भोपाल समाचार, 20 सितंबर 2026: किसी भी आंदोलन की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि, आंदोलन करने वाले किस उद्देश्य के साथ आए हैं और किस प्रकार की रणनीति का उपयोग कर रहे हैं। दूसरे वर्गों की तुलना में, संख्या में काफी कम, मुट्ठी भर अतिथि विद्वान, सरकार का ध्यान खींचने में सफल हो गए हैं। विद्वान जनता पार्टी के ऐलान के बाद, प्रदर्शनकारियों को मंत्री के बंगले से तो खदेड़ दिया गया लेकिन, सिस्टम उनको इग्नोर नहीं कर पाया। आज डिपार्टमेंट के आयुक्त उनसे मिलने के लिए नीलम पार्क पहुंचे।
बात बढ़ने लगी तो मंत्री जी ने पुलिस बुला ली
नियमितीकरण और फॉलन आउट प्रक्रिया बंद करने की मांग को लेकर अतिथि विद्वानों ने इस बार कोई पॉलिटिकल ड्रामा नहीं किया बल्कि डायरेक्ट अटैक किया और उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के बंगले के बाहर जाकर धरने पर बैठ गए। मंत्री श्री परमार ने बातचीत के दौरान उनको चुनाव लड़ने की चुनौती दे दी तो बदले में सोशल मीडिया पर "विद्वान जनता पार्टी" का ऐलान कर दिया गया। सामने से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान निकले तो उनको रोक लिया, पूछने लगे कि जब चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले ही ऐलान कर दिया था तो फिर आदेश जारी क्यों नहीं किया। बात बढ़ने लगी तो मंत्री जी ने पुलिस बुला ली, पुलिस ने डंडा दिखाया तो अतिथि विद्वान, नीलम पार्क में जाकर धरने पर बैठ गए।
कमिश्नर को छुट्टी के दिन आना पड़ा
अतिथि विद्वानों के प्रदर्शन की लोकेशन जरूर चेंज हो गई है लेकिन उनकी रणनीति में कोई बदलाव नहीं आया। वह अभी भी पिन पॉइंट टारगेट अटैक कर रहे हैं। उनकी सीधी मांग है और अपने प्रदर्शन में किसी का पॉलीटिकल एजेंडा शामिल नहीं होने दे रहे हैं। नतीजा आज रविवार को छुट्टी के दिन दोपहर बाद करीब पौने तीन बजे उच्च शिक्षा आयुक्त प्रबल सिपाहा भी धरना स्थल पर पहुंचे और अतिथि शिक्षकों से मुलाकात की।
अतिथि शिक्षकों की मुख्य मांगें
निश्चित समय-सीमा: नियमितीकरण और स्थायित्व के लिए नीति बनाने की समय-सीमा तय की जाए।
फॉलन आउट पर रोक: स्थायी नीति लागू होने तक फॉलन आउट प्रक्रिया बंद की जाए। इसमें नियमित प्राध्यापक के आने पर अतिथि शिक्षक की सेवा समाप्त हो जाती है।
अतिथि शिक्षकों का कहना है कि 10 जुलाई 2026 को रविंद्र भवन सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उच्च शिक्षा मंत्री ने हरियाणा मॉडल से बेहतर नीति बनाने का आश्वासन दिया था। 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन पर उज्जैन पहुंची अतिथि शिक्षकों की बहनों ने सीएम को राखी भी बांधी थी। उस दौरान भी प्रक्रिया रोकने की बात कही गई थी। अतिथि शिक्षकों के मुताबिक अब तक कोई ठोस नीति नहीं बनी है।
क्या है फॉलन आउट प्रक्रिया
सरकारी कॉलेजों में नियमित प्राध्यापकों की अनुपस्थिति में अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की जाती है। जब रिक्त पद पर नियमित प्रोफेसर की नियुक्ति हो जाती है तो अतिथि विद्वान की सेवा समाप्त कर दी जाती है। इसी प्रक्रिया को फॉलन आउट कहा जाता है। अतिथि विद्वानों का कहना है कि यदि उनकी सेवा, केवल एक शैक्षणिक सत्र तक ली जाती तो उन्हें कोई परेशानी नहीं थी लेकिन लगातार कई सालों तक उनका सेवा विस्तार देने के बाद, फॉलन आउट अन्याय है।

