोर्ट का फैसला और सजा का विवरण
न्यायालय ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों एवं गवाहों के बयानों के आधार पर तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए निम्नलिखित सजा सुनाई:
रामबाबू बाल्मिक, लक्ष्मीनारायण बाल्मिक एवं श्यामबाबू बाल्मिक:
- भा.दं.सं. की धारा 302 / 302-34 (हत्या): आजीवन कारावास तथा ₹5,000-5,000 का अर्थदंड (अदा न करने पर 6 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास)।
- भा.दं.सं. की धारा 323/34 (2 काउंट - मारपीट/उपहति): 6-6 माह का सश्रम कारावास तथा ₹1,000-1,000 का अर्थदंड।
दोषियों की सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अदालत ने निर्देश दिया है कि आरोपियों द्वारा जमा कराई जाने वाली अर्थदंड की राशि में से मृतक राकेश बोहत के परिजनों को तथा घायल प्रदीप करोसिया व राकेश करोसिया को प्रतिकर (मुआवजे) के रूप में राशि प्रदान की जाएगी।
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न्यायालय ने प्रकरण के तीन अन्य आरोपियों - नरेन्द्र बाल्मिक, सोनू उर्फ प्रताप सिंह और मोनू उर्फ संजय सिंह को घटना में संलिप्तता के पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर सभी आरोपों से दोषमुक्त (बरी) कर दिया। आरोपी नरेंद्र के अधिवक्ता श्री अर्पित सक्सेना ने कहा, "यह विजय सच के ऊपर विश्वास का प्रमाण है। अब हम जी.आर.पी.एफ़ और शासन के विरुद्ध मानहानि और क्षतिपूर्ति का दावा दायर करेंगे।"

