MP NEWS: सरकारी स्कूल ग्राउंड के लिए VIDISHA के बच्चों को हाईकोर्ट तक जाना पड़ा

Updesh Awasthee
भोपाल समाचार, 25 सितंबर 2026:
जब पक्ष और विपक्ष के लोग, अपने निजी फायदे की राजनीति करने लगते हैं, और जनता के हितों की रक्षा करना बंद कर देते हैं, तब ऐसी स्थिति बनती है। विदिशा में किसी सुदूर ग्रामीण क्षेत्र का नहीं बल्कि, एक्सीलेंस स्कूल के ग्राउंड पर अतिक्रमण कर लिया गया और बच्चों को अपना ग्राउंड वापस पाने के लिए हाई कोर्ट तक जाना पड़ा। 

अनुच्छेद 21-A: शिक्षा का अधिकार के तहत क्या कुछ आता है

यह खबर ग्वालियर हाईकोर्ट से आई है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, विदिशा के खेल मैदान से अतिक्रमण हटाने और व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाने संबंधी जनहित याचिका (WP No. 33703/2026) का निस्तारण कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश अल्पेश वाई. कोगजे एवं न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 21-A के तहत शिक्षा का अधिकार केवल कक्षाओं की उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि खेल का मैदान और आवश्यक बुनियादी ढांचा भी इसका अनिवार्य अंग है। 

विदिशा के पवन सिंह रघुवंशी ने याचिका लगाई थी

यह जनहित याचिका पवन सिंह रघुवंशी द्वारा दायर की गई थी, जिसमें याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता गौरव समधिया और राजीव श्रीवास्तव ने पक्ष रखा। याचिका में राज्य सरकार व प्रशासन से निम्नलिखित मुख्य मांगें की गई थीं:
  • शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, विदिशा के परिसर से अवैध कब्जाधारियों को तत्काल बेदखल किया जाए।
  • नगर पालिका परिषद विदिशा द्वारा सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग की जांच कराई जाए।
  • पूरे विदिशा जिले में सरकारी स्कूलों और उनके खेल के मैदानों पर हुए अतिक्रमणों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई हो।
  • विदिशा जिले के किसी भी सरकारी स्कूल परिसर अथवा खेल मैदान में व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति न दी जाए।
याचिकाकर्ता पक्ष का तर्क था कि बच्चों के सर्वांगीण और शारीरिक विकास के लिए खेल के मैदान आवश्यक शैक्षणिक संरचना हैं। इस दलील के समर्थन में नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act), 2009 की अनुसूची तथा सर्वोच्च न्यायालय के हरियाणा राज्य बनाम सतपाल और तमिलनाडु राज्य बनाम के. श्याम सुंदर जैसे प्रमुख फैसलों का संदर्भ दिया गया। 

हाई कोर्ट में हारने से पहले ही अतिक्रमण हटा दिया

मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता विवेक खेडकर एवं शासकीय अधिवक्ता एस. एस. कुशवाह ने अदालत को सूचित किया कि विदिशा के उत्कृष्ट विद्यालय से संबंधित शिकायत का पूर्ण निवारण कर लिया गया है। राज्य द्वारा प्रस्तुत विद्यालय के प्राचार्य के प्रमाण पत्र (दिनांक 23 सितंबर 2026) के आधार पर अदालत के सामने तथ्य रखे गए कि:
  • स्कूल परिसर से स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का बोर्ड हटाकर शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का आधिकारिक बोर्ड स्थापित कर दिया गया है।
  • खेल के मैदान की चाबियां विधिवत स्कूल प्रशासन को सौंप दी गई हैं।
  • छात्र बिना किसी बाधा या रुकावट के खेल के मैदान व उसकी सुविधाओं का उपयोग कर रहे हैं।

उच्च न्यायालय का कड़ा निर्देश

न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के द्वारा लिखित आदेश में पीठ ने नोट किया कि खेल का मैदान स्कूल को वापस मिल चुका है और छात्र इसका उपयोग कर रहे हैं, इसलिए इस याचिका में अब कोई विवाद शेष नहीं रह गया है। अदालत ने याचिका को निस्तारित (disposed of) करते हुए राज्य सरकार व संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का सख्त निर्देश दिया कि सरकारी स्कूल परिसरों और खेल के मैदानों को केवल विद्यार्थियों की शैक्षणिक, शारीरिक और खेलकूद गतिविधियों के लिए ही सुरक्षित रखा जाए, तथा भविष्य में किसी भी अनधिकृत अथवा व्यावसायिक उपयोग की पुनरावृत्ति न होने दी जाए।

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