भोपाल, 13 अगस्त 2026: मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण समिति ने प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर परिवीक्षा अवधि (Probation Period) और वेतनमान व्यवस्था में संशोधन की मांग की है। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने यह सिस्टम लागू कर दिया था जिसे हाई कोर्ट ने गलत बता दिया है।
प्रमुख मांगें और वर्तमान स्थिति
समिति के अध्यक्ष रमेश चंद्र शर्मा द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में अनुरोध किया गया है कि वर्ष 2019 के बाद MPESB (मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल) के माध्यम से सीधी भर्ती से नियुक्त तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के लिए 3 वर्ष की परिवीक्षा अवधि को घटाकर पुनः पूर्ववत 2 वर्ष किया जाए। इसके अतिरिक्त, पत्र में वर्तमान 'स्टाइपेंड' व्यवस्था को समाप्त कर नियुक्ति दिनांक से ही 100 प्रतिशत वेतन निर्धारण और पूर्व में की गई कटौती का बकाया (Arrears) भुगतान करने का भी आग्रह किया गया है।
पुरानी व्यवस्था और विवाद का कारण
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के निर्देश पर सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 12 दिसंबर 2019 को एक परिपत्र जारी किया गया था। इस नियम के तहत सीधी भर्ती के पदों पर चयन होने पर 3 वर्ष की परिवीक्षा अवधि का प्रावधान किया गया था, जिसमें कर्मचारियों को:
प्रथम वर्ष: न्यूनतम वेतनमान का 70 प्रतिशत
द्वितीय वर्ष: न्यूनतम वेतनमान का 80 प्रतिशत
तृतीय वर्ष: न्यूनतम वेतनमान का 90 प्रतिशत राशि स्टाइपेंड के रूप में दी जाती है।
माननीय उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप
समिति ने अपने पत्र में माननीय उच्च न्यायालय, जबलपुर द्वारा दिए गए विभिन्न आदेशों (दिनांक 06.01.2026 और 28.04.2025) का भी हवाला दिया है। न्यायालय ने याचिका क्रमांक WP No. 13195/2023 और रिट अपील WA No. 1498/2024 के मामलों में स्पष्ट किया है कि, परिवीक्षा अवधि के दौरान भी कर्मचारियों को 100 प्रतिशत न्यूनतम वेतनमान देय होगा। यदि वेतन में किसी भी प्रकार की कटौती की गई है, तो उसका एरियर सहित भुगतान करना अनिवार्य है।
मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण समिति ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि न्यायालय के आदेशों के आलोक में वर्ष 2019 के पश्चात नियुक्त शासकीय सेवकों के लिए 2 वर्ष की परिवीक्षा अवधि और नियुक्ति दिनांक से पूर्ण वेतन प्रदाय करने हेतु संबंधितों को निर्देशित करने की कृपा करें। इस कदम से हजारों नव-नियुक्त कर्मचारियों को वित्तीय लाभ मिलने की उम्मीद है।

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