नए कानून में नया प्रावधान, कोई अपराधी सजा से बचना नहीं चाहिए: BNSS 176-3 – Forensic investigation AIBE most important

Updesh Awasthee
क्रिमिनल मामलों में सामान्य तौर पर, संबंधित पुलिस थाने का अधिकारी ही जांच करता है और कई बार अज्ञानता या किसी अन्य कारण से जांच में गलती कर देता है जिसके कारण अपराधी को सजा नहीं मिल पाती। किसी निर्दोष को सजा ना हो जाए, इसके लिए भारतीय कानून में कई प्रावधान किए गए हैं लेकिन कोई अपराधी सजा से बचना नहीं चाहिए, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 में इसका भी प्रावधान किया गया है।

Section 176(3) of the Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (BNSS), 2023

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 176(3) एक क्रांतिकारी प्रावधान है, जो आपराधिक न्याय प्रणाली में वैज्ञानिक अन्वेषण (Forensic Investigation) को अनिवार्य बनाता है। यह धारा पूर्ववर्ती CrPC की धारा 157 का आधुनिक और उन्नत रूप है। यह धारा पुलिस जांच की प्रक्रिया में पारदर्शिता और साक्ष्यों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए लाई गई है। इसके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं: 

BNSS की धारा 176-3 के तहत, ऐसे सभी अपराधों में जिनकी सजा सात वर्ष या उससे अधिक है, जांच के दौरान न्यायालयिक विशेषज्ञों (Forensic Experts) की सहायता लेना अनिवार्य कर दिया गया है। न्यायालयिक विशेषज्ञों के लिए यह अनिवार्य है कि वे घटनास्थल (Crime Scene) पर जाएं। उनका कार्य वहां से वैज्ञानिक साक्ष्य (जैसे फिंगरप्रिंट, डीएनए साक्ष्य, रक्त के नमूने आदि) एकत्र करना और अपराध के दृश्य का निरीक्षण करना है।

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 176(3) में यह स्पष्ट प्रावधान है कि न्यायालयिक विशेषज्ञों द्वारा साक्ष्य एकत्र करने की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाएगी। यह वीडियोग्राफी किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण (जैसे मोबाइल फोन) के माध्यम से की जा सकती है। वीडियोग्राफी की जिम्मेदारी संबंधित पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी की है। 

BNSS की धारा 176-3 के माध्यम से निर्धारित इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि साक्ष्यों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो और जांच की प्रक्रिया निष्पक्ष और वैज्ञानिक तरीके से संचालित हो। वीडियोग्राफी को बाद में न्यायालय में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। यह पुलिस द्वारा की जाने वाली मैन्युअल जांच के साथ-साथ वैज्ञानिक तकनीक को जोड़ता है, जिससे अपराधी को सजा मिलने की संभावना (Conviction Rate) बढ़ जाती है। यह प्रावधान जांच में मानवीय भूलों या पक्षपात की संभावना को कम करता है। लेखक: उपदेश अवस्थी (विधि सलाहकार एवं पत्रकार)। 

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 धारा 176-3

किसी ऐसे अपराध के जो सात वर्ष या अधिक के लिए दंडनीय बनाया गया है, के होने से संबंधित प्रत्येक सूचना की प्राप्ति पर पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी ऐसी तारीख से जो इस संबंध में पांच वर्षों की अवधि के भीतर राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की जाए, अपराध में न्याय संबंधी साक्ष्य संग्रहण करने के लिए न्याय संबंधी विशेषज्ञ को अपराध स्थल पर भिजवाएगा और मोबाइल फोन या किसी अन्य इलैक्ट्रानिक डिवाइस पर प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी बनवाएगा:
परन्तु जहां ऐसे किसी अपराध के संबंध में न्याय संबंधी सुविधा उपलब्ध नहीं है वहां राज्य सरकार जब तक राज्य में उस मामले के संबंध में सुविधा उपलब्ध नहीं कराती है या नहीं तो किसी अन्य राज्य की ऐसी सुविधा के उपयोग को अधिसूचित करेगी।

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