कटनी, 2 अगस्त 2026: लोगों ने आजादी का मतलब पता नहीं क्या समझ रखा है। यहां एक युवा सरकारी शिक्षक, कॉकरोच जनता पार्टी में शामिल हो गया, सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया, स्कूल शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का खुला आरोप लगाया और जब डिपार्टमेंट ने सस्पेंड किया तो हंगामा करने लगा। गालियां देने लगा। हाथापाई करने लगा। यहां तक की पुलिस पार्टी से उलझ गया। पढ़िए, कटनी में क्या हुआ और इस पूरे घटनाक्रम में क्या सही था, क्या गलत था?
स्कूल शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए
पूरा मामला 25 जुलाई को कटनी के फॉरेस्टर ग्राउंड में हुए CJP के प्रदर्शन से जुड़ा है। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बिलहरी में प्राथमिक शिक्षक (विज्ञान) के पद पर पदस्थ वरुण नायक भी इसमें शामिल हुए थे। प्रदर्शन के बाद उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके स्कूल से लेकर तहसील और जिला स्तर तक BEO और DEO स्तर पर भ्रष्टाचार और नकल की व्यवस्था फिक्स है। 11वीं और 12वीं के कई छात्र 'Result' और 'Pass' जैसे सामान्य अंग्रेजी शब्दों की स्पेलिंग तक नहीं लिख पाते, फिर भी उन्हें पास किया जा रहा है।
वीडियो वायरल होने के तीन दिन बाद किया गया निलंबित
वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने 28 जुलाई 2026 को वरुण नायक के निलंबन का आदेश जारी किया। 30 जुलाई की सुबह करीब 11:40 बजे वरुण नायक शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बिलहरी पहुंचे। इसके बाद स्कूल परिसर में विवाद शुरू हो गया।
निलंबन आदेश फाड़ा, वरिष्ठ महिला शिक्षक को बाल पड़कर घसीटा, गंदी गालियां दी
प्रभारी प्राचार्य देवेंद्र कुमार तिवारी (55) ने पुलिस में शिकायत की, कि निलंबन आदेश सौंपते ही वरुण नायक ने उसे फाड़ दिया। गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। प्राचार्य की शिकायत के अनुसार, वरुण नायक ने अपने निलंबन के लिए पूर्व प्राचार्य रेखा तिवारी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने रेखा तिवारी के बाल पकड़कर घसीटा, थप्पड़ मारा और जमीन पर गिरा दिया। घटना के दौरान स्कूल के अन्य कर्मचारियों ने बीच-बचाव किया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान बेहद गंदी गालियां देता रहा।
पुलिस टीम से भी हाथापाई
स्कूल में विवाद की सूचना मिलने पर बिलहरी चौकी से पुलिस टीम मौके पर पहुंची। टीम में राम सिंह, व्यास गुप्ता और सौरभ जैन शामिल थे। पुलिस के मुताबिक, मौके पर भी वरुण नायक शांत नहीं हुए और पुलिसकर्मियों से हाथापाई की। एक पुलिसकर्मी को भी चोट आई।
मां की मौत पर अनुकंपा नियुक्ति मिली
वरुण नायक मुंबई में 50,000 रुपए महीने के वेतन पर इंजीनियर के रूप में कार्य कर रहे थे। उन्होंने यह नौकरी छोड़ने के बाद इंदौर में कुछ समय तक UPSC की तैयारी भी की। वरुण नायक की मां बिलहरी विद्यालय में शिक्षक के पद पर कार्यरत थीं। 2021 में उनकी मौत होने के बाद वरुण को अनुकंपा नियुक्ति मिली थी।
शिक्षक बोले- आवाज उठाई, इसलिए कार्रवाई हुई
वरुण नायक का कहना है कि उन्होंने शिक्षा नीतियों, स्कूलों में नकल व्यवस्था और कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई थी। इसी वजह से उन्हें निशाना बनाया गया। पहले निलंबित किया गया, फिर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।
DEO बोले- नियमानुसार कार्रवाई की गई
जिला शिक्षा अधिकारी एसएन पांडे ने बताया कि प्राचार्य की शिकायत पर और अनुशासनहीनता को दृष्टिगत रखते हुए निलंबन की कार्रवाई नियमानुसार की गई है। पूर्व प्राचार्य रेखा तिवारी के चेहरे पर चोट आई है। डॉक्टर ने उन्हें कमर का एक्स-रे कराने की सलाह दी है।
पुलिस ने गिरफ्तार किया, कोर्ट ने जेल भेजा
चौकी प्रभारी बिलहरी (उप-निरीक्षक) सुयश पाण्डेय ने बताया कि स्कूल में विवाद की सूचना मिलने पर टीम मौके पर भेजी गई थी। वहां आरोपी शिक्षक हंगामा कर रहे थे। रोकने पर उन्होंने पुलिसकर्मियों से हाथापाई की।प्रभारी प्राचार्य देवेंद्र कुमार तिवारी की शिकायत पर वरुण नायक के खिलाफ FIR दर्ज की गई। पुलिस ने उन पर शासकीय दस्तावेज फाड़ने, मारपीट, गाली-गलौज, शासकीय कार्य में बाधा डालने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए। गिरफ्तारी के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से कोर्ट ने जेल भेज दिया है।
शिक्षक के साथ गलत हुआ या सही
मध्य प्रदेश में सरकारी शिक्षकों के लिए Madhya Pradesh Civil Services (Classification, Control and Appeal) Rules, 1966 लागू है। इसका मतलब होता है कि मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के पास, आम नागरिक के जितनी आजादी नहीं है। उसकी निजी जीवन में भी अनुशासन में रहना होता है। वह किसी भी पॉलीटिकल गतिविधियों में शामिल नहीं हो सकता। जैसे उसने सरकारी सिस्टम में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया, इस प्रकार का आप एक कर्मचारी नहीं लग सकता। यदि वह ऐसा करता है तो उसको मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के तहत सस्पेंड कर दिया जाएगा और उसके खिलाफ विभागीय जांच की जाएगी। वरुण नायक के साथ यही किया गया था। भारत में सरकारी कर्मचारियों के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार यदि उन्हें राजनीति करनी है तो अपने पद से इस्तीफा देना होता है। यही कारण है कि सरकारी कर्मचारी चुनाव लड़ने से पहले, इस्तीफा देते हैं और जब उनका इस्तीफा स्वीकार हो जाता है, तभी चुनाव लड़ पाए हैं।
तो क्या कोई कर्मचारी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज नहीं उठा सकता
बिल्कुल उठा सकता है। यदि उसने सरकारी सिस्टम में कोई गलती पकड़ ली है, यदि कहीं कोई भ्रष्टाचार हो रहा है और उसके पास पर्याप्त प्रमाण है तो वह भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत कर सकता है। ऐसी स्थिति में उसको व्हिसल ब्लोअर कहा जाएगा, और सरकारी संरक्षण भी मिलेगा, लेकिन ऐसे किसी मामले को मुद्दा बनाकर नेतागिरी नहीं कर सकता। मध्य प्रदेश के व्यापम घोटाले में कई सरकारी कर्मचारियों ने घोटाले के सबूत पेश किए थे, उनकी शिकायतों पर कार्रवाई भी हुई थी।

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