भोपाल, 27 अगस्त 2026: 1998 में शिक्षाकर्मी भर्ती करके मध्य प्रदेश की वर्तमान स्कूल शिक्षा स्थिति के जनक श्री दिग्विजय सिंह, जब शिक्षक भर्ती परीक्षा 2023 वर्ग 1 के अभ्यर्थियों के प्रोटेस्ट में शामिल हुए तो अजीब सी स्थिति बन गई। कुछ अभ्यर्थियों ने नौकरी के लालच में उनका स्वागत किया तो कुछ लोगों का मानना था कि दिग्विजय सिंह के आ जाने से प्रोटेस्ट का पूरा मीनिंग ही चेंज हो जाएगा। इस प्रोटेस्ट में दिग्विजय सिंह के सामने चुनौती पूर्ण स्थिति थी। उन्होंने गारंटी दी है कि वह अगले चुनाव से पहले इन अभ्यर्थियों की मांग पूरी करवाएंगे।
दरअसल, भोपाल में हमेशा की तरह इस बार भी कांग्रेस के नेता पीसी शर्मा एक्टिव हैं। वह सरकार के खिलाफ होने वाले हर प्रोटेस्ट में शामिल होते हैं। शिक्षक भर्ती परीक्षा 2023 वर्ग 1 के अभ्यर्थियों के प्रोटेस्ट में भी शामिल हुए थे, और अब तो कहा जा रहा है कि, इस प्रोटेस्ट के लिए कैश फंडिंग भी उन्होंने किया है। श्री दिग्विजय सिंह सामान्य तौर पर इस प्रकार के आंदोलन में शामिल नहीं होते। 2003 में शिक्षक समुदाय ने उनके खिलाफ एक तरफा प्रचार किया था। 2003 के चुनाव में दिग्विजय सिंह की पराजय का एक बड़ा कारण शिक्षक समुदाय था। परंपरागत रूप से मध्य प्रदेश का शिक्षक समुदाय, दिग्विजय सिंह को अपने कार्यक्रमों में आमंत्रित तक नहीं करता, और दिग्विजय सिंह भी जाना पसंद नहीं करते, परंतु इस बार बात बदली हुई थी दिखाई दी।
दिग्विजय सिंह के हाथ से कई बार माइक छीना गया
जंतर मंतर दिल्ली में हुए Gen Z प्रोटेस्ट के बाद राजनीति के सारे उम्रदराज बालकों को समझ में आ गया है कि, एक्सपीरियंस और सीनियरिटी के आधार पर काम नहीं चलेगा। फील्ड में पब्लिक के बीच जाना पड़ेगा। अब दिग्विजय सिंह, उन लोगों के बीच तो जा नहीं सकते, इसलिए ऐसे लोगों के बीच गए, जिनका जन्म 1998 के बाद हुआ है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि दिग्विजय सिंह के आते ही, जबरदस्त नारेबाजी की कोशिश की गई, परंतु उसको बुलंद आवाज नहीं मिली। प्रोटेस्ट साइट पर दिग्विजय सिंह एक बार में अपना भाषण भी पूरा नहीं दे पाए। 80 साल की उम्र में लड़कपन करने की कोशिश करते रहे। एक कैंडिडेट तो माइक पर भिड़ गया।
सत्ता में आने से पहले ही मांगें पूरी कराएंगे: दिग्विजय सिंह
उसने पूछा कि अगर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होता है और आपकी सरकार बनती है तो.. युवक अपनी बात पूरी करता, इससे पहले ही दिग्विजय सिंह ने उसे टोक दिया। बोले- सत्ता परिवर्तन की अभी बात ही मत करो। अभी सिर्फ इस आंदोलन की बात करो। हालांकि युवक भी अड़ गया और उसने अपना सवाल पूरा किया। उसने पूछा कि अगर आप सत्ता में आएंगे तो युवाओं की मांगें पूरी करेंगे या नहीं? इस पर दिग्विजय सिंह ने कहा- सत्ता में आने से पहले ही मांगें पूरी कराएंगे। अभी तुम बैठ जाओ।
राजा साहब नहीं, दिग्विजय सिंह कहो
इधर, एक मौके पर पूर्व मंत्री पीसी शर्मा बीच में खड़े हो गए और दिग्विजय सिंह से माइक लेकर उनके शासनकाल की तारीफ करने लगे। इस दौरान पीसी शर्मा ने उन्हें 'राजा साहब' कहकर संबोधित किया तो दिग्विजय सिंह ने उन्हें भी टोक दिया। बोले- राजा साहब नहीं, दिग्विजय सिंह कहो।
भूख हड़ताल का ऐलान करते दिग्विजय सिंह की जुबान लड़खड़ाई
2003 में दिग्विजय सिंह चुनाव हार गए थे, तब से कांग्रेस पार्टी मध्य प्रदेश में विपक्ष की एकमात्र और सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन दिग्विजय सिंह सहित कांग्रेस के किसी भी नेता ने कभी कोई लंबी भूख हड़ताल नहीं की। उनके लिए हर आंदोलन एक इवेंट होता है, थोड़ी देर के लिए शामिल होते हैं और वापस चले जाते हैं। श्री कमलनाथ तो आंदोलनकारी को ऐसे रवाना करते थे, जैसे किसी रैली को झंडा दिखा रहे हों। स्वयंभू सीएम कैंडिडेट श्री जीतू पटवारी भी भूख हड़ताल करना पसंद नहीं करते। कहो तो अलीराजपुर से सिंगरौली तक साइकिल चला लेंगे, लेकिन आमरण अनशन... ना बाबा ना।
ऐसी स्थिति में जब दिग्विजय सिंह कैंडिडेट्स के सवालों के बीच में फंस गए। अभ्यर्थियों के सवालों का सीधा मतलब था कि, आंदोलन में शामिल होने आए हो या फिर पॉलिटिक्स करने आए हो। तो दिग्विजय सिंह को 24 घंटे के उपवास का ऐलान करना ही पड़ा। वीडियो को ध्यान से देखिए, भूख हड़ताल कहते समय उनकी जुबान लड़खड़ा गई थी।
दिग्विजय सिंह के कारण प्रोटेस्ट का रंग बदल गया
दिग्विजय सिंह के पहुंच जाने के कारण प्रोटेस्ट का पूरा रंग ही बदल गया। पब्लिक में कई लोग कैंडीडेट्स का सपोर्ट कर रहे थे परंतु जब उन्होंने दिग्विजय सिंह के नेतृत्व को स्वीकार कर लिया तो पब्लिक का सपोर्ट भी थोड़ा काम हो गया। सोशल मीडिया पर कैंडीडेट्स भी अनजाने में, आग में घी डाल रहे हैं। बोल रहे हैं कि हमको नहीं पता दिग्विजय सिंह का शासन काल कैसा था। जो नौकरी दिलाने में हमको मदद करेगा, वही हमारा नेता है। मतलब यदि हिटलर इनको नौकरी दे दे, तो इनके हिसाब से हिटलर इनका नेता है। सवाल उठता है कि फिर पब्लिक ऐसे लोगों को सपोर्ट क्यों करें।


