भोपाल, 22 जुलाई 2026: मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान 21 जुलाई 2026 को सरकारी विभागों में खाली पड़े हजारों पदों और नई भर्तियों की कछुआ चाल का मुद्दा प्रमुखता से उठा। विधायक श्रीमती सेना महेश पटेल द्वारा पूछे गए प्रश्न क्रमांक 125 के उत्तर में सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं की वर्तमान स्थिति पेश की, जिस पर विपक्ष ने कड़ा असंतोष जताया।
सरकार पर जानकारी छिपाने का आरोप
विधायक श्रीमती सेना महेश पटेल ने सामान्य प्रशासन विभाग से प्रदेश के विभिन्न विभागों में रिक्त पदों का आरक्षणवार विवरण और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी के कारण मांगे थे। सरकार की ओर से राज्य मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर ने जवाब पेश किया। चर्चा के दौरान श्रीमती सेना महेश पटेल ने सरकार के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार जनवरी 2024 से जुलाई 2026 के बीच 59,394 पदों के परीक्षा परिणाम जारी हुए, लेकिन केवल 54,681 पदों पर ही आवंटन किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि 6,200 पदों को 13 प्रतिशत 'होल्ड' के नाम पर खाली छोड़ दिया गया है। विधायक ने यह भी तर्क दिया कि कर्मचारी चयन मंडल ने 46,124 पदों के लिए परीक्षाएं तो आयोजित कीं, लेकिन वास्तव में रिक्तियों की संख्या इससे कहीं अधिक है और सरकार बेरोजगार युवाओं से वास्तविक आंकड़े छिपा रही है।
सरकार का पक्ष: हमारे कारण नहीं कोर्ट के कारण देर हो जाती है
श्रीमती कृष्णा गौर ने सरकार का पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि सामान्य प्रशासन विभाग रिक्त पदों का आरक्षणवार डेटा केंद्रीयकृत रूप से संधारित नहीं करता, क्योंकि प्रत्येक विभाग स्वयं अपना नियोक्ता (Appointing Authority) है। भर्ती प्रक्रियाओं में देरी के लिए उन्होंने माननीय न्यायालयों के अंतरिम आदेशों, स्थगन (Stay) और अन्य प्रक्रियात्मक परिस्थितियों को मुख्य कारण बताया। अनुकंपा नियुक्तियों के संबंध में भी सरकार ने इसे एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया बताया और कोई निश्चित समय-सीमा देने से इनकार कर दिया।
अन्य विधायकों ने भी घेरा:
भर्ती की समय-सीमा पर सवाल भर्तियों के मुद्दे पर सदन में अन्य सदस्यों ने भी अपनी बात रखी:
विधायक श्री नितेंद्र बृजेंद्र सिंह राठौर ने लोक सेवा आयोग (MPPSC) द्वारा भर्तियों की समय-सीमा पर सवाल किया था। इसके जवाब में मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर ने बताया कि आयोग वार्षिक कैलेंडर तो जारी करता है, लेकिन अदालती हस्तक्षेप के कारण चयन सूचियों और नियुक्तियों की कोई निश्चित समय-सीमा निर्धारित करना संभव नहीं है।
विधायक श्री अजय अर्जुन सिंह ने कृषि विभाग में लगभग 60 प्रतिशत (8,468 पद) रिक्त होने का मुद्दा उठाया। किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री ऐदल सिंह कंषाना ने जवाब दिया कि 2,784 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया कर्मचारी चयन मंडल और लोक सेवा आयोग के माध्यम से प्रचलित है, लेकिन समय-सीमा यहां भी स्पष्ट नहीं की गई।
विधायक श्री पन्नालाल शाक्य ने कॉलेजों में रिक्त पदों का मुद्दा उठाया, जिसके उत्तर में उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि वर्ष 2022 और 2024 के विज्ञापनों की चयन सूचियां प्राप्त होने के बाद ही पद भरे जा सकेंगे।
विधायक श्रीमती अनुभा मुंजारे ने 1.5 लाख संविदा कर्मचारियों को नियमित करने की योजना पर सवाल पूछा था। मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर ने बताया कि संविदा नीति 2023 के तहत सीधी भर्ती के 50 प्रतिशत पद अनुभवी संविदा कर्मियों के लिए आरक्षित किए गए हैं।
कुल मिलाकर विधानसभा के बाहर और भीतर दोनों जगह सरकारी नौकरियों को लेकर सरकार से सवाल किया जा रहे हैं और सरकार के पास कोई पुख्ता जवाब नहीं है। मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री ठीक प्रकार से बचाव भी नहीं कर पा रहे हैं। आंकड़ों को छुपाया जा रहा है और सवालों से भागने की कोशिश की जा रही है।

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