सावन का महीना आते ही हर तरफ "हर-हर महादेव" की गूंज सुनाई देने लगती है। यह केवल एक धार्मिक महीना नहीं, बल्कि शिव कृपा की वह दिव्य लहर है जो जीवन के सारे दुखों, कष्टों और दरिद्रता को एक झटके में बह ले जाती है। अगर आप लगातार ग्रहों के अशुभ प्रभाव से परेशान हैं, काम बनते-बनते बिगड़ रहे हैं या जीवन में आर्थिक तंगी ने पैर पसार रखे हैं, तो भारतीय शास्त्रों में इसका एक अचूक और सिद्ध समाधान बताया गया है - सावन में शिवलिंग का अभिषेक और पार्थिव लिंगार्चन। आइए जानते हैं कि भगवान शिव का यह सरल पूजन कैसे आपके जीवन के बड़े से बड़े संकट को टाल सकता है!
जब शिव जी की कृपा से रुक जाती है ग्रहों की बुरी चाल
शिव पुराण (विद्येश्वर एवं रुद्र संहिता), लिंग पुराण और शुक्ल यजुर्वेद (रुद्राष्टाध्यायी) के अनुसार, नवग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, शनि आदि) के स्वामी खुद महादेव हैं। ज्योतिष शास्त्र मानता है कि जब ग्रहों की दशा विपरीत होती है, तो व्यक्ति का जीवन दुर्भिक्ष (अकाल/कंगाली), रोग और मानसिक तनाव से घिर जाता है। लेकिन सावन के पवित्र महीने में की गई शिव पूजा इन सभी नकारात्मक ऊर्जाओं का शमन कर देती है।
• चंद्र ग्रह की शांति: चंद्रदेव स्वयं शिव जी के मस्तक पर सुशोभित हैं। यदि आपकी कुंडली में मन का कारक 'चंद्रमा' कमजोर है, तो शिवलिंग पर जल अर्पित करते ही मानसिक तनाव दूर होता है।
• शनि ग्रह की शांति: शनिदेव, शिव जी को अपना गुरु मानते हैं। सावन में काले तिल और शमी के पत्तों से शिव पूजन करने से शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और राहु-केतु के दोष चुटकी में दूर हो जाते हैं।
अभिषेक का अनोखा विज्ञान: किस वस्तु से क्या मिलता है फल?
शिवलिंग पर चढ़ाया जाने वाला हर एक द्रव्य (सामग्री) एक विशेष ऊर्जा और वरदान लेकर आता है।
शिव पुराण के अनुसार जानिए किस वस्तु से अभिषेक करने पर कौन सी मनोकामना पूरी होती है:
• गंगाजल से अभिषेक: यदि मन अशांत रहता हो या किसी बात का भय हो, तो शीतल जल से अभिषेक करें। यह मानसिक शांति और परम सुख देता है।
• गाय का दूध: संतान सुख की चाह रखने वालों और निरोगी काया (आरोग्य) के लिए दूध से अभिषेक सबसे उत्तम है।
• गन्ने का रस: अगर व्यापार में घाटा हो रहा हो या धन टिकता न हो, तो गन्ने के रस से रुद्राभिषेक करें। इससे अपार धन-धान्य की प्राप्ति होती है और गरीबी का नाश होता है।
• शुद्ध देशी घी: शारीरिक कमजोरी दूर करने, वंश वृद्धि और असाध्य बीमारियों से मुक्ति पाने के लिए घी की धारा अर्पित करें।
• शहद (मधु): वाणी में मिठास, समाज में आकर्षण और श्वास संबंधी रोगों से राहत दिलाता है।
• सरसों का तेल: यदि शत्रु परेशान कर रहे हों या मुकदमे का डर हो, तो सरसों के तेल से अभिषेक करने पर शत्रुओं का नाश होता है।
• काले तिल मिश्रित जल: शनि दोष की शांति, दीर्घायु और अकाल मृत्यु के योग को टालने के लिए यह रामबाण उपाय है।
सावन में कैसे करें सरल शिव पूजा?
आपको किसी जटिल विधि-विधान की आवश्यकता नहीं है; महादेव तो भोलेनाथ हैं, वे भाव के भूखे हैं!
1. सुबह स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण कर शिव मंदिर जाएं या घर पर ही मिट्टी (पार्थिव) का शिवलिंग बनाएं।
2. "ॐ नमः शिवाय" का निरंतर जप करते हुए अपनी मनोकामना के अनुसार जल, दूध या गन्ने के रस की पतली धारा शिवलिंग पर अर्पित करें।
3. इसके बाद त्रिदल बेलपत्र, धतूरा, अक्षत (चावल) और शमी के पत्ते अर्पित करें।
4. अंत में धूप-दीप जलाकर कर्पूर से आरती करें और अनजाने में हुई भूल की क्षमा मांगें।
यह संपूर्ण जानकारी और विधान शिव पुराण (विद्येश्वर एवं रुद्र संहिता), लिंग पुराण और शुक्ल यजुर्वेद (रुद्राष्टाध्यायी) से लिए गए हैं। शास्त्रों में स्पष्ट लिखा है कि शिवजी ही एकमात्र ऐसे देव हैं जो अत्यंत अल्प सेवा से प्रसन्न होकर भक्त के भाग्य की रेखाएं बदल देते हैं। इस सावन, अपनी भक्ति और श्रद्धा उपहार महादेव को अर्पित करें और अपने जीवन में आने वाले सकारात्मक बदलावों का स्वयं अनुभव करें! हर-हर महादेव! प्रस्तुति: श्री गीतांजलि ज्योतिष केंद्र, इंदौर

