इंदौर, 14 अगस्त 2026: अभी तक कुछ भी साबित नहीं हुआ है, लेकिन लोकायुक्त की छापामार कार्रवाई में, भारत के नंबर वन नगर निगम इंदौर के एक अधिकारी के यहां उसकी निश्चित आय से 474% अधिक संपत्ति मिली है। अब तक के आंकड़ों के हिसाब से केवल यह कहा जा सकता है कि, कोई तो चमत्कार हुआ है जो अधिकारी की सैलरी घर में रखे-रखे 474% बढ़ गई।
नगर निगम इंदौर के ARO जितेन्द्र कुमार पांडेय कट ठिकानों पर लोकायुक्त का छापा
लोकायुक्त इंस्पेक्टर आशुतोष मिठास द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, नगर पालिक निगम इंदौर में पदस्थ सहायक राजस्व अधिकारी (ARO) जितेन्द्र कुमार पांडेय के ठिकानों पर यह छानबीन आज 14 अगस्त 2026 दिन शुक्रवार को सुबह शुरू हुई थी और शाम तक चली कार्रवाई में आय से अधिक संपत्ति के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं।
सुबह की कार्रवाई का विवरण:
सुबह लोकायुक्त की टीम ने जितेन्द्र पांडेय के आनंद नगर एक्सटेंशन (नवलखा) और गजाधर नगर स्थित निवास एवं छात्रावास पर एक साथ दबिश दी। शुरुआती जांच में अधिकारी के 31 वर्ष के सेवाकाल की अनुमानित आय 80 लाख रुपये की तुलना में लगभग 2.53 करोड़ रुपये का व्यय पाया गया था, जो उनकी वैध आय से 216.35 प्रतिशत अधिक था। उस समय उनकी पत्नी के नाम पर एक जी+3 भवन और एक छात्रावास के निर्माण की जानकारी प्रमुखता से सामने आई थी।
शाम तक की कार्रवाई में बड़ा खुलासा:
शाम तक चली सघन तलाशी के बाद अनुपातहीन संपत्ति का यह आंकड़ा बढ़कर 4,59,87,491/- रुपये (लगभग 4.6 करोड़) तक पहुंच गया है। लोकायुक्त की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक की जांच में पाई गई संपत्ति पांडेय की कुल आय की तुलना में 474.84 प्रतिशत अधिक है।
अब तक मिली संपत्ति का ब्योरा
- भूमि एवं भवन निर्माण: 1.20 करोड़ रुपये।
- स्वर्ण एवं रजत आभूषण: करीब 64.56 लाख रुपये।
- कृषि भूमि (ग्राम मुंडला दोस्दार): 1.279 हेक्टेयर और मुख्य मार्ग पर 13500 वर्ग फीट भूमि (कुल अनुमानित कीमत लगभग 1.12 करोड़ रुपये)।
- छात्रावास पर व्यय: करीब 92.56 लाख रुपये (निर्माण और सामान सहित)।
- नकद एवं बैंक बैलेंस: लगभग 9.65 लाख रुपये।
- घरेलू सामान की इन्वेंट्री: 60.23 लाख रुपये।
छानबीन अभी भी जारी:
यह कार्रवाई महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के निर्देश और एसपी राजेश सहाय के नेतृत्व में डीएसपी सुनील तालान, डीएसपी आनंद चौहान, निरीक्षक आशुतोष मिठास और निरीक्षक सचिन पटेरिया की टीम द्वारा की जा रही है। आरोपी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा 13(1) बी और 13(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। लोकायुक्त अधिकारियों का कहना है कि सर्च की कार्रवाई अभी भी जारी है, जिससे संपत्ति के आंकड़ों में और इजाफा होने की संभावना है।

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