भोपाल, 18 सितंबर 2026: मध्य प्रदेश के सरकारी एवं प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के पेरेंट्स और स्कूल स्टाफ के लिए बड़ी खबर है। स्कूल मैनेजमेंट एंड डेवलपमेंट कमेटी (SMDC) की व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। इसके स्थान पर विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) का गठन किया जाएगा जिसको 30 लाख रुपए सालाना बजट खर्च करने का अधिकार होगा। इस समाचार में हम नई व्यवस्था को सरल भाषा में विस्तार से बता रहे हैं, ताकि किसी को कोई कंफ्यूजन ना रहे, और कोई किसी को मिस गाइड न कर पाए:-
मध्य प्रदेश के सभी स्कूलों में SMDC समाप्त SMC के गठन के निर्देश जारी
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, भारत सरकार, शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी नवीन SMC Guidelines-2026 के अनुपालन में लोक शिक्षण संचालनालय, मध्य प्रदेश ने राज्य के सभी शासकीय, शासकीय अनुदान प्राप्त एवं अशासकीय विद्यालयों में विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) के गठन एवं संचालन हेतु नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अपर परियोजना संचालक (समग्र शिक्षा - सेकेण्डरी एजुकेशन) नन्दा भलावे कुशरे द्वारा जारी आदेश के तहत अब प्रदेश के प्रत्येक विद्यालय में केवल एक एकीकृत विद्यालय प्रबंधन समिति (Unified SMC) गठित की जाएगी। इसके साथ ही पूर्व से संचालित पृथक स्कूल मैनेजमेंट एंड डेवलपमेंट कमेटी (SMDC) की व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है।
छात्र संख्या के आधार पर समिति का आकार
विद्यालय में नामांकित विद्यार्थियों की कुल संख्या के आधार पर समिति के सदस्यों की संख्या तय होगी:
- 100 तक नामांकन: 12 से 15 सदस्य
- 100 से 500 तक नामांकन: 15 से 20 सदस्य
- 500 से अधिक नामांकन: 20 से 25 सदस्य
- 2. 75% अभिभावक और 50% महिला आरक्षण अनिवार्य
एकीकृत विद्यालय प्रबंधन समिति की संरचना के प्रावधान
समिति की संरचना को समावेशी और पारदर्शी बनाने के लिए निम्नलिखित प्रावधान किए गए हैं:
- कुल सदस्यों में न्यूनतम 75 प्रतिशत सदस्य विद्यार्थियों के माता-पिता या अभिभावक होंगे।
- कुल सदस्यों में कम से कम 50 प्रतिशत महिलाएं अनिवार्य रूप से शामिल होंगी।
- अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), सामाजिक एवं आर्थिक रूप से वंचित समूह (SEDGs) तथा दिव्यांग बच्चों (CwSN) के अभिभावकों को समुचित प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।
- समिति में शिक्षक, स्थानीय निकाय प्रतिनिधि, विषय विशेषज्ञ, पूर्व छात्र, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता तथा आशा कार्यकर्ता को भी सदस्य के रूप में शामिल किया जा सकेगा।
अध्यक्ष का चुनाव और संचालन संबंधी नियम
अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चयन अभिभावक सदस्यों में से लोकतांत्रिक एवं पारदर्शी प्रक्रिया द्वारा किया जाएगा। संस्था प्रमुख / प्राचार्य समिति के सदस्य सचिव होंगे।
शैक्षणिक सत्र शुरू होने के एक माह के भीतर SMC का गठन और गठन के एक सप्ताह के भीतर पहली बैठक आयोजित करना अनिवार्य है।
समिति की बैठक प्रत्येक माह कम से कम एक बार होगी, जिसमें न्यूनतम 50 प्रतिशत उपस्थिति (कोरम) अनिवार्य रहेगी। बैठक की कार्यवाही का अभिलेख सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाएगा।
उपसमितियां, निर्माण कार्य और विकास योजना
SMC के प्रभावी संचालन हेतु 'स्कूल भवन समिति' (School Building Committee) तथा 'शैक्षणिक समिति' (Academic Committee) का गठन किया जाएगा।
विद्यालयों में 30 लाख रुपये तक के समस्त निर्माण व मरम्मत कार्य SMC के माध्यम से कराए जा सकेंगे, जिनका वित्तीय प्रबंधन एवं सोशल ऑडिट पारदर्शी रूप से होगा।
प्रत्येक विद्यालय द्वारा 3 वर्षीय स्कूल विकास योजना और वार्षिक उप-योजनाएं तैयार की जाएंगी।
प्रमुख जिम्मेदारियां एवं अनुश्रवण
SMC बच्चों के नामांकन, उपस्थिति एवं ठहराव की निगरानी के साथ-साथ निपुण भारत (FLN), पीएम श्री (PM SHRI), पीएम पोषण (PM POSHAN), समग्र शिक्षा, उल्लास (ULLAS) तथा बाल सुरक्षा (POCSO, एंटी-बुलिंग व मानसिक स्वास्थ्य) संबंधी गतिविधियों की नियमित समीक्षा करेगी। इसके अलावा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) व नेताजी सुभाष चंद्र बोस (NSCB) छात्रावासों की व्यवस्थाओं का निरीक्षण भी SMC द्वारा किया जाएगा।
विकासखंड एवं जिला स्तर के अधिकारी SMC की बैठकों व कार्यवाही का नियमित अनुश्रवण करेंगे तथा विद्यालय निर्धारित प्रारूप में मासिक रिपोर्ट जिला कार्यालय को भेजेंगे। जिला शिक्षा अधिकारियों द्वारा समस्त संकुल प्राचार्यों को समयावधि में गठन प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट: अनुराग तिवारी।

