भोपाल, 14 अगस्त 2026: राजधानी के व्यस्ततम पॉलिटेक्निक चौराहे पर स्थित क्लॉक टॉवर लंबे समय से शहर की पहचान और आधुनिक सौंदर्य का प्रतीक माना जा रहा है। लेकिन वर्तमान में यह घड़ी पूरी तरह जर्जर हालत में पहुंच चुकी है और बंद पड़ी हुई है। भोपाल के लोकप्रिय फोटोग्राफर अर्जुन शर्मा ने हाल ही में इसकी तस्वीर साझा करते हुए कहा है कि यह क्लॉक टॉवर शहर की पहचान है, पर अब यह पूरी तरह बंद और जर्जर स्थिति में है।
डिजिटल क्लॉक टॉवर भोपाल की शोभा बढ़ाने स्थापित किया था
यह डिजिटल क्लॉक टॉवर फरवरी 2025 में भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) के दौरान शहर की शोभा बढ़ाने के लिए स्थापित किया गया था। समिट के दौरान शहर के प्रमुख स्थानों को सजाने-संवारने के अभियान के तहत पॉलिटेक्निक चौराहे (जो मुख्यमंत्री आवास के पास स्थित है) पर चारों दिशाओं में डिजिटल घड़ियां लगाई गईं। उद्देश्य था कि यह टॉवर शहर की आधुनिक पहचान बने और राहगीरों को सही समय बताए।
वायरल हुआ ‘टाइम-ट्रैवलिंग’ घड़ी का मामला
स्थापना के कुछ महीनों बाद ही जून 2025 में यह क्लॉक टॉवर सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। चारों तरफ लगी घड़ियां अलग-अलग समय दिखा रही थीं। एक तरफ सही समय, दूसरी तरफ 6-7 मिनट का अंतर, जबकि एक तरफ घड़ी पूरी तरह बंद पड़ी हुई थी। लोगों ने इसे ‘टाइम-ट्रैवलिंग क्लॉक टॉवर’ और ‘भोपाल का नौवां अजूबा’ कहकर मजाक उड़ाया। कांग्रेस समेत कई लोगों ने इसे 90 डिग्री वाले विवादित फ्लाईओवर से जोड़ते हुए प्रशासन और इंजीनियरों पर सवाल उठाए।
उस समय भी नगर निगम और प्रशासन से इसकी मरम्मत की मांग उठी थी, लेकिन समस्या जल्दी हल नहीं हो सकी। अब लगभग डेढ़ साल बाद अर्जुन शर्मा जैसी आवाजें बता रही हैं कि स्थिति और बिगड़ गई है, घड़ी पूरी तरह बंद और ढांचा जर्जर हो चुका है।
संचालन की जिम्मेदारी किसकी?
इस क्लॉक टॉवर का संचालन और रखरखाव भोपाल नगर निगम (BMC) तथा संबंधित शहरी विकास एजेंसियों के अंतर्गत आता है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान शहर के सौंदर्यीकरण के कार्यों में नगर निगम और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं की भूमिका प्रमुख रही। चौराहे पर पहले भी टॉवर संबंधी घटनाओं (जैसे व्यक्ति के चढ़ने) में नगर निगम की टीमें सक्रिय रही हैं। नागरिकों का कहना है कि नगर निगम को इस पर तुरंत ध्यान देना चाहिए, ताकि शहर की पहचान का मजाक न बने।
अर्जुन शर्मा की तस्वीर और बयान ने एक बार फिर इस मुद्दे को उजागर किया है। शहरवासी उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन जल्द ही इस क्लॉक टॉवर की मरम्मत कराए, ताकि यह सही समय बताते हुए भोपाल की वास्तविक पहचान के रूप में फिर से चमक सके। अन्यथा, यह आधुनिक शहर के ‘अजूबों’ की सूची में एक और अध्याय जोड़ता रहेगा।

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