नई दिल्ली, 29 जुलाई 2026: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर स्पष्ट कर दिया है कि, मूंग खरीदी मामले में हम कोई हेल्प नहीं कर पाएंगे, हमने 25 प्रतिशत निर्धारित किया है और 25% ही खरीदेंगे। शिवराज सिंह ने यह पत्र तब लिखा है जब आंदोलनकारी किसान, सीएम हाउस से मात्र 500 मीटर की दूरी पर है और मंत्रियों की हाई लेवल कमेटी और किसानों के प्रतिनिधियों के बीच में बातचीत चल रही थी। जबकि यदि शिवराज सिंह दो लाइन का ट्वीट भी कर देते कि हम गंभीरता पूर्व विचार कर रहे हैं, तो आज रात शांति से बीत जाती है और बातचीत भी शायद सफल हो जाती है।
हम अपनी जरूरत का 87% मध्य प्रदेश से खरीद रहे हैं: शिवराज सिंह चौहान
श्री शिवराज सिंह चौहान ने पत्र में बताया कि, ग्रीष्मकालीन मौसम 2025-26 के लिए पूरे देश में कुल 5,23,243 मीट्रिक टन मूंग की खरीदी की स्वीकृति दी गई है। इसमें से अकेले मध्य प्रदेश को 4,54,580 मीट्रिक टन की अनुमति मिली है, जो देश की कुल स्वीकृत मात्रा का 87 प्रतिशत है। पीएम-आशा (PM-AASHA) योजना के तहत अन्य राज्यों को दी गई स्वीकृतियाँ इस प्रकार हैं:
उत्तर प्रदेश: 48,298 मीट्रिक टन
गुजरात: 18,250 मीट्रिक टन
हरियाणा: 2,115 मीट्रिक टन
हमने आपको खरीदारी से कब रोका, आप जानो आपका काम जाने
केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार 'खरीदी का लक्ष्य' प्रदान नहीं करती, बल्कि पीएम-आशा योजना के पीएसएस दिशानिर्देशों के अनुसार राज्य के कुल उत्पादन का 25 प्रतिशत तक उपार्जन की सीमा स्वीकार करती है। अतिरिक्त मात्रा की अनुमति विशेष परिस्थितियों में सचिवों की समिति (CoS) के निर्णय और अखिल भारतीय उत्पादन की सीमा के आधार पर दी जा सकती है। किस प्रकार केंद्रीय कृषि मंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि हमने राज्य सरकार को खरीदारी करने से नहीं रोका है। वह अपनी जेब से खरीदारी करना चाहती है तो कर सकती है।
पिछले 5 साल में 2 लाख से 4 लाख मीट्रिक टन कर दिया, और क्या चाहिए
श्री शिवराज सिंह चौहान के पत्र के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी की स्वीकृत मात्रा में लगातार वृद्धि हुई है:
- 2021-22: 2,75,645 मीट्रिक टन
- 2022-23: 2,75,645 मीट्रिक टन
- 2023-24: 3,30,763 मीट्रिक टन
- 2024-25: 4,19,692 मीट्रिक टन
- 2025-26: 4,54,580 मीट्रिक टन (वर्तमान स्वीकृत सीमा)
इस आंकड़े के साथ केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र सरकार ने पिछले 5 साल में मध्य प्रदेश से मूंग की खरीदी का कोटा दोगुना कर दिया है। इससे ज्यादा नहीं कर सकते।
पहले 25% खरीदी करो बाद की बाद में देखेंगे
केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अवगत कराया कि 29 जुलाई 2026 तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में अब तक लगभग 60 हजार मीट्रिक टन मूंग की खरीदी की जा चुकी है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि किसानों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए मूंग की शेष खरीदी शीघ्रता से सुनिश्चित करने का कष्ट करें।
इस प्रकार केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट कर दिया है कि पहले 25% खरीदी करें, इसके बाद जो स्थिति बनेगी वह देखेंगे। अभी तत्काल कोई राहत नहीं दे सकते।
पहले भी तो राज्य सरकार ने अतिरिक्त खरीदी की थी, अब क्या प्रॉब्लम है?
यह पत्र मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना द्वारा 28 जुलाई 2026 को लिखे गए उस पत्र के जवाब में जारी किया गया है, जिसमें मूंग खरीदी की मात्रा में वृद्धि का अनुरोध किया गया था। केंद्रीय मंत्री ने यह भी याद दिलाया कि पूर्व के वर्षों में भी जब अतिरिक्त मात्रा की आवश्यकता हुई, तो राज्य सरकार ने उपार्जन किया और केंद्र ने नियमानुसार सहायता सुनिश्चित की।
इस प्रकार केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट कर दिया कि पहले भी जब जरूरत पड़ी तो राज्य सरकार ने अपने स्तर पर अतिरिक्त खरीदी कर ली थी। हालांकि इस बार परिस्थितियों भिन्न है। पहले अतिरिक्त खरीदी संभव थी लेकिन अब किसानों के पास 20 लाख मेट्रिक टन मूंग मौजूद है। जबकि केंद्र सरकार केवल चार लाख खरीदने को तैयार है।
मध्य प्रदेश सरकार की समस्या क्या है
इस मामले में मध्य प्रदेश सरकार की सबसे बड़ी समस्या यह है कि, मध्य प्रदेश में मूंग का बंपर उत्पादन हो गया है। उम्मीद थी 6 लाख मीट्रिक टन उत्पादन होगा लेकिन 20 लाख मीट्रिक टन उत्पादन हो गया है। पहले जब शिवराज सरकार के समय अतिरिक्त खरीदी की गई थी तब सरकार के ऊपर केवल 50000 मीट्रिक टन खरीदी का लोड था, इस बार 15 लाख मीट्रिक टन खरीदी का लोड है। असल में सरकार के पास ना तो इतना पैसा है और ना ही इतनी सारी मूंग रखने के लिए गोदाम है।
दूसरी सबसे बड़ी प्रॉब्लम डॉ मोहन यादव हैं। शिवराज सरकार के समय, किसानों से फसल ले ली जाती थी और फिर साल भर तक भुगतान होता था। मोहन यादव का कहना है कि, किसान का भुगतान तत्काल होना चाहिए।
शिवराज सिंह के समय आश्वासन (एक-एक दाना खरीदा जाएगा) दे दिया जाता था। फिर बाद में पूरा सिस्टम अधिकारियों के हवाले छोड़ दिया जाता था। मोहन यादव का कहना है कि, यदि कोई घोषणा करेंगे तो उसको पूरा भी करेंगे। झूठा आश्वासन नहीं दे सकते।

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