भोपाल, 05 अगस्त 2026: मध्यप्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में जनभागीदारी निधि से कार्यरत तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों और समस्याओं के निराकरण हेतु सरकार के समक्ष अपनी आवाज उठाई है। 'मध्यप्रदेश शासकीय महाविद्यालयीन जनभागीदारी कर्मचारी संघ' ने मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान 2026 के परिप्रेक्ष्य में उच्च शिक्षा विभाग के अवर सचिव श्री आर.के. यादव को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है।
माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के बाद स्थायीकर्मी दर्जे की मांग
ज्ञापन में बताया गया है कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा 05 अक्टूबर 2023 को जनभागीदारी कर्मचारियों को स्थायीकर्मी श्रेणी प्रदान करने का आदेश जारी किया गया था, जिसका पालन अधिकांश महाविद्यालयों में किया जा रहा था। हालांकि, विभाग ने बाद में 24 अक्टूबर 2025 को इस आदेश को निरस्त कर दिया। इसके विरुद्ध कर्मचारियों ने माननीय उच्च न्यायालय ग्वालियर की शरण ली, जहाँ न्यायालय ने (WP 42395/2025) दिनांक 30-06-2026 को विभाग के निरस्तीकरण आदेश को ही रद्द कर दिया है। अब संघ की प्रमुख मांग है कि न्यायालय के इस आदेश के अनुपालन में एक माह के भीतर सभी महाविद्यालय प्राचार्यों को पुनः स्थायीकर्मी आदेश जारी करने हेतु निर्देशित किया जाए।
शोषण और वित्तीय विसंगतियों का आरोप
कर्मचारियों का आरोप है कि महाविद्यालयों में कंप्यूटर ऑपरेटर, माली, चौकीदार और भृत्य जैसे पदों पर कार्यरत स्टाफ को निर्धारित कलेक्टर दर पर पारिश्रमिक नहीं दिया जा रहा है, जिससे उनका आर्थिक शोषण हो रहा है। ज्ञापन के अनुसार, प्रदेश के अधिकांश महाविद्यालयों में कर्मचारियों की ईपीएफ (EPF) कटौती भी नहीं की जा रही है। ईपीएफ कटौती न होने की वजह से कई कॉलेजों पर कानूनी मामले दर्ज हुए हैं और जनभागीदारी खातों से लाखों रुपये डेबिट किए जा चुके हैं, जिसके लिए विभाग ने अब तक किसी की जवाबदेही तय नहीं की है।
अवकाश और प्रशासनिक संवाद की कमी
संघ ने मांग की है कि जिस प्रकार स्कूल शिक्षा विभाग के अतिथि शिक्षकों और उच्च शिक्षा विभाग के अतिथि विद्वानों को आकस्मिक अवकाश (CL) और ऐच्छिक अवकाश (OL) की सुविधा दी जाती है, वैसी ही पात्रता जनभागीदारी कर्मचारियों को भी मिलनी चाहिए। इसके अलावा, उनकी समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए विभागीय वेबसाइट पर एक विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (OSD) नियुक्त करने और उनकी ईमेल आईडी सार्वजनिक करने की भी मांग की गई है ताकि संघ सीधे संवाद कर सके।
एक माह का अल्टीमेटम
प्रदेश मीडिया प्रभारी हितेश गुरगेला ने स्पष्ट किया कि संघ की ये चारों मांगें जायज हैं और सामान्य प्रशासन विभाग के नियमों के अनुकूल हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि एक माह के भीतर इन मांगों पर संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो प्रदेश स्तर पर चरणबद्ध तरीके से आंदोलन किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी उच्च शिक्षा विभाग की होगी। इस ज्ञापन की प्रतियां मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री और प्रमुख सचिव को भी प्रेषित की गई हैं।

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