यदि सरकारी स्कूल में कोई अनाधिकृत व्यक्ति, संस्था या पार्टी निरीक्षण करने आए तो क्या करें, काम की बात पढ़िए

Updesh Awasthee
लीगल न्यूज डेस्क, 23 अगस्त 2026:
पिछले दिनों हमने देखा कि कुछ लोग अति उत्साह में, समूह बना कर सरकारी स्कूलों का निरीक्षण करने के लिए निकल पड़े। सोशल मीडिया पर ऐसा माहौल बनाया गया जिसे सरकारी स्कूल या सरकारी दफ्तर का निरीक्षण करना किसी भी व्यक्ति, संस्था या पार्टी का संवैधानिक अधिकार है और उसको रोकना अपराध है जबकि भारतीय न्याय व्यवस्था इसके ठीक उलट है। करंट अफेयर से जुड़े इस न्यूज़ आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि, इस तरह की घटनाक्रम के लिए कौन से कानून लागू होते हैं और किस पक्ष को क्या अधिकार प्राप्त होता है:- 

If an Unauthorised Person, Organisation or Political Party Comes to Inspect a Government School, What Should You Do?

सबसे पहला सवाल है कि, क्या व्यक्तियों का कोई भी समूह, भारत में किसी भी सरकारी स्कूल या सरकारी इमारत, अथवा सरकारी व्यवस्था का निरीक्षण कर सकता है? और भारत में लागू सभी प्रकार के कानून का अध्ययन करने के बाद इसका सिर्फ एक जवाब है, नहीं। कोई भी व्यक्ति अथवा व्यक्तियों का कोई भी समूह (इसमें भाजपा कांग्रेस सहित मान्यता प्राप्त सभी पॉलीटिकल पार्टी अभी शामिल है) भारत में किसी भी सरकारी स्कूल, सरकारी इमारत या सरकारी व्यवस्था का मनमाने ढंग से निरीक्षण नहीं कर सकता। ऐसी गतिविधि आमतौर पर अनुमत नहीं है और कई मामलों में अपराध मानी जा सकती है। नीचे विस्तार से कानूनी स्थिति बताई गई है। 

1. किन परिस्थितियों में सीमित निरीक्षण संभव है? 

A. शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 21 के अनुसार (RTE Act, 2009 Section 21) हर सरकारी/सहायता प्राप्त स्कूल (कुछ अपवादों को छोड़कर) में School Management Committee गठित होनी चाहिए।  इसमें कम-से-कम 75% सदस्य बच्चों के माता-पिता/अभिभावक होते हैं, स्थानीय निकाय के प्रतिनिधि और शिक्षक भी शामिल होते हैं। 50% महिलाएँ होनी चाहिए।  
SMC के कार्य (धारा 21(2)): स्कूल के कामकाज की निगरानी (monitor the working of the school), स्कूल विकास योजना बनाना, अनुदान के उपयोग की निगरानी आदि।  
राज्य नियमों/दिशानिर्देशों में SMC सदस्यों को स्कूल समय में विजिट करने, रजिस्टर पर साइन करने, रिकॉर्ड मांगने और सुविधाओं की जाँच करने का अधिकार दिया गया है, बशर्ते कक्षाओं/गतिविधियों में बाधा न पड़े। लड़कियों के स्कूल में केवल महिला सदस्य ही राउंड ले सकती हैं।  
महत्वपूर्ण: यह अधिकार केवल SMC के सदस्यों को है, किसी भी बाहरी समूह या यादृच्छिक व्यक्तियों को नहीं। SMC खुद भी स्कूल के नियमित कामकाज में बाधा नहीं डाल सकती।

B. सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act)  धारा 2(j) में “सूचना के अधिकार” में कार्य, दस्तावेज और रिकॉर्ड का निरीक्षण शामिल है। 
कोई भी नागरिक RTI आवेदन करके सरकारी स्कूल के रिकॉर्ड (उपस्थिति रजिस्टर, बजट, मिड-डे मील आदि) या कुछ मामलों में भौतिक सुविधाओं (पानी, शौचालय, क्लासरूम आदि) का निरीक्षण कर सकता है।  
दिल्ली में CIC के आदेशों (2011-2012) के अनुसार कुछ स्कूलों में महीने के अंतिम कार्य दिवस पर निर्धारित समय में नागरिकों को रिकॉर्ड और बुनियादी सुविधाओं का निरीक्षण करने की अनुमति दी गई थी।  
लेकिन यह व्यक्तिगत RTI प्रक्रिया के तहत होता है, PIO की देखरेख में, और समूह द्वारा अचानक प्रवेश या भीड़ जुटाने का अधिकार नहीं देता। PIO सुरक्षा, गोपनीयता या अनुशासन के आधार पर प्रवेश सीमित कर सकता है।

C. आधिकारिक निरीक्षण,  शिक्षा विभाग के अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, स्थानीय प्राधिकरण आदि विभिन्न राज्य शिक्षा अधिनियमों और नियमों के तहत स्कूलों का निरीक्षण कर सकते हैं। सामान्य नागरिक या समूह यह शक्ति नहीं रखते।

D. अन्य तरीके शिकायत: 
RTE की धारा 32 के तहत स्थानीय प्राधिकरण को लिखित शिकायत।  
जनहित याचिका (PIL) या बाल अधिकार आयोग के माध्यम से।  
अभिभावक के रूप में PTM या SMC में भागीदारी।

2. मनमाने निरीक्षण को रोकने वाले वाले कानून और दंड 
A. भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) – धारा 329 (पूर्व IPC धारा 441/447)  आपराधिक अतिक्रमण (Criminal Trespass): 
कोई व्यक्ति किसी अन्य के कब्जे वाली संपत्ति में इस इरादे से प्रवेश करता है या वैध प्रवेश के बाद अवैध रूप से रुकता है कि अपराध करे, डराने-धमकाने, अपमानित करने या परेशान (annoy) करने का।  
गृह-अतिक्रमण (House-Trespass): भवन (स्कूल/सरकारी इमारत) में ऐसा करने पर।  
दंड:  आपराधिक अतिक्रमण: 3 महीने तक कारावास, या ₹5,000 तक जुर्माना, या दोनों।  
गृह-अतिक्रमण: 1 वर्ष तक कारावास, या ₹5,000 तक जुर्माना, या दोनों।

सरकारी स्कूल/इमारत सरकार/स्कूल प्रशासन के कब्जे में होती है। बिना अनुमति समूह द्वारा प्रवेश, फोटो/वीडियो लेना या गतिविधियों में बाधा डालना “annoy” या व्यवधान माना जा सकता है।  

हाल ही में (अगस्त 2026) राजस्थान शिक्षा विभाग ने बाहरी लोगों के स्कूल परिसर में बिना प्रधानाचार्य की अनुमति प्रवेश पर रोक लगाई और BNS के तहत कार्रवाई का प्रावधान किया। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 सरकार को इस बात के लिए जिम्मेदारी देता है कि वह स्कूल में बच्चों की निजता और सुरक्षा कुछ सुनिश्चित करने के लिए उचित कार्यवाही करें।

B. सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम, 1971: सरकारी परिसर में अनधिकृत प्रवेश/कब्जे पर बेदखली का प्रावधान। एस्टेट अधिकारी नोटिस देकर बेदखल कर सकता है।

C. अन्य संबंधित कानून: 
अगर क्षति पहुँचाई जाए तो BNS की मिस्चीफ संबंधी धाराएँ।  
बच्चों से जुड़ी गतिविधियों में POCSO Act, 2012 या Juvenile Justice Act.  
अनधिकृत फोटो/वीडियो/लाइव स्ट्रीमिंग पर Information Technology Act. 
संवेदनशील सरकारी इमारतों में Official Secrets Act आदि।
राज्य-विशिष्ट सर्कुलर (जैसे राजस्थान का) जो अनुमति अनिवार्य करते हैं।

निष्कर्ष : कोई भी समूह मनमाने ढंग से सरकारी स्कूल, इमारत या व्यवस्था का “निरीक्षण” नहीं कर सकता। यह अनुमत नहीं है।

फ्री लीगल एडवाइस
ऐसे लोग जो शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाना चाहते हैं और शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा नहीं है वह लोग, किसी समस्या की जानकारी हो तो RTI फाइल करें, SMC से संपर्क करें, शिक्षा विभाग को शिकायत दें या बाल अधिकार आयोग से संपर्क करें। मनमाने समूह निरीक्षण से बचें क्योंकि यह कानूनी कार्रवाई का आधार बन सकता है। 

यदि किसी ने निरीक्षण कर लिया तो प्राचार्य सस्पेंड नहीं बर्खास्त होगा

स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी और खास तौर पर स्कूल के प्राचार्य कि यह संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वह स्कूल में उपस्थित बच्चों के संवैधानिक अधिकारों (जो उनको अनुच्छेद 21 के तहत मिलते हैं) की रक्षा करें। शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की सभी धाराओं का पालन हो। यदि कोई प्राचार्य, किसी व्यक्ति, व्यक्तियों के समूह, संस्था अथवा पार्टी के निरीक्षण को अलाउ कर देता है अथवा मौन रहता है और उनका यथाशक्ति विरोध नहीं करता, तो वह प्राचार्य दंड का पात्र होगा। इसलिए यदि कोई ऐसी स्थिति बनती है तो, सबसे पहले अपने वरिष्ठ अधिकारियों की सूचित करें, अपने साथ मौजूद दूसरे सरकारी कर्मचारी को तत्काल पुलिस को सूचित करने के लिए कहें। स्टाफ में जो अन्य सरकारी कर्मचारी मौजूद है उन्हें व्यक्तियों के समूह के प्रवेश में अवरोध पैदा करने के लिए कहें। और पूरे घटनाक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग करें। स्कूल के गेट को अंदर से बंद करें अथवा सभी विद्यार्थियों को एकत्रित करके सुरक्षित करें। यह उनके विवेक पर है परंतु एक्शन अनिवार्य है। उपदेश अवस्थी (लीगल एडवाइजर एवं पत्रकार)।

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