MPPSC को बड़ा झटका: हाईकोर्ट ने बाहर कर दिए गए अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल करने का आदेश दिया

Updesh Awasthee
इंदौर, 18 अगस्त 2026
: हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने MP Assistant Director Fisheries recruitment 2026 को लेकर एक ऐतिहासिक अंतरिम फैसला (interim order) सुनाया है। न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की पीठ ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) के कड़े विरोध और दलीलों को दरकिनार करते हुए याचिकाकर्ताओं को परीक्षा और आगामी पूरी चयन प्रक्रिया में शामिल करने का आदेश दिया है। यह मामला उन शिक्षित युवाओं के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जिन्हें विभाग के पुराने और अव्यावहारिक नियमों के कारण प्रक्रिया से बाहर रखा जा रहा था। 

Why MPPSC Fisheries Recruitment Rules are Challenged in Court 

इस पूरे कानूनी विवाद की मुख्य जड़ Madhya Pradesh Fisheries Department recruitment 2015 rules amendment में छिपी है। भर्ती नियमों के अनुसार, सहायक संचालक के 75% पद पदोन्नति (promotion) के माध्यम से और केवल 25% पद सीधी भर्ती (direct recruitment) से भरे जाने का प्रावधान है। विडंबना यह है कि इस 25% कोटे में भी एक ऐसी तकनीकी शर्त जोड़ दी गई है जिसने नए और बाहरी उम्मीदवारों का रास्ता लगभग बंद कर दिया है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि ये नियम केवल विभागीय उम्मीदवारों को ही 100% परोक्ष आरक्षण (indirect reservation) देने की एक साजिश है।

The training certificate hurdle in MP Fisheries Department recruitment 2015 rules 

भर्ती के लिए अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता में मास्टर डिग्री (M.Sc. Zoology with Fisheries या Fisheries Science) के साथ-साथ एक वर्ष का विशिष्ट ट्रेनिंग सर्टिफिकेट भी मांगा गया है। Advocate Dinesh Singh Chauhan ने MPPSC case में दलील देते हुए बताया कि यह ट्रेनिंग सर्टिफिकेट (ICAR या नौगांव संस्थान से) व्यावहारिक रूप से केवल उन्हीं को मिल पाता है जो पहले से ही सरकारी सेवा में नियुक्त हों। इस नियम के कारण कोई भी फ्रेश ग्रेजुएट या नया शिक्षित युवा आवेदन करने के लिए अपात्र हो जाता है, जो कि उनके मौलिक अधिकारों का हनन है।

Comparison with Other States and Higher Education Standards 

सुनवाई के दौरान कोर्ट को अवगत कराया गया कि महाराष्ट्र, तेलंगाना और अन्य पड़ोसी राज्यों में इस ग्रेड के पदों के लिए केवल मास्टर डिग्री ही अनिवार्य होती है। स्वयं मध्य प्रदेश की अन्य समान ग्रेड की भर्तियों में भी अतिरिक्त ट्रेनिंग की ऐसी कोई शर्त नहीं होती। एडवोकेट दिनेश सिंह चौहान ने कोर्ट में सिद्ध किया कि मत्स्य विभाग के ये नियम शिक्षित युवाओं के भविष्य के साथ एक बड़ा धोखा हैं। माननीय न्यायालय ने इन तकनीकी तर्कों से सहमति जताई और माना कि वर्तमान नियम व्यावहारिक (practical) नहीं हैं। 

High Court interim order on fisheries recruitment: Directions for MPPSC 

इंदौर हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए MP High Court interim order on fisheries recruitment जारी किया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि प्रतिवादी (Respondents) याचिकाकर्ताओं के आवेदन स्वीकार करें और उन्हें भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति दें। यह आदेश याचिका क्रमांक WP No. 32464 of 2026 के तहत दिया गया है। फिलहाल, सरकार और आयोग को अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया गया है और मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की गई है। तब तक पात्र युवाओं के लिए परीक्षा के द्वार खुल गए हैं।

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