भोपाल, 4 जुलाई 2026: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह ने उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा का ऐलान कर दिया है। अयोध्या पहुंचकर वह जो करेंगे सो करेंगे लेकिन रास्ते भर में जो करेंगे, उसने कई लोगों का ब्लड प्रेशर बढ़ा दिया है। लोग जानना चाहते हैं कि दिग्विजय सिंह किस रास्ते से अयोध्या जाएंगे। वैसे तो रूट चार्ट उनको खुद ही डिस्क्लोज करना है लेकिन जब तक राजा साहब की खिचड़ी पकेगी तब तक अपन डिस्कस कर लेते हैं:-
Digvijaya Singh's Ayodhya Visit: Possible Route, Strategy and Political Significance
उज्जैन से अयोध्या की दूरी लगभग 900 किलोमीटर है। जैसा कि श्री दिग्विजय सिंह ने बताया कि वह एक दिन में लगभग 15 किलोमीटर चलेंगे। मतलब उनकी यह यात्रा लगभग 70 दिन में पूरी होगी। इस यात्रा के दौरान वह मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की लगभग 25 विधानसभाओं से गुजरेंगे। क्या करेंगे और उसका क्या असर होगा, इसका अनुमान आप खुद लगा सकते हैं। हम आपको इस समाचार में बता रहे हैं कि उनके रास्ते में कितने विधानसभा क्षेत्र आएंगे:-
1. मध्य प्रदेश (लगभग 10-12 विधानसभा सीटें)
यात्रा बाबा महाकाल की नगरी से शुरू होकर प्रदेश की राजधानी और बुंदेलखंड के केंद्र से गुजरती है:
उज्जैन जिला: उज्जैन उत्तर, उज्जैन दक्षिण और तराना।
शाजापुर जिला: शाजापुर और शुजालपुर।
सीहोर जिला: आष्टा और सीहोर।
भोपाल जिला (राजधानी): हुजूर, भोपाल मध्य, और नरेला (शहर से गुजरते समय)।
रायसेन जिला: सांची (ऐतिहासिक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण)।
सागर जिला: राहतगढ़, सागर और खुरई/मालथौन।
2. उत्तर प्रदेश (लगभग 12-13 विधानसभा सीटें)
जैसे ही श्री दिग्विजय सिंह ललितपुर से यूपी में प्रवेश करेंगे, सीटों का घनत्व और राजनीतिक हलचल बढ़ जाएगी:
ललितपुर और झांसी जिला: ललितपुर, बबीना और झांसी नगर।
जालौन जिला (उरई): माधोगढ़, उरई और कालपी।
कानपुर देहात और नगर: भोगनीपुर, पुखरायां, और कानपुर कैंट/कल्याणपुर।
उन्नाव जिला: उन्नाव (बांगरमऊ या उन्नाव सदर के करीब से)।
लखनऊ जिला (राजधानी): सरोजनी नगर, लखनऊ कैंट या लखनऊ मध्य (रूट के अनुसार)।
बाराबंकी जिला: बाराबंकी और रामनगर।
अयोध्या जिला: रुदौली और अयोध्या सदर।
दिग्विजय सिंह: राजधानी से राजधानी तक
अब दिग्विजय सिंह की चाणक्य बुद्धि देखिए। उन्होंने ऐलान तो उज्जैन से अयोध्या तक का किया है लेकिन असल में वह दोनों राज्यों की राजधानी के बीच बवाल काटने वाले हैं। उज्जैन में मुख्यमंत्री का घेराव। भोपाल में रामेश्वर शर्मा, जिसका शिकार वह पिछले 10 साल से करना चाहते हैं और विश्वास सारंग। सागर में भाजपा की गुटबाजी का फायदा और उत्तर प्रदेश में तो यह यात्रा कांग्रेस के लिए बिलकुल वैसी योगी जैसे, महात्मा गांधी ने शुरुआत में भारत यात्रा की थी। उत्तर प्रदेश की 15 विधानसभा सीटों पर खत्म हो चुकी कांग्रेस की डिटेल सर्वे रिपोर्ट दिग्विजय सिंह के पास होगी। मतलब उत्तर प्रदेश के चुनाव से पहले दिग्विजय सिंह, एक ऐसे कांग्रेस नेता बन चुके होंगे जिन्हें राहुल गांधी चाह कर भी इग्नोर नहीं कर पाएंगे, और यदि विट्ठल की कृपा से वह हो गया जो अभी आप और मैं समझ पा रहे हैं, तो बाबू- 2028 में राजा साहब के पास एक बार फिर फ्री हैंड होगा।

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