भोपाल, 22 जुलाई 2026: मध्य प्रदेश में खाद वितरण भीम के दौरान ई-टोकन सिस्टम के कारण किसानों को होने वाली परेशानी, वैसे तो पूरे मध्यप्रदेश का मुद्दा है लेकिन विधानसभा में पुष्पराजगढ़ के विधायक श्री फुंदेललाल सिंह मार्को ने उठाया। पार्टी की ओर से केवल टीकमगढ़ विधायक यादवेंद्र सिंह ने उनके साथ दिया। इसके बावजूद सरकार दबाव में नजर आई।
भोपाल से कटनी जाने के बाद भी खाद नहीं मिली
विधानसभा में इस मुद्दे को प्रमुखता से विधायक श्री फुंदेललाल सिंह मार्को (पुष्पराजगढ़) ने उठाया। उन्होंने सरकार की व्यवस्था पर कटाक्ष करते हुए कहा कि किसान का नाम पोर्टल पर भोपाल के बजाय कटनी में शो कर रहा है, जिससे उसे खाद लेने के लिए इतनी दूर जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब किसान वहां पहुंचता है, तो पता चलता है कि वहां खाद उपलब्ध ही नहीं है। इसके साथ ही विधायक श्री यादवेंद्र सिंह (टीकमगढ़) ने भी शिकायत की कि उनके क्षेत्र के किसानों को 40 से 100 किलोमीटर दूर के केंद्रों के टोकन दिए जा रहे हैं।
हम जानबूझकर किसानों को परेशान नहीं कर रहे: गौरव सिंह पारधी
विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए सत्ता पक्ष के विधायक श्री गौरव सिंह पारधी (कटंगी) ने भोपाल के किसानों को कटनी में खाद मिलने की बात को सिरे से खारिज करने का प्रयास किया, हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि व्यवस्था नई होने के कारण सॉफ्टवेयर में कुछ तकनीकी कमियां (Software Glitches) हो सकती हैं।
उन्होंने कहा कि यदि कहीं विसंगति है तो उसे देखा जा सकता है, लेकिन यह कहना गलत है कि किसानों को जानबूझकर इतनी दूर भेजा जा रहा है।
कालाबाजारी पर रोक लगाने थोड़ी परेशानी जरूरी: मंत्री विश्वास सारंग
सहकारिता मंत्री श्री विश्वास सारंग ने इस मुद्दे पर सरकार का पक्ष रखते हुए बताया कि 'ई-विकास पोर्टल' के माध्यम से खाद वितरण की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि यह प्रणाली लागू होने का पहला वर्ष है, इसलिए शुरुआती दौर में कुछ परेशानियां आ सकती हैं। सहकारिता मंत्री ने तर्क दिया कि ई-टोकन व्यवस्था से खाद की कालाबाजारी पर रोक लगेगी और आने वाले समय में मध्य प्रदेश इस दिशा में एक मॉडल बनेगा।
तत्काल कोई समाधान नहीं, अगले साल देखेंगे
सदन में हुई इस चर्चा से यह स्पष्ट हुआ कि हालांकि सरकार ई-टोकन प्रणाली को एक बड़ी उपलब्धि बता रही है, लेकिन सॉफ्टवेयर की खामियों और भौगोलिक दूरियों के तालमेल की कमी के कारण धरातल पर किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसने की समस्याओं के बारे में विभागीय मंत्री को जानकारी है परंतु तकनीकी समस्याओं को दूर करने का कोई उपाय नहीं किया गया है।

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