शिवपुरी, 1 जुलाई 2026: कलेक्ट्रेट की ऐतिहासिक लाल बिल्डिंग एक बार फिर भ्रष्टाचार के आरोपों से गूंज उठी है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ग्वालियर ने राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी एवं पोहरी के एसडीएम जेपी गुप्ता और बछोरा हल्का पटवारी अशोक वर्मा के खिलाफ 10 हजार रुपए की रिश्वत मांगने के आरोप में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-7 के तहत मामला दर्ज किया है। यह मामला तब सामने आया जब एक किसान, बाबू सिंह ने प्रशासन के उच्च अधिकारियों की रिश्वतखोरी की शिकायत दर्ज कराई। Corruption in Shivpuri administration का यह ताजा मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।
Land Record Name Correction Bribery Case in Shivpuri
इस पूरे विवाद की जड़ जमीन के रिकॉर्ड में हुई एक मामूली त्रुटि थी। ग्राम रघुनाथपुरा स्थित कृषि भूमि के सौदे के दौरान यह पाया गया कि राजस्व रिकॉर्ड में बाबू सिंह पुत्र रायसिंह के स्थान पर बाबू पुत्र रामसिंह दर्ज था। इस नाम दुरुस्ती (name correction) के लिए आवेदन एसडीएम कार्यालय में दिया गया था। आरोप है कि इस छोटी सी गलती को सुधारने के बदले State Administrative Service officer and Pohri SDM JP Gupta ने पटवारी अशोक वर्मा के माध्यम से 10 हजार रुपए की रिश्वत (bribe) की मांग की।
EOW Gwalior Action Against Pohri SDM JP Gupta
जब फरियादी गोविंद शिवहरे और बाबू सिंह रिश्वत देने को तैयार नहीं हुए, तो उन्होंने इसकी शिकायत EOW ग्वालियर से की। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए EOW ने एक ठोस रणनीति बनाई और 25 जून को एक आरक्षक को वॉयस रिकॉर्डर देकर पोहरी भेजा। वहां अधिकारियों के बीच हुई बातचीत को रिकॉर्ड किया गया और 28 जून को जांच के बाद साक्ष्यों को सही पाते हुए दोनों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई। Legal action against corruption in Shivpuri के तहत यह एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।
Historic Red Building Shivpuri Bribery Evidence Details
इस मामले का सबसे दिलचस्प और चौंकाने वाला पहलू यह है कि रिश्वत की यह डील पोहरी में नहीं, बल्कि शिवपुरी कलेक्ट्रेट की लाल बिल्डिंग में हुई थी। बताया जा रहा है कि दोनों अधिकारी एक बैठक के सिलसिले में कलेक्ट्रेट आए थे और वहीं फरियादी से नाम सुधारने के एवज में पैसों की मांग की गई। यही वॉइस रिकॉर्डिंग (voice recording) अब इस केस का सबसे मजबूत सबूत बन गई है। विशेष रूप से, एसडीएम जेपी गुप्ता ने पदभार संभाले महज 15 दिन ही हुए थे कि वे भ्रष्टाचार के जाल में फंस गए।
Corruption Incidents in Shivpuri Administration and Administrative Impact
शिवपुरी जिला लंबे समय से रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के मामलों के कारण सुर्खियों में रहा है। लोकायुक्त और EOW की लगातार कार्रवाई के बावजूद, कलेक्ट्रेट की लाल बिल्डिंग बार-बार ऐसे शर्मनाक वाकयों की गवाह बनती रही है। SDM and Patwari bribery case in Shivpuri ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे आम जनता का भरोसा डगमगा रहा है।

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