भोपाल में महिला शिक्षक के खिलाफ पॉलिटिक्स, छात्राओं से प्रोटेस्ट करवाया

Updesh Awasthee
भोपाल, 25 सितंबर 2026:
मध्य प्रदेश की राजनीति में शिक्षकों का दखल और मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग की राजनीति, प्रदेश की आदि से ज्यादा समस्याओं की जड़ है। भोपाल में एक महिला शिक्षक के खिलाफ इस कदर पॉलिटिक्स खेली गई कि, 50 से अधिक छात्राओं को जिला पंचायत की बैठक में बुलाकर प्रोटेस्ट करवाया गया। इस बैठक में महिला शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं जबकि मजे की बात यह है कि कोरम पूरा नहीं होने के कारण बैठक निरस्त हो गई थी। 

घटना का विवरण और बेसिक नॉलेज

महिला शिक्षा का नाम है रानी मेहरा और स्कूल का नाम है शासकीय माध्यमिक विद्यालय अरवलिया। जिला पंचायत भोपाल में बृहस्पतिवार 24 सितंबर 2026 को मासिक बैठक का आयोजन किया गया था। इसी दौरान 50 से अधिक छात्राएं अपने अभिभावकों के साथ बैठक कक्ष में पहुंच गईं। छात्राओं ने शिक्षा समिति के सभापति एवं जिला पंचायत उपाध्यक्ष मोहन सिंह जाट का घेराव कर स्कूल की शिक्षिका रानी मेहरा की शिकायत की।छात्राओं ने आरोप लगाया कि महिला शिक्षक का व्यवहार उनके प्रति ठीक नहीं है और वह समय पर स्कूल नहीं आतीं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। छात्राओं का यह भी आरोप है कि शिक्षिका स्कूल के अन्य शिक्षकों से भी विवाद करती रहती हैं। छात्राओं ने सभापति से कहा कि शिक्षिका के रवैये से वे परेशान हैं। उनके मुताबिक, शिक्षिका ने उनसे यह तक कहा कि ‘आपसे बने तो मेरा ट्रांसफर करवा दो।’ छात्राओं ने मांग की, कि शिक्षिका का दूसरे स्कूल में तबादला किया जाए। छात्राओं ने जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी इला तिवारी से भी मुलाकात कर शिकायत की। इसके बाद सीईओ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी को जांच के निर्देश दिए। छात्राओं की शिकायत सुनने के बाद शिक्षा समिति के सभापति मोहन सिंह जाट ने बीईओ विजेता सूर्यवंशी और डीपीसी सिद्धार्थ जैन को मामले की जांच कर शिक्षिका के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। 

मी लॉर्ड कृपया नोट कीजिए

  • शिकायतकर्ता छात्राओं ने बताया कि, "महिला शिक्षक का व्यवहार उनके प्रति ठीक नहीं है" लेकिन व्यवहार में गलत क्या यह नहीं बताया। 
  • शिकायत में बताया है कि महिला शिक्षक अन्य शिक्षकों के साथ भी विवाद करती हैं। सवाल यह है कि इससे छात्राओं को क्या प्रॉब्लम है? क्या शिक्षकों के विवाद में छात्राओं को मोहरा बनाया गया है? 
  • छात्राओं ने निवेदन किया कि, महिला शिक्षक का ट्रांसफर करवा दो। उन्होंने महिला शिक्षक को दंडित करने की मांग नहीं की, ऐसा क्यों? 
  • सामान्य तौर पर इस तरह की शिकायतें मंगलवार को जनसुनवाई में कलेक्टर से की जाती हैं। या फिर जिला शिक्षा अधिकारी, इस शिकायत के लिए सबसे उचित प्राधिकारी है लेकिन इस मामले में छात्राओं ने जिला पंचायत की मीटिंग में जाकर, शिक्षा समिति के सभापति मोहन सिंह जाट का घेराव किया। छात्राओं को कैसे पता कि जिला पंचायत में शिक्षा समिति होती है, और शिक्षा समिति का सभापति कौन है? 

अब मजे की बात सुनिए, यह स्कूल जिस गांव में मौजूद है, वह गांव मोहन सिंह जाट (शिक्षा समिति के सभापति) का ही है। मतलब यदि छात्राओं को घेर करना होता है, तो मोहन सिंह के घर का करती। इतनी दूर जाकर जिला पंचायत की बैठक में घेराव करने की जरूरत थी। क्या ऐसा इसलिए किया गया ताकि मामला मीडिया हेडलाइंस में आ जाए। कहीं ऐसा तो नहीं कि मोहन सिंह जी स्वयं ही इस पूरे विरोध प्रदर्शन के सूत्रसंचालक हैं। 

सबसे मजे की बात देखिए: बैठक का आयोजन हुआ, मोहन सिंह जाट आए, फिर छात्राओं ने उनका घेराव किया, फिर मोहन सिंह ने बैठक में मौजूद जिला शिक्षा अधिकारी को जांच और कार्रवाई के आदेश दिए। जबकि मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत द्वारा, इस बैठक को निरस्त कर दिया गया था क्योंकि सदस्यों का कोरम ही पूरा नहीं हुआ था। मतलब जिस बैठक का कोई अस्तित्व ही नहीं है, डॉक्यूमेंट में कोई रिकॉर्ड ही नहीं है, उस बैठक में दिए गए किसी भी आदेश या निर्देश की क्या वैल्यू।

इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि महिला शिक्षक रानी मेहरा ने सचमुच छात्रों को परेशान कर रखा हो, लेकिन जिस प्रकार का घटनाक्रम हुआ है। वह प्रदर्शन को ही डाउटफुल बना रहा है। ऐसा लग रहा है जैसे महिला शिक्षक के खिलाफ हुआ विरोध प्रदर्शन, किसी साजिश का हिस्सा था, कोई षड्यंत्र था, या फिर प्रायोजित था। हो सकता है महिला शिक्षक, स्कूल से ट्रांसफर लेना चाहती हो। सामान्य तौर पर तो बहुत मुश्किल और महंगा पड़ता है, यदि इस तरह की कोई शिकायत करवा दी जाए, तो फ्री में ट्रांसफर हो जाएगा।

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