मध्य प्रदेश में महिलाओं की लाइफ के 7 ब्राइट और 6 डार्क स्पॉट पढ़िए, NFHS-6 में हुआ खुलासा

Updesh Awasthee
भोपाल, 24 अगस्त 2026:
गवर्नमेंट ऑफ इंडिया (Government of India) के मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर (Ministry of Health and Family Welfare) द्वारा रिलीज किए गए नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 (NFHS-6) के डेटा ने मध्य प्रदेश में महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। इस लेटेस्ट सर्वे रिपोर्ट के इंडिकेटर्स को यदि पिछले सर्वे (NFHS-5) से कम्पेयर किया जाए, तो साफ पता चलता है कि राज्य की महिलाओं ने फाइनेंशियल और डिजिटल डिसीजन्स में लंबी छलांग लगाई है, लेकिन कुछ ऐसे नेगेटिव एरियाज भी सामने आए हैं, जहाँ गवर्नमेंट (Government) और सोसाइटी (समाज) दोनों को गंभीर ध्यान देने की जरूरत है। इस न्यूज़ रिपोर्ट (News Report) में हम मध्य प्रदेश में वीमेन्स एम्पॉवरमेंट की इस बदलती तस्वीर के सभी पॉजिटिव (Positive) और नेगेटिव (Negative) पहलुओं का पॉइंट-टू-पॉइंट एनालिसिस कर रहे हैं: 

The Bright Spots 1: डिसीजन मेकिंग पावर काफी मजबूत हुई

मध्य प्रदेश में विवाहित महिलाओं की अपने घरों के भीतर डिसीजन मेकिंग पावर काफी मजबूत हुई है। सर्वे के अनुसार, 90.4% मैरिड वीमेन अब घरेलू डिसीजन्स (जैसे खुद की हेल्थ केयर, बड़ी घरेलू खरीदारी और रिश्तेदारों के यहाँ जाना) में आमतौर पर पार्टिसिपेट कर रही हैं, जो NFHS-5 में 86.0% था। इसमें अर्बन एरियाज का पार्टिसिपेशन 93.3% और रूरल एरियाज का 89.5% है।
मतलब मध्य प्रदेश में प्रत्येक 100 में से 14 महिलाओं की घर में कोई वैल्यू नहीं थी। उनसे घर के डिसीजंस के मामले में कुछ नहीं पूछा जाता था, बस आर्डर दिया जाता है। अब तस्वीर बदल गई है ग्रामीण क्षेत्रों में 90% और शहरी क्षेत्र में 93% महिलाएं घरेलू मामले में डिसीजन ले रही है और सभी प्रकार के बड़े निर्णय में पार्टिसिपेट कर रही हैं। 

एक बात और क्लियर होती है। पहले जब किसी विषय पर महिलाओं को डिसीजन मेकिंग प्रोसेस में शामिल किया जाता था तो वह खुद ही इस पूरी प्रक्रिया से अलग हो जाया करती थी लेकिन 2024 में मध्य प्रदेश की महिलाओं की डिसीजन मेकिंग पावर में गजब का चेंज देखने को मिला है। अब मध्य प्रदेश की महिलाएं कॉन्फिडेंस के साथ डिसीजन लेती है। 

The Bright Spots 2: फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस में बड़ा इंप्रूवमेंट

मध्य प्रदेश की महिलाओं में फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस (Financial Independence) के मामले में भी बहुत बड़ा इम्प्रूवमेंट (Improvement) देखा गया है। अब राज्य की 92.1% महिलाओं के पास अपना खुद का बैंक या सेविंग्स अकाउंट है। बड़ी बात यह है कि अपने बैंक अकाउंट को वह खुद यूज करती हैं। यह आंकड़ा पिछले सर्वे के 74.7% के मुकाबले एक बड़ा जंप है। रूरल एरियाज में भी यह रिकॉर्ड 91.7% तक पहुँच गया है। मतलब गांव की 100 में से लगभग 92 महिलाएं अपना बैंक अकाउंट खुद ऑपरेटर करती हैं। खुद बैंक जानी है खुद पैसा निकलती है और अपने हिसाब से खर्च करती हैं। पहले शहर और गांव मिलकर यह नंबर 75 नहीं था। अब केवल गांव में 92 हो गया है।

The Bright Spots 3: इंटरनेट यूज में रिकॉर्ड ग्रोथ 

डिजिटल एम्पॉवरमेंट (Digital Empowerment) के मोर्चे पर मध्य प्रदेश की महिलाओं ने कमाल की प्रोग्रेस दर्ज की है। इंटरनेट यूज करने वाली महिलाओं का परसेंट पिछले सर्वे के 26.9% से सीधे बढ़कर 62.0% हो गया है। मतलब डबल से भी ज्यादा हो गया है। ऐसा शायद इसलिए हुआ क्योंकि फैमिली को महिलाओं ने लीड करना शुरू कर दिया है और उनके पास अपनी फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस भी है। अर्बन वीमेन में यह 78.1% और रूरल वीमेन में 55.9% है। 

The Bright Spots 4: प्रॉपर्टी ओनरशिप में इम्प्रूवमेंट

लैंड और हाउसिंग ओनरशिप (Land and Housing Ownership) के मोर्चे पर भी पॉजिटिव बदलाव आया है। ऐसे परिवार जहाँ महिलाओं के नाम अकेले या जॉइंटली कोई मकान और/या जमीन है, उनका परसेंट 11.1% से बढ़कर 17.3% हो गया है। अर्बन एरियाज में यह ओनरशिप 21.0% है। 

The Bright Spots 5: एजुकेशन और स्कूलिंग में सुधार

मध्य प्रदेश में 6 साल या उससे अधिक उम्र की फीमेल पापुलेशन जिन्होंने कभी स्कूल अटेंड किया है, उनका परसेंट 67.5% से सुधरकर 70.0% हुआ है। सरकारी भाषा में मध्य प्रदेश में महिलाओं की साक्षरता दर 70% हो गई है। इसके अलावा, 10 या उससे ज्यादा साल की स्कूलिंग पूरी करने वाली महिलाओं का परसेंट भी 29.3% से सुधरकर 33.7% हो गया है। मतलब 100 में से लगभग 34 महिलाएं ऐसी हैं जिन्होंने हाई स्कूल परीक्षा या इससे हायर डिग्री पास कर रखी है।

The Bright Spots 6: स्पाउसल वायलेंस में गिरावट

महिलाओं की सेफ्टी के मोर्चे पर एक राहत देने वाला चेंज (Change) यह आया है कि मैरिड वीमेन (18-49 वर्ष) के खिलाफ होने वाली स्पाउसल (घरेलू) वायलेंस 28.0% से घटकर 21.4% पर आ गई है। इसके अलावा, 18 साल की उम्र तक सेक्सुअल वायलेंस एक्सपीरियंस करने वाली युवतियों का दर भी 1.1% से गिरकर 0.6% रह गया है। यहां इस बात को भी नोट करना पड़ेगा कि पहले महिलाएं शिकायत नहीं करती थी परंतु अब शिकायत करने सीख गई है। पहले सिस्टम महिलाओं के लिए कंफर्टेबल नहीं था, लेकिन अब काफी कंफर्टेबल होता जा रहा है। इसके बाद भी डोमेस्टिक वायलेंस में गिरावट एक बढ़िया रिजल्ट है।

The Bright Spots 7: हाइजीनिक मेन्स्ट्रूअल प्रोटेक्शन 

मासिक धर्म के दौरान हाइजीन मेंटेन करने वाली 15-24 साल की यंग वीमेन का परसेंट 60.9% से बढ़कर 65.4% हो गया है। 

The Dark Spots 1: आधी महिलाओं के पास अपना मोबाइल नहीं है

डिजिटल लिटरेसी बढ़ने के बावजूद, राज्य की आधी से भी कम महिलाओं (48.5%) के पास अपना खुद का मोबाइल फोन है जिसका वे यूज करती हैं। हालांकि यह पिछले सर्वे के 38.5% से बेहतर है, पर रूरल और अर्बन एरियाज के बीच का गैप बेहद चिंताजनक है। जहाँ अर्बन एरियाज में 69.2% वीमेन के पास खुद का मोबाइल फोन है, वहीं रूरल एरियाज में यह आंकड़ा केवल 40.6% पर ही सिमटा हुआ है। इसका मतलब होगी गांव में 59% से अधिक महिलाएं अपने पति, संतान अथवा किसी अन्य के मोबाइल फोन का उपयोग करती हैं। शहरी क्षेत्र में भी लगभग 30% महिलाओं के पास अपना फोन नहीं है।

The Dark Spots 2: मेन्स्ट्रूअल हाइजीन में ग्रामीण क्षेत्रों की खराब स्थिति 

भले ही मेन्स्ट्रूअल हाइजीन का स्टेट एवरेज सुधरा है, लेकिन मध्य प्रदेश के रूरल एरियाज में स्थिति अब भी चिंताजनक है। रूरल वीमेन में केवल 58.5% ही हाइजीनिक मेथड्स का यूज कर पाती हैं, जिसका मतलब है कि आज भी ग्रामीण क्षेत्रों की करीब 41.5% युवतियाँ हाइजीनिक प्रोटेक्शन से महरूम हैं। इसके कम्पेरिजन में अर्बन एरियाज का स्कोर 87.7% है। इन दोनों नंबर्स को ही संतोष जनक नहीं दे सकते। 2025 में जब आधे से ज्यादा महिलाएं घर की डिसीजन ले रही हैं, इसी मध्य प्रदेश में, 41% ग्रामीण युवतियों के पास और लगभग 60% महिलाओं के पास हाइजीनिक प्रोटेक्शन नहीं है। वह गंभीर संक्रमण के खतरे में जीवन बिता रही है। यह बड़ी चिंता का विषय है।

The Dark Spots 3: काम तो मिला कमाई नहीं मिलती

मध्य प्रदेश में वीमेन्स एम्पॉवरमेंट के सामने आर्थिक आत्मनिर्भरता का बहुत बड़ा चैलेंज है। पिछले 12 महीनों में काम करने वाली महिलाओं में से केवल 32.6% को ही नकद (Cash) में पेमेंट मिला है। हैरानी की बात यह है कि अर्बन एरियाज की वीमेन में कैश पेमेंट का परसेंट केवल 28.5% है, जो रूरल एरियाज (34.0%) से भी कम है। यह इंडिकेट करता है कि मेजॉरिटी वीमेन बिना कैश अर्निंग्स के अनपेड या अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर्स में काम कर रही हैं। इसका मतलब हुआ कि मध्य प्रदेश के शहरी क्षेत्र में महिलाएं अपने फैमिली बिजनेस में पार्टिसिपेट कर रही हैं। बिजनेस में जो प्रॉफिट होता है, उसमें से महिलाओं को कुछ भी नहीं मिलता है। जबकि बच्चों को पॉकेट मनी दी जाती है। मतलब फैमिली बिजनेस में पार्टिसिपेट करने के बाद भी मध्य प्रदेश के शहरी क्षेत्र में 65% से अधिक महिलाओं को पॉकेट मनी (बैंक अकाउंट में) भी नहीं मिलती। लगभग 33% महिलाएं जो नौकरी कर रही हैं, केवल उनके बैंक अकाउंट में पैसे आते हैं।

The Dark Spots 4: घर की मालकिन लेकिन रजिस्ट्री में नाम नहीं

यद्यपि फीमेल प्रॉपर्टी ओनरशिप बढ़ी है, लेकिन 17.3% का लो परसेंट यह साफ करता है कि मध्य प्रदेश की 82.7% महिलाएं आज भी किसी भी प्रकार के मकान या जमीन की मालकिन नहीं हैं, जो उन्हें फाइनेंशियल क्राइसिस के समय बेहद कमजोर बनाता है। 

The Dark Spots 5: प्रेगनेंसी के दौरान वायलेंस घटने की जगह बढ़ गया 

यह बहुत ही शर्मनाक बात है। दांपत्य जीवन में महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता कम हुई है। मैरिड महिलाओं के साथ प्रेगनेंसी (Pregnancy) के दौरान होने वाली फिजिकल वायलेंस में कोई सुधार नहीं हुआ है, और यह पिछले सर्वे की तरह इस बार भी 2.3% पर स्थिर बनी हुई है। इसमें भी अर्बन एरियाज की वीमेन के साथ प्रेगनेंसी के दौरान वायलेंस रूरल (2.2%) के मुकाबले थोड़ा ज्यादा यानी 2.6% रिकॉर्ड किया गया है। मतलब स्थिति में कोई सुधार तो नहीं हुआ उल्टा शहरी क्षेत्र में गर्भवती महिलाओं के साथ, उनके पति द्वारा मारपीट के मामले बढ़ गए हैं।

The Dark Spots 6: घरेलू हिंसा की हाई रेट 

घरेलू हिंसा (Spousal Violence) में गिरावट के बावजूद, मध्य प्रदेश में आज भी हर पाँच में से एक मैरिड महिला (21.4%) अपने लाइफ पार्टनर से फिजिकल या सेक्सुअल वायलेंस का शिकार हो रही है, जो महिलाओं की सुरक्षा और आत्मसम्मान पर बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। रूरल एरियाज में यह रेट आज भी 22.6% जितनी ऊंची है। 

News Report Conclusion

NFHS-6 की इस रिपोर्ट से बिल्कुल क्लियर पिक्चर सामने आती है कि मध्य प्रदेश की वीमेन डिजिटल और फाइनेंशियल टूल्स (जैसे बैंक अकाउंट और इंटरनेट) को अपनाकर तेजी से आगे बढ़ रही हैं लेकिन वास्तविक सशक्तिकरण तब तक अधूरा रहेगा जब तक वीमेन को अपने काम का कैश पेमेंट नहीं मिलेगा, मोबाइल ओनरशिप और मेन्स्ट्रूअल हाइजीन का रूरल-अर्बन गैप कम नहीं होगा, और वे अपने ही घरों के भीतर डोमेस्टिक वायलेंस से पूरी तरह से सेफ नहीं होंगी। गवर्नमेंट को अपनी स्कीम्स (Schemes) के जरिए इन स्पेसिफिक एरियाज को टारगेट करने की तुरंत जरूरत है। Exegesis: Updesh Awasthee.

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