भोपाल, 6 अगस्त 2026: बात यह है कि, जिसकी बात होती है उसकी बात बन जाती है और जो बात नहीं कर पता, उसकी बात रह जाती है। दतिया में कांग्रेस पार्टी की जीत के बाद क्रेडिट की लड़ाई में कुछ ऐसा ही हो रहा है। दतिया विधानसभा में कांग्रेस को सबसे ज्यादा वोट दिलवाने वाले नेता का नाम बैजनाथ कुशवाह है लेकिन क्रेडिट दिग्विजय सिंह के सुपुत्र जयवर्धन सिंह को दिया जा रहा है। कारण: कुशवाह ने केवल काम किया, जबकि जयवर्धन सिंह में मीडिया के लिए काफी पोटेंशियल है।
कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और 3 अगस्त के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं के स्वीकार्य नेता श्री जीतू पटवारी ने यह चुनाव न केवल रणनीति पूर्वक लड़ा बल्कि इस चुनाव में पार्टी की ओर से भेजे गए नेताओं ने कितना और कैसा काम किया, इसका रिजल्ट भी पब्लिक कर दिया है। श्री पटवारी ने पूरी विधानसभा को आठ क्लस्टरों और कई सेक्टरों में बांट दिया था। प्रत्येक क्लस्टर और सेक्टर पर पार्टी की ओर से एक नेता लगाया गया था, जो दतिया के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर काम कर रहा था। क्लस्टर वाला नेता जनसंपर्क और नुक्कड़ सभाएं भी कर रहा था। इस रिजल्ट में टॉपर रहे पूर्व विधायक बैजनाथ कुशवाह।
श्री बैजनाथ कुशवाह को क्लस्टर नंबर 8 की जिम्मेदारी दी गई थी। उनके क्षेत्र में कांग्रेस ने 31 में से 27 बूथ जीतकर 4754 वोटों की सबसे बड़ी बढ़त बनाई। यह दतिया के सभी आठ क्लस्टर में सबसे है। दिग्विजय सिंह के सुपुत्र एवं मध्य प्रदेश के आकांक्षी मुख्यमंत्री, श्री जयवर्धन सिंह को क्लस्टर नंबर 6 दिया गया था। जहां कांग्रेस ने 35 में से 30 बूथ जीते और 3637 वोटों की बढ़त बनाई। इस प्रकार श्री जयवर्धन सिंह दूसरे नंबर पर रहे लेकिन राजनीति में जिसके हाथ में मीडिया होती है, जनता को उसी की सफलताओं के बारे में पता चलता है। श्री जयवर्धन सिंह को नंबर वन बताया जा कहां जा रहा है कि नंबर ऑफ वोट के हिसाब से नहीं बल्कि पोलिंग बूथ जीतने के हिसाब से बाबा साहब नंबर वन है। जबकि वास्तविकता यह है कि यदि श्री बैजनाथ कुशवाह के क्लस्टर से 4754 वोटों की लीड नहीं मिलती तो क्लस्टर नंबर 1,3,4 के भारी भरकम नुकसान की भरपाई नहीं हो पाती।
श्री जयवर्धन सिंह के प्यार में आंकड़ों की समीक्षा करने वालों ने यह नहीं देखा कि विधानसभा सदन में यह देखा जाता है कि कितने विधायक जीत कर आए, चाहे फिर जीत का अंतर कुछ भी हो लेकिन विधानसभा के अंदर क्लस्टर और सेक्टर के मामले में यही फार्मूला नहीं लगा सकते। यदि बैजनाथ, जयवर्धन और उपाध्याय 100% पोलिंग बूथ जीत जाते, लेकिन वोट का अंतर केवल 3000 होता है, तो दतिया में कांग्रेस पार्टी की हार पक्की थी।

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