धर्म एवं ज्योतिष न्यूज डेस्क, 29 अगस्त 2026: इस वर्ष का धार्मिक कैलेंडर (Calendar) हमारे लिए अत्यंत स्पेशल और आनंददायी सिद्ध होने वाला है। धर्म और ज्योतिष शास्त्र के दृष्टिकोण से एक महादुर्लभ एस्ट्रोलॉजिकल योग बनने जा रहा है। आगामी 4 सितंबर को संपूर्ण राष्ट्र में भगवान श्रीकृष्ण का पावन जन्मोत्सव (जन्माष्टमी) परम हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।
द्वापर युग का अलौकिक पुनरावर्तन
प्रिय आत्मन्! ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस वर्ष पूरे 15 वर्षों के लंबे अंतराल (Gap) के बाद एक ऐसा अलौकिक संयोग बन रहा है, जहाँ भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के दुर्लभ मिलन में संपन्न होगा। हमारे आदरणीय ज्योतिषाचार्य पंडित राधेश्याम जी ने इस दिव्य तथ्य को कन्फर्म (Confirm) किया है कि द्वापर युग में जब भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य हुआ था, तब भी अर्धरात्रि के समय यही दिव्य 'अष्टमी तिथि' और 'रोहिणी नक्षत्र' विद्यमान थे। इस वर्ष भी ठीक वैसा ही योग बन रहा है।
मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र और वृष के चंद्रमा का महासंयोग
शास्त्रों में कहा गया है: “भाद्रपदे कृष्णपक्षे अष्टमी-रोहिणीयुता। अर्धरात्रे तु संयोगः प्रशस्तः परिकीर्तितः॥” ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जन्माष्टमी की अर्धरात्रि में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का एक साथ उपस्थित होना अनंत गुणा फलदायी माना जाता है। कई वर्षों के इतिहास में ऐसा देखा गया है कि भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर चन्द्रमा वृष राशि में तो संचरण करते हैं, परंतु रोहिणी नक्षत्र का कनेक्शन (Connection) स्थापित नहीं हो पाता। किंतु इस वर्ष प्रभु की असीम अनुकम्पा से सभी मुख्य एस्ट्रोलॉजिकल एलीमेंट्स (Astrological elements) और ग्रह-नक्षत्र एक ही समय पर एक साथ उपस्थित हो रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसे दिव्य संयोग में की गई श्रीहरि की पूजा, कोटि-कोटि पुण्य प्रदान करने वाली और जीवन को मंगलमय बनाने वाली होती है।
संप्रदायों का महामिलन और एकरूपता
रामानंदी संप्रदाय में प्रभु के जन्मोत्सव हेतु रोहिणी नक्षत्र को अत्यंत इम्पॉर्टेंट स्थान और सर्वोच्च इम्पॉर्टेंस दी जाती है। हर्ष का विषय यह है कि इस बार वैष्णव, रामानंदी और देश के सभी प्रमुख संप्रदायों के संतों ने सर्वसम्मति से 4 सितंबर की तिथि को ही जन्मोत्सव हेतु स्वीकार किया है। संपूर्ण देश में एक ही दिन यह भव्य सेलिब्रेशन संपन्न होगा, जो हमारी सांस्कृतिक एकता का अनुपम उदाहरण है।
अतः हे धर्मानुरागियों! इस महासंयोग की पावन बेला में व्रत, पूजन और कीर्तन द्वारा भगवान श्रीकृष्ण की आराधना करें और अपने जीवन को धन्य बनाएं।
शुभमस्तु! कल्याणमस्तु! — श्यामला ज्योतिष पीठ, भोपाल

