नई दिल्ली, 4 जुलाई 2026: महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात के प्याज उगाने वाले किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है। सरकार ने प्याज की सरकारी खरीद की कीमत (procurement price) में सीधे 13% का इजाफा कर दिया है। अब तक जो प्याज 1,875 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा जा रहा था, उसके लिए अब किसानों को 2,125 रुपये प्रति क्विंटल मिलेंगे। यह नया दाम आज यानी 4 जुलाई 2026 से ही लागू हो गया है। नाफेड (NAFED) और एनसीसीएफ (NCCF) जैसी संस्थाएं इसी बढ़े हुए दाम पर किसानों से प्याज खरीदेंगी, ताकि उन्हें अपनी मेहनत का बेहतर फल मिल सके।
प्याज की कोई कमी नहीं, गोदामों में भरा है पर्याप्त माल
बाजार की स्थिति को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि देश में प्याज का अच्छा-खासा स्टॉक मौजूद है। कृषि विभाग के अनुमानों के मुताबिक, इस साल प्याज की पैदावार करीब 307.37 लाख मीट्रिक टन रहने की उम्मीद है, जो पिछले साल के बराबर ही है। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे प्रमुख राज्यों के पास प्याज का पर्याप्त भंडार है और फिलहाल बाजार में किसी भी तरह की कमी के संकेत नहीं हैं। हालांकि, मौसम के हिसाब से कीमतों में मामूली बदलाव देखा जा सकता है।
मंडियों में भरपूर आवक, पर सट्टेबाजों से रहें सावधान देशभर की मंडियों में हर रोज करीब 50,000 मीट्रिक टन प्याज पहुंच रहा है, जिसमें से अकेले महाराष्ट्र से 30,000 मीट्रिक टन से ज्यादा की आवक हो रही है। मंडियों में औसत भाव फिलहाल 18 रुपये प्रति किलो के आसपास चल रहा है, जबकि खुदरा बाजारों (Retail) में यह करीब 31 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। खबर यह भी है कि मानसून की देरी की वजह से नासिक और मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में व्यापारी इस उम्मीद में प्याज जमा कर रहे हैं कि आगे चलकर दाम बढ़ेंगे, लेकिन फिलहाल मांग में ऐसी कोई बड़ी तेजी नहीं देखी गई है।
खेती में थोड़ी देरी और विदेशी बाजार से तगड़ा मुकाबला खेती-बाड़ी की बात करें तो महाराष्ट्र के नासिक इलाके में खरीफ प्याज की बुवाई में करीब 15 दिन की देरी हुई है, वहीं कर्नाटक के कुछ हिस्सों में अब तक लगभग 60% बुवाई पूरी हो चुकी है। जहां तक विदेशों में प्याज बेचने (निर्यात) की बात है, तो जून के महीने में भारत ने करीब 1.50 लाख मीट्रिक टन प्याज बाहर भेजा है। हालांकि, अब पाकिस्तान और चीन की सस्ती प्याज अंतरराष्ट्रीय बाजारों (जैसे खाड़ी देश और श्रीलंका) में आ जाने से भारतीय व्यापारियों को कड़ी टक्कर मिल रही है, जिससे निर्यात की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है।

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