भोपाल, 6 अगस्त 2026: कैबिनेट मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह के नेतृत्व वाले स्कूल शिक्षा विभाग के खिलाफ सबसे ज्यादा आंदोलन और विरोध प्रदर्शन होते हैं। 7 अगस्त से फिर एक नया आंदोलन शुरू होने जा रहा है। प्राथमिक शिक्षक भर्ती परीक्षा 2025 के बाद मनमाने तरीके से योग्यता के नियम बदलने के खिलाफ अभ्यर्थियों द्वारा DPI के सामने लगातार तीन दिन तक धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
प्राथमिक शिक्षक भर्ती परीक्षा 2025 में क्या गड़बड़ी हो गई
अभ्यर्थियों का कहना है कि जब उन्होंने फॉर्म भरा था तो फॉर्म के क्लॉज़ 49 में स्पष्ट लिखा था कि "इस परीक्षा में भाग लेने वाले जो आवेदक निर्धारित शैक्षणिक योग्यता अर्जित करने की परीक्षा के अंतिम वर्ष में हैं ,वे भी परीक्षा में बैठने के लिए मान्य होंगे।ऐसे आवेदकों को उस तिथि को अंकसूची /उपाधि धारित किया जाना अनिवार्य होगा जिस तिथि को उनके परीक्षण हेतु शैक्षणिक योग्यता के प्रमाण पत्र मांगें जाएंगे"
ESB द्वारा जारी प्राथमिक शिक्षक भर्ती 2025 की रुलबूक के अध्याय 1 के क्लॉज़ 3 में स्पष्ट लिखा है- आवेदन पत्र कर्मचारी चयन मंडल भोपाल और विभाग के निर्देशानुसार होगा।इस आधार पर आवेदन फॉर्म में लिखा क्लॉज़ 49 वैध है।
इसी नियम के आधार पर, जो उनके आवेदन फॉर्म में लिखा था ,हजारों अभ्यर्थियों ने अन्तिम वर्ष में अध्ययनरत रहते हुए इस परीक्षा में बैठे और मेरिट में भी आये ।लेकिन जब डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के समय आया तो विभाग ने नियम ही बदल दिए ,विभाग द्वारा 17 जुलाई 2026 को निकाले गए आदेश के क्लॉज़ 9.3 में कहा गया कि आवेदकों की अंतिम वर्ष की अंकसूची/उपाधि की तिथि फॉर्म भरने की अंतिम दिनांक 25 अगस्त 2025 होनी चाहिए।
बता दें ,वर्ग 1 और वर्ग 2 की भर्ती में भी यही नियम है कि अभ्यर्थी अंतिम वर्ष में अध्ययनरत होते हुए फॉर्म भर सकता है ,परीक्षा दे सकता है।और डॉक्युमनेट वेरिफिकेशन की डेट को ही अभ्यर्थी के पास उसकी डिग्री पूर्ण होना विभाग वैध मानता है ना कि फॉर्म भरने की अंतिम तिथि को।
इसी प्रकार की स्थिति ट्राइबल विभाग की वर्ग 1 (2023) की भर्ती में बनी थी ,जहां ट्राइबल विभाग ने 9 अगस्त 2024 को आदेश निकाला कि अभ्यर्थी को फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 27.01.2023 तक अभ्यर्थी को परीक्षा अंकसूची /उपाधि धारित किया जाना अनिवार्य होगा ना कि सत्यापन हेतु उपस्थिति दिनांक तक।ये नियम आधिकारिक नियम पुस्तिका के विपरीत था ,अभ्यर्थियों के विरोध के बाद ये नियम जो कि अवैध था ,बाद में हटा लिया गया।
D.Y.चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली 5 सदस्यीय संविधान पीठ ने प्रकाश पाठक एवं अन्य बनाम राजस्थान हाइकोर्ट वाद 2024 में निर्णय दिया कि सरकारी नोकरी के भर्ती के नियम बीच में बदले नहीं जा सकते।माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने के. मंजुश्री बनाम आंध्र प्रदेश राज्य वाद में स्पष्ट रूप से कहा है कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयन या पात्रता के मानदंडों को बदला नहीं जा सकता, क्योंकि ऐसा करना खेल खेले जाने के बाद उसके नियमों को बदलने के समान होगा, जो कानूनन अस्वीकार्य है।
मध्यप्रदेश हाइकोर्ट भी भर्ती से जुड़े एक मामले में कह चुका है कि बीच भर्ती में नियम नहीं बदले जा सकते।
विभाग और ESB के बीच आपसी सामंजस्य में कमी का खामियाज़ा अभ्यर्थियों को भुगतना पड़ता है।क्या विभाग के अधिकारियों के लिए इतना मुश्किल है एक स्पष्ट और सही नियम पुस्तिका बनाना जिससे अभ्यथियों को परेशानी ना हो ,हर स्तर पर नियम सुस्पष्ट हो और भर्तियां न्यायालय में ना उलझे।

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