1100 वर्ष प्राचीन स्वयंभू श्री सिद्ध बटुकगणेश धरहरकला, पुष्पराजगढ़, अनूपपुर

Updesh Awasthee
वेद शर्मा, 
अनूपपुर 14 सितंबर 2026: जिले के पुष्पराजगढ़ जनपद अंतर्गत स्थित ग्राम धरहरकला में स्थापित प्राचीन श्रीगणेश प्रतिमा लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। ऐसी मान्यता है कि अमरकंटक में मां नर्मदा की पूजा करने का फल भक्तों को तभी मिलता है जब वे धरहरकला के सिद्घ श्री गणेश आश्रम में जाकर शिव पुत्र भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते हैं। यहां गणेश की पूजा अराधना करने आने वाले भक्त कभी निराश नहीं हुए हैं। कल्चुरी कालीन श्री गणेश की यह मूर्ति दक्षिण मुखी है जो प्रतिवर्ष अपना आकार बदलती जा रही है। यह जिले की एक मात्र गणेश मंदिर है जो लोगों के आस्था का केन्द्र है।

दर्शन करने दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालु

पुष्पराजगढ़ तहसील मुख्यालय से 7 किलोमीटर दूरी स्थित ग्राम धरहर कला के घने जंगल के बीच यह प्राचीन गणेश मंदिर स्थापित है। यहां स्थापित गणेश प्रतिमा हजारों साल पुरानीब बताई जाती है। पूर्व में यह मूर्ति यहां के जंगल में खुले आसमान के नीचे स्थापित थी, फिर गांव के लोगों और भक्तों ने मिलकर मूर्ति के सुरक्षा के लिए एक मंदिर का निर्माण कराया। मंदिर के आस-पास कल्चुरी कालीन शंकर, ब्रम्हा, विष्णु जी की प्रचीन मूर्तियां भी स्थापित हैं। गणेश मंदिर के पूर्व तरफ गौरी कुंड है जहां 12 महीने शीतल जल मौजूद रहता है। गौरी कुंड के समीप ही शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित है। पुरातत्व विभाग अब इस मंदिर की धरोहर को बचाने में जुटी है तथा मंदिर को भव्य बनाने का प्रयास कर रही है।

बसंत पंचमी पर लगता है मेला

प्रतिवर्ष बसंत पंचमी पर यहां मेला लगता है। यह क्षेत्रीय ग्रामीणों के आस्था का केन्द्र हैं। यहां मनोरम हरियाली का वातावरण रहता है। नैसर्गिक सौन्दर्य देख यहां आने वाला अभिभूत हो जाता है। अमरकंटक जाने वाले लोग इस मंदिर की जानकारी होने पर मुख्य रूप से दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसी मान्यता है कि गौरी नंदन गणेश से लोगों को खाली हाथ नहीं लौटना पड़ा है।

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