सीधी, 9 सितंबर 2026: वह 2023 की घटना तो आपको याद होगी ना। एक वीडियो वायरल हुआ था, फिर तत्कालीन मुख्यमंत्री ने पीड़ित के पैर धोए थे। आरोपी के विरुद्ध NSA की कार्रवाई हुई और उसके घर पर बुलडोजर चलाया गया। एक वीडियो अब वायरल हो रहा है। इसमें वृद्ध के कंधे पर एक युवक सवार है। सवाल सिर्फ इतना है कि, वृद्ध व्यक्ति को प्रताड़ित करने वाला, जानवर की तरह उपयोग करने वाला, युवक ब्राह्मण है या ठाकुर? सवाल इसलिए पूछा जा रहा है क्योंकि कुछ लोग हर घटना को जाति के चश्मे से देखते हैं। जबकि भेदभाव और कमजोर व्यक्तियों को प्रताड़ित करना यह जाति का विषय नहीं है।
यह वीडियो उसी सीधी जिले का है
यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। उसी सीधी जिले का है, जहां से 2023 वाला वीडियो वायरल हुआ था। 2023 वाले वीडियो में आरोपी युवक ब्राह्मण था। तत्कालीन मुख्यमंत्री ने पीड़ित व्यक्ति के पैर धोकर उसका सम्मान किया। आरोपी के खिलाफ NSA के तहत कार्रवाई की गई उसके घर पर बुलडोजर चला दिया, लेकिन समाज को जातिवाद की आग में जलाने के लिए आतुर नेता शांत नहीं हुए। अब जो वीडियो वायरल हो रहा है उसमें पीड़ित व्यक्ति आरक्षित जाति का है लेकिन उसको प्रताड़ित करने वाला भी आरक्षित जाति का है। एक और गौर करने वाली बात है। जो पीड़ित है उसको आरक्षण का लाभ नहीं मिला लेकिन जो प्रताड़ित कर रहा है उसको आरक्षण का लाभ मिला है। आरक्षित जाति के एक वृद्ध व्यक्ति को प्रताड़ित किया गया है लेकिन जातिवाद की राजनीति करने वाले चुप हैं। क्योंकि प्रताड़ित करने वाला भी आरक्षित जाति से है। सवाल केवल इतना सा है कि क्या, आरक्षित जाति के व्यक्ति को के अधिकार मिल जाता है कि वह आरक्षित जाति के ही किसी दूसरे व्यक्ति को प्रताड़ित कर सके उसके साथ भेदभाव कर सके। इस प्रकार की घटनाओं में एट्रोसिटी एक्ट का प्रावधान क्यों नहीं है?
भेदभाव और प्रताड़ना जाति का विषय नहीं है
एम.एन. श्रीनिवास का प्रबल जाति (Dominant Caste) का सिद्धांत इस बात को स्पष्ट करता है। उन्होंने 1950 के दशक में यह बताया कि किसी इलाके में कौन किसको दबाता है, यह सिर्फ जन्म की जाति या धार्मिक श्रेणी से नहीं तय होता। जो जाति संख्या में ज्यादा हो, जिसके पास जमीन-जायदाद हो और राजनीतिक प्रभाव हो, वही स्थानीय स्तर पर शक्तिशाली बन जाती है और कमजोर को प्रताड़ित करती है, चाहे वह जाति अनुष्ठानिक रूप से ऊंची हो या नीची। श्रीनिवास के अनुसार उत्पीड़न का आधार स्थानीय शक्ति है, न कि सिर्फ जाति की पारंपरिक रैंकिंग।

