भोपाल, 9 सितंबर 2026: बैरसिया विधानसभा क्षेत्र के सूरजपुरा, आमल्या, उमरिया, बाबूखेड़ी सहित आसपास के गांवों में सोयाबीन की खड़ी फसल पर पीला मोजेक बीमारी के प्रकोप से किसान गंभीर संकट में हैं। किसानों की महीनों की मेहनत खेतों में बर्बाद हो रही है, लेकिन प्रशासन और कृषि विभाग की ओर से अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं दे रही है।
इसी गंभीर समस्या को लेकर किसानों के साथ एसडीएम कार्यालय बैरसिया पहुंचकर ज्ञापन सौंपा गया और प्रशासन के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री, जिला कलेक्टर, भोपाल सांसद आलोक शर्मा, क्षेत्रीय विधायक विष्णु खत्री सहित संबंधित जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों तक किसानों की समस्या पहुंचाई गई।
किसानों की शिकायत बेहद गंभीर है। खेतों में सोयाबीन की फसल लगातार पीली पड़ रही है और कई किसानों की फसल पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है। इसके बावजूद अभी तक व्यापक स्तर पर फसल नुकसान का सर्वे शुरू नहीं किया गया है। किसान पटवारी, तहसीलदार और कृषि विभाग के कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
क्षेत्रीय विधायक विष्णु खत्री को भी किसानों की इस गंभीर समस्या का तत्काल संज्ञान लेना चाहिए। जब उनके विधानसभा क्षेत्र के किसान अपनी खड़ी फसल बर्बाद होने की शिकायत कर रहे हैं, तब किसानों की आवाज को प्रशासन और सरकार तक मजबूती से पहुंचाना जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है।
यह केवल बैरसिया के कुछ गांवों की समस्या नहीं है। बैरसिया राजधानी भोपाल से लगा हुआ ग्रामीण क्षेत्र है। यदि राजधानी से सटे क्षेत्र के किसानों की यह स्थिति है, तो प्रदेश के दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। सरकार को इसे एक गंभीर कृषि संकट के रूप में लेना चाहिए।
देश के कृषि मंत्री एवं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से भी मांग है कि वे मध्यप्रदेश में सोयाबीन की फसल को हो रहे नुकसान का तत्काल संज्ञान लें। प्रदेश के कृषि मंत्री और मुख्यमंत्री को भी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देकर प्रभावित गांवों में तत्काल सर्वे एवं राहत की कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।
सरकार एक ओर अपने विज्ञापनों में किसान कल्याण और किसानों की खुशहाली के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन दूसरी ओर किसान की आंखों के सामने उसकी खड़ी फसल बर्बाद हो रही है और उसे अपनी समस्या बताने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
जब खेत में किसान परेशान है, तो विज्ञापनों में किसान कल्याण आखिर किसका हो रहा है?
किसानों की प्रमुख मांगें
1. सूरजपुरा, आमल्या, उमरिया, बाबूखेड़ी सहित बैरसिया क्षेत्र के सभी प्रभावित गांवों में तत्काल गांव-गांव फसल सर्वे कराया जाए।
2. पीला मोजेक बीमारी से सोयाबीन की फसल को हुए नुकसान का वास्तविक, निष्पक्ष और पारदर्शी आकलन किया जाए।
3. जिन किसानों की फसल प्रभावित अथवा पूरी तरह बर्बाद हुई है, उन्हें नियमानुसार उचित मुआवजा एवं राहत राशि उपलब्ध कराई जाए।
4. जिन किसानों की KCC नहीं हुई है, उन्हें केवल इस आधार पर राहत से वंचित न किया जाए। ऐसे किसानों की भी अलग से पहचान कर फसल नुकसान का सर्वे कराया जाए और पात्रता के अनुसार मुआवजा दिया जाए।
5. पटवारी, तहसीलदार और कृषि विभाग के अधिकारियों को प्रभावित गांवों में जाकर मौके पर फसल की स्थिति देखने तथा तत्काल रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए जाएं।
6. कृषि विभाग की विशेषज्ञ टीम गांव-गांव भेजी जाए, ताकि बीमारी के कारणों का वैज्ञानिक परीक्षण हो और किसानों को फसल बचाने के लिए आवश्यक सलाह एवं सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
7. सर्वे की प्रक्रिया को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखा जाए, बल्कि वास्तविक खेतों में पहुंचकर नुकसान का आकलन किया जाए।
किसान केवल मुआवजा नहीं मांग रहा, वह अपनी मेहनत और अपनी आजीविका बचाने की मांग कर रहा है। सोयाबीन की फसल का नुकसान सीधे तौर पर किसान परिवार की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करेगा। इसका असर बच्चों की पढ़ाई, घरेलू खर्च, कृषि ऋण की अदायगी और अगले कृषि सीजन की तैयारी तक पड़ेगा।
सरकार को किसान के संकट को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय मानवीय और आर्थिक संकट के रूप में देखना चाहिए। समय पर सर्वे और राहत नहीं मिली तो किसानों की परेशानी और बढ़ेगी।
आज किसानों ने एसडीएम बैरसिया के माध्यम से अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाई है। अब सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह इस ज्ञापन को केवल एक कागज बनाकर न रखे, बल्कि तत्काल कार्रवाई करे।
किसानों की फसल का सर्वे, नुकसान का सही आकलन और उचित मुआवजा हमारी प्रमुख मांग है।
किसानों को उनका हक और उचित मुआवजा दिलाने के लिए कांग्रेस किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है। यदि सरकार ने समय रहते किसानों की समस्या का समाधान नहीं किया तो किसानों के हक में संघर्ष को और व्यापक किया जाएगा।
सर्वे कराओ।
नुकसान का आकलन कराओ।
किसानों को उचित मुआवजा दिलाओ।
रिपोर्ट: प्रवीण धौलपुरे (प्रदेश प्रवक्ता, मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी)

