उज्जैन, 14 अगस्त 2026: आज शुक्रवार को उज्जैन में जो कुछ भी हुआ, यदि कमरे के लेंस से देखेंगे तो, स्कूली छात्राओं ने जबरदस्त प्रदर्शन किया है, लेकिन यदि पिक्चर को रिवाइंड करके देखेंगे तो ध्यान में आएगा कि आज उज्जैन में जो कुछ भी हुआ, ई-अटेंडेंस का नतीजा है। कि यदि शिक्षक, नाराज नहीं होते तो आज ऐसे हालात भी नहीं होते। ध्यान से देखेंगे तो यह भी समझ में आएगा कि उज्जैन के जिला शिक्षा अधिकारी भी सरकार के खिलाफ हैं। चिंगारी भड़ककर ज्वाला बन गई लेकिन, जिला शिक्षा अधिकारी ने अपनी तरफ से स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया।
E-Attendance Backlash in MP: Girl Students Protest at Collectorate, DEO Joins Opposition
शुक्रवार को उज्जैन में छात्राओं ने क्या किया, यह तो आप संलग्न वीडियो में देख ही लेंगे। वीडियो में बच्चियां हैं, वह नारे लगा रही हैं, वह रो रही हैं और प्रशस्तिक अधिकारियों के सामने चुनौती पेश कर रही हैं। यह सब कुछ देखकर किसी की भी भावनाएं उद्वेलित हो सकती हैं। यदि कारण पूछेंगे तो, पता चलेगा कि उनका स्कूल बंद किया जा रहा है और उनको 15 किलोमीटर दूर दूसरे स्कूल में ट्रांसफर किया जा रहा है, जिसका वह विरोध कर रही है। लेकिन यदि आपको यह बताया जाए कि छात्राओं को अत्यधिक सुविधाओं से सांदीपनी स्कूल में ट्रांसफर किया जा रहा है। जहां के शिक्षक अच्छे हैं, जहां सभी सुविधाएं हैं, एक स्कूल की लागत 54 करोड़ है, वर्ल्ड क्लास स्कूल है और उज्जैन के किसी भी प्राइवेट स्कूल से अच्छा है। तब क्या आपको लगेगा कि बच्चों के साथ गलत हो रहा है?
छात्राओं ने वर्ल्ड क्लास स्कूल का विरोध क्यों किया
छात्राओं का कहना है कि वह इलाका सुरक्षा की दृष्टि से अच्छा नहीं है। ट्रांसपोर्टेशन की भी प्रॉब्लम है। स्कूल के रास्ते में एक शराब की दुकान भी है। हालांकि यह कोई बड़े मुद्दे नहीं है। शराब की दुकान बंद करवाई जा सकती है। स्कूल अप डाउन करने के लिए स्पेशल बस का इंतजाम किया जा सकता है और रही बात सामाजिक तत्वों की, तो उज्जैन पुलिस के डंडे में काफी दम है। इसलिए यह कोई स्थाई समस्या नहीं है, तत्काल ठीक की जा सकती हैं। सबसे बड़ी बात है कि, बात इतनी बड़ी क्यों हो गई। जब छात्रों के हित की बात की जा रही थी तो फिर छात्राओं ने विरोध प्रदर्शन क्यों किया। वीडियो में एक तरफ वह कह रही है कि क्या हमको पढ़ने का अधिकार नहीं है? दूसरी तरफ अच्छे स्कूल में जाने से मना भी कर रही हैं।
शिक्षकों ने आग में घी डाला, जिला शिक्षा अधिकारी ने भड़कने दिया
सब जानते हैं कि ऐसी परिस्थितियों में लोगों के मन और व्यवहार पर किसी दूसरे का नियंत्रण होता है। क्योंकि उनको पता नहीं होता, उनकी अज्ञानता, उनको किसी दूसरे व्यक्ति की बातों पर विश्वास करने के लिए मजबूर करती है। कुछ प्रश्न है जिनके आधार पर जांच की जानी चाहिए:-
- छात्राओं को यह सूचना किस प्रकार के शब्दों में और किस बॉडी लैंग्वेज के साथ सुनाई गई?
- जब छात्राओं ने स्कूल में अपने शिक्षकों और प्राचार्य से इस बारे में बात की तो उनको किस प्रकार से जवाब दिया गया?
- यह मामला जब जिला शिक्षा अधिकारी तक पहुंचा तो उनके शब्द और बॉडी लैंग्वेज क्या थी?
- क्या जिला शिक्षा अधिकारी ने सोशल मीडिया और जनसंपर्क के माध्यम से सांदीपनी स्कूल के फोटो वीडियो जनता तक पहुंचाए?
- क्या विरोध करने वाली छात्रों को पता है कि जिस स्कूल में उनका ट्रांसफर हुआ है, वह स्कूल, उज्जैन के सबसे बेस्ट प्राइवेट स्कूल से भी अच्छा है?
सवाल तो बनता है कि जो छात्राएं पढ़ना चाहती हैं, IAS, IPS, डॉक्टर, इंजीनियर और साइंटिस्ट बनना चाहती हैं, वह वर्ल्ड क्लास फैसिलिटी वाले स्कूल में जाने से मना क्यों कर रही है?
DEO पर डाउट क्यों है
आज प्रदर्शन के दौरान उज्जैन के पत्रकारों ने जब जिला शिक्षा अधिकारी श्री महेंद्र खत्री से पूछा तो उन्होंने कहा कि, "यह शासन का निर्णय है। स्कूलों से संबंधित प्रस्ताव शासन को भेजे गए थे। इस मामले में जिला स्तरीय मॉनिटरिंग समिति अंतिम निर्णय लेगी"। इस प्रकार जिला शिक्षा अधिकारी श्री महेंद्र खत्री ने मामले को शांत करने की कोशिश नहीं की बल्कि, भड़के हुए विद्यार्थियों और पेरेंट्स को शासन की तरफ मोड़ दिया। श्री महेंद्र खत्री ने अपने बयान से यह बताया कि मेरी कोई गलती नहीं है, जो भी गलती है सरकार की है। इसका दूसरा मतलब यह भी होता है कि कोई ना कोई गलती जरूर रही है।
इस प्रदर्शन को ई-अटेंडेंस से कैसे कनेक्ट कर सकते हैं
दरअसल, ई-अटेंडेंस एक बड़ा मुद्दा है। इसलिए नहीं है कि शिक्षकों को समय पर आना पड़ रहा है, बल्कि इसलिए है क्योंकि शिक्षकों को मोबाइल एप्लीकेशन ऑपरेट करना नहीं आता। यदि स्कूल में कोई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस लगी होती, और अटेंडेंस कलेक्ट करने की जिम्मेदारी प्राचार्य की होती, तो शिक्षकों को कोई प्रॉब्लम नहीं थी, लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग ने अटेंडेंस के लिए चार लाख शिक्षकों और लगभग अतिथि शिक्षकों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार कर दिया। जब शिक्षकों ने विरोध किया तो उनको समझने का प्रयास नहीं किया गया बल्कि सर्कुलर का डंडा चलाया। एक शिक्षक, जिसने मोबाइल एप्लीकेशन में बग ढूंढ कर निकाला, के खिलाफ तो FIR के आदेश दे दिए गए थे। जबकि टेक्नोलॉजी में ऐसे लोगों को इनाम दिया जाता है। इस कारण से 50% से अधिक शिक्षक, स्कूल शिक्षा विभाग से नाराज हैं।
उज्जैन में मौका मिला, एक चिंगारी दिखाई दी, तत्काल कंट्रोल किया जा सकता था लेकिन नहीं किया। स्कूल के स्टाफ से लेकर जिला शिक्षा अधिकारी तक, सब ने चिंगारी को भड़कने दिया, नतीजा, सरकार परेशान है और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहे हैं।

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