सरकारी शिक्षकों की पात्रता परीक्षा को लेकर शिक्षा मंत्री और आयुक्त के आश्वासन

Updesh Awasthee
भोपाल, 24 अगस्त 2026:
मध्य प्रदेश के अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने आज मध्य प्रदेश सरकार के स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह और लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त श्री अभिषेक सिंह से मुलाकात की और सरकारी शिक्षकों की पात्रता परीक्षा को लेकर अपनी मांगों पर चर्चा की। उनकी कई मांगों पर आश्वासन मिला है जबकि कुछ मांगों को या तो रिजेक्ट कर दिया गया या फिर अनसुना कर दिया गया। हम यहां पर आपको पॉइंट टू पॉइंट बता रहे हैं:- 

स्कूल शिक्षा मंत्री द्वारा दिए गए आश्वासन:

मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने शिक्षक मोर्चा के प्रस्तावों पर विभाग और कर्मचारी चयन मंडल से चर्चा करके इसका विधिसम्मत (कानून सम्मत) हल निकालने का आश्वासन दिया है। शिक्षक संगठन चाहते हैं, इस चर्चा के पूरा होने तक परीक्षा की प्रक्रिया को स्थगित रखा जाए।
शिक्षकों की मांग थी कि पात्रता परीक्षा के दायरे में आने वाले शिक्षकों की सूची पहले जारी की जाए। इस पर मंत्री ने बताया कि वर्ष 2005 और 2008 में परीक्षा पास करने वालों को राहत देने के लिए लोक शिक्षण आयुक्त खुद सुप्रीम कोर्ट में अपील कर रहे हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद ही पात्रता परीक्षा के लिए योग्य शिक्षकों की सूची जारी की जाएगी। 

आयुक्त लोक शिक्षण द्वारा दिए गए आश्वासन:

आयुक्त श्री अभिषेक सिंह ने मुलाकात के दौरान स्पष्ट रूप से शिक्षकों को तनाव न लेने और प्रसन्न मन से अपने दायित्वों को निभाने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि विभाग को अपने शिक्षकों के हितों की पूरी चिंता है।
परीक्षा के दौरान जिन शिक्षकों को लेखक की आवश्यकता होगी, उन्हें लेखक उपलब्ध कराने की मांग पर आयुक्त ने ऐसी व्यावहारिक दिक्कतों का समाधान करने का आश्वासन दिया जो शिक्षकों के हित में हैं।
शिक्षकों की मांग थी कि परीक्षा केंद्र तहसील या जिला स्तर पर होने चाहिए। इस पर आयुक्त ने आश्वस्त किया कि वे परीक्षा केंद्र (सेंटर) बढ़ाने की इस मांग को कर्मचारी चयन मंडल तक पहुंचा देंगे।

रिजेक्ट की गई मांगें या जिन पर कोई सीधा आश्वासन नहीं मिला:

विषय और पाठ्यक्रम (Syllabus) में बदलाव की मांग (पूरी तरह रिजेक्ट): प्रतिनिधिमंडल ने पात्रता परीक्षा के विषय और उसके पाठ्यक्रम को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी, लेकिन स्कूल शिक्षा मंत्री ने इसमें बदलाव करने से साफ मना कर दिया।
ऑनलाइन और ऑफलाइन परीक्षा का विकल्प (कोई सीधा आश्वासन नहीं): शिक्षकों ने मांग की थी कि परीक्षा ऑफलाइन होगी या ऑनलाइन, इसका विकल्प शिक्षकों के पास होना चाहिए। इस मांग पर कोई सीधा या ठोस आश्वासन नहीं दिया गया है, केवल मंत्री द्वारा कर्मचारी चयन मंडल से समग्र चर्चा करने की बात कही गई है।
वर्ष 2005 से भर्ती शिक्षकों को परीक्षा से मुक्त रखना (आश्वासन नहीं, कोर्ट के अधीन): मोर्चा की मांग थी कि वर्ष 2005 से परीक्षा देकर भर्ती हो रहे शिक्षकों को इस पात्रता परीक्षा से मुक्त रखा जाए। इस पर कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला है; बल्कि इसे सुप्रीम कोर्ट के आने वाले फैसले पर छोड़ दिया गया है कि कोर्ट राहत देता है या नहीं।

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