ग्वालियर, 5 जुलाई 2026: डिजिटल हाजिरी और विभागीय बैठकों के बीच पिसते स्कूल प्रभारी ग्वालियर में शिक्षकों के सामने एक ऐसा संकट खड़ा हो गया है जिसने उनकी रातों की नींद उड़ा दी है। एक तरफ शासन का डिजिटल हाजिरी (ई-अटेंडेंस) का कड़ा नियम है, जिसके बिना वेतन मिलना संभव नहीं, तो दूसरी तरफ विभाग की वे बैठकें हैं जो अक्सर स्कूल समय के दौरान ही बुलाई जाती हैं। इस दोहरी चक्की में पिसते स्कूल प्रभारियों के लिए अब अपनी ईमानदारी का प्रमाण देना और वेतन बचाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। मध्य प्रदेश शिक्षक कांग्रेस ने इस गंभीर विसंगति को लेकर अब प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
बैठकों का बोझ और हाजिरी की मजबूरी
मध्य प्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा और मध्य प्रदेश शिक्षक कांग्रेस, जिला ग्वालियर के अध्यक्ष सुरेश चंद्र रावत ने प्रशासन का ध्यान एक बड़ी तकनीकी समस्या की ओर खींचा है। लोक शिक्षण संचालनालय के निर्देशों के अनुसार, शिक्षकों का वेतन अब ई-अटेंडेंस के माध्यम से ही निकाला जाना है। विडंबना यह है कि संकुल केंद्र, जनशिक्षा केंद्र और ई.ई.ओ. कार्यालयों द्वारा अक्सर महत्वपूर्ण बैठकें उसी समय आयोजित की जाती हैं जब शिक्षकों को स्कूल में अपनी ई-अटेंडेंस लॉगिन करनी होती है। बैठक में जाने के कारण शिक्षक स्कूल में हाजिरी नहीं लगा पाते, जिससे उनके वेतन पर तलवार लटक जाती है।
जेब पर भारी पड़ता शाला प्रभार और पेट्रोल का अतिरिक्त खर्च
शिक्षक कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि जब शिक्षक बैठकों में शामिल होते हैं, तो वहां उनकी ई-अटेंडेंस दर्ज करने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होती। यदि कोई शिक्षक बैठक छोड़कर या बैठक के बाद दोबारा स्कूल जाकर हाजिरी लगाने की कोशिश करता है, तो उसे दूरी अधिक होने के कारण समय और पेट्रोल का भारी अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शाला प्रभारियों को इस अतिरिक्त जिम्मेदारी और भागदौड़ के लिए शासन की ओर से कोई भी अलग मानदेय या वाहन भत्ता नहीं दिया जाता है।
मानसिक तनाव और काम के प्रति बढ़ती अरुचि
इस अव्यवस्था का असर अब स्कूलों के शैक्षणिक माहौल पर भी पड़ने लगा है। वेतन कटने के डर और बढ़ते मानसिक दबाव के कारण शिक्षक अब शाला प्रभार लेने से कतराने लगे हैं। प्रेस नोट के अनुसार, इस समस्या की वजह से स्टाफ के बीच आपसी तालमेल भी बिगड़ रहा है और शिक्षक अपने मूल कर्तव्य पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहे हैं। कई शिक्षक अब इस भारी मानसिक तनाव के साये में काम करने को मजबूर हैं।
प्रशासन से न्याय की गुहार: जल्द समाधान की मांग
जिला अध्यक्ष सुरेश चंद्र रावत सहित जितेंद्र सिंह सिकरवार, अरविंद कुमार शर्मा, मुकेश शर्मा और कई अन्य शिक्षक नेताओं ने वरिष्ठ अधिकारियों से इस समस्या के तत्काल समाधान की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि वेतन आहरण अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं ताकि बैठकों में जाने वाले शिक्षकों की उपस्थिति मान्य की जा सके और उनके वेतन में कोई कटौती न हो। शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो उनका मानसिक दबाव और आक्रोश और बढ़ सकता है।

.webp)