भोपाल, 29 सितंबर 2026: पुलिस भी कई बार गजब करती है। राजधानी के एमपी नगर में सड़क के बीचों बीच, नगर निगम द्वारा स्थापित बिजली के खंबे में करंट से भाजपा के युवा नेता की मौत हो गई। मुख्यमंत्री ने कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए तो पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। अब बताइए कौन सा "ब्योमकेश बख्शी" यह पता लगा सकता है कि सरकारी खंबे में, किसी अज्ञात व्यक्ति ने और कैसे बिजली का करंट दौड़ाया होगा।
इस मामले में सिर्फ तीन सरकारी अधिकारी जिम्मेदार हैं
नंबर एक: वह पुलिस अधिकारी जो पॉइंट पर मौजूद था और उसे मालूम था कि खंबे में करंट है। उसने शिकायत (शायद बिजली कंपनी को) भी की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसी स्थिति में पॉइंट पर मौजूद पुलिस अधिकारी को तत्काल अपने वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी सूचना देनी चाहिए थी और जैसे मौत की घटना के बाद बिजली के खंबे को ब्लॉक किया गया है, तत्काल कर दिया जाना चाहिए था।
नंबर दो: बिजली कंपनी अथवा वह अधिकारी जिसने पुलिस अधिकारी द्वारा दी गई सूचना को सुना लेकिन फिर उसके ऊपर कोई कार्रवाई नहीं की। एक सरकारी कर्मचारी का यह कर्तव्य होता है कि यदि उसे कोई सूचना मिलती है और वह, आम नागरिकों की जीवन के लिए खतरे का विषय हो तो भले ही वह उसके क्षेत्राधिकार में नहीं आती फिर भी उसको कार्रवाई करनी होगी। सूचना प्राप्त करने वाले अधिकारी अथवा कर्मचारियों की जिम्मेदारी होती है कि वह, संबंधित क्षेत्राधिकार वाले अधिकारी अथवा कर्मचारियों को विधिवत सूचित करें। यह बात बिल्कुल वैसे ही है जैसे रोड एक्सीडेंट में गंभीर रूप से घायल मरीज की जान बचाना उस डॉक्टर की जिम्मेदारी है, जो घटनास्थल के सबसे नजदीक है और सबसे पहले संपर्क में आया। डॉक्टर यह नहीं कह सकता कि आज मैं छुट्टी पर हूं।
नंबर 3: नगर निगम भोपाल के सबसे विशेषज्ञ अधिकारी श्री आशीष श्रीवास्तव (अधीक्षण यंत्री) अनिवार्य रूप से जिम्मेदार हैं। इनका कहना है कि मुझे शिकायत नहीं मिली, मुझे किसी ने नहीं बताया। पुलिस वालों को मुझे बताना चाहिए था, बिजली कंपनी वालों को मुझे बताना चाहिए था, PWD वालों को मुझे बताना चाहिए था। इस प्रकार श्री आशीष श्रीवास्तव ने साबित कर दिया कि, वह अधीक्षण यंत्री के पद के लिए एक अयोग्य अधिकारी हैं। क्योंकि यह उनकी लीगल लायबिलिटी है कि वह पता करें, नगर निगम के किसी भी इलेक्ट्रिक पोल में करंट तो नहीं है। चेक करने के लिए नगर निगम का स्टाफ होता है और यदि उन्होंने स्टाफ को फील्ड में तैनात नहीं किया था। उसका सुपरविजन नहीं हो रहा था और रिपोर्टिंग नहीं ली जा रही थी, तो नागरिक की मौत के लिए यही अधिकारी एकमात्र और अंतिम जिम्मेदार है।
पुलिस को चाहिए था कि वह श्री आशीष श्रीवास्तव (अधीक्षण यंत्री) नगर निगम भोपाल एवं अन्य के खिलाफ मामला दर्ज करती। अज्ञात का क्या मतलब हुआ?
लगाई गई धारा और सजा
भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 106(1) लगाई गई है। यह धारा उतावलेपन या उपेक्षापूर्ण कार्य से किसी व्यक्ति की मृत्यु कारित करने पर लगती है (जो आपराधिक मानव वध की श्रेणी में न आता हो)। पुरानी IPC की धारा 304A के स्थान पर यह नई धारा है।
सजा का प्रावधान: अधिकतम 5 साल तक का कारावास (साधारण या कठोर) साथ में जुर्माना भी। रिपोर्ट: सत्येंद्र सरल, भोपाल।

